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मानसून के सुहावने मौसम में अरावली की हरियाली और झरनों के बीच बसते हैं 6 पावन स्थलयात्रा
12 अग॰ 2026, 11:59 pm (3 घंटे पहले)· 2

मानसून के सुहावने मौसम में अरावली की हरियाली और झरनों के बीच बसते हैं 6 पावन स्थल

सावन और मानसून के दौरान अरावली की पहाड़ियों पर स्थित ये 6 प्रमुख धार्मिक केंद्र प्राकृतिक सुंदरता, ठंडी हवाओं और शांत माहौल का अद्भुत अनुभव कराते हैं।

मानसून आते ही राजस्थान की पहाड़ियों और प्राकृतिक स्थलों का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है। बारिश के फुहारों के बीच अरावली पर्वतमालाएं हरी चादर से ढक जाती हैं, जिससे आसपास का वातावरण अत्यधिक मनमोहक और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर हो जाता है। प्राकृतिक छटा से घिरे धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं को न केवल अध्यात्म से जोड़ते हैं बल्कि उन्हें रोज़मर्रा के शोर-शराबे से दूर सुकून का अहसास भी कराते हैं। इस मौसम में ठंडी हवाओं, बहते झरनों और हरियाली के बीच यात्रा करना अपने आप में एक अलग अनुभव होता है। सावन और बरसात के इस सुहावने समय में यदि आप प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का संगम एक साथ देखना चाहते हैं, तो आसपास स्थित 6 विशेष धार्मिक स्थल आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं।

1. सामोद वीर हनुमानजी: पहाड़ी पर आस्था और निसर्ग का अद्भुत मेल

जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत सामोद गांव में स्थित सामोद वीर हनुमानजी मंदिर आस्था और प्राकृतिक छटा का एक अनूठा केंद्र माना जाता है। ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थापित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को सीढ़ियों के माध्यम से चढ़ाई पूरी करनी पड़ती है। विशेष रूप से सप्ताह के मंगलवार और शनिवार के दिनों में यहां दर्शनार्थियों और श्रद्धालुओं का बड़ा जमावड़ा रहता है। मानसून के आगमन के साथ ही पूरी पहाड़ी हरी-भरी हो उठती है और आसमान में घने बादल छा जाते हैं। चढ़ाई के दौरान चलने वाली मंद और ठंडी हवाएं श्रद्धालुओं की थकान को कम कर देती हैं। ऊंचाई पर पहुंचते ही नीचे बसा हुआ सामोद कस्बा और दूर-दूर तक फैले प्राकृतिक परिदृश्य बेहद मनभावन नजर आते हैं।

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2. मालेश्वर महादेव: पहाड़ियों के बीच शांत वातावरण में शिव साधना

सामोद गांव के प्राकृतिक आंचल में ही भगवान शिव को समर्पित मालेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यह स्थान राजस्थान में कांवड़ यात्रियों और शिवभक्तों के लिए एक प्रमुख और पवित्र धार्मिक केंद्र माना जाता है। मुख्य रास्तों की आपाधापी से दूर पहाड़ियों की गोद में स्थित होने के कारण यह मंदिर अपने अत्यंत शांत और निसर्ग वातावरण के लिए पहचाना जाता है। सावन मास के दौरान दूर-दूर से शिवभक्त यहां जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। वर्षा के पश्चात आसपास की पहाड़ियों से पानी के प्राकृतिक झरने बहने लगते हैं, चारों ओर फैली सघन हरियाली और बादलों से घिरा गगन इस स्थल की अनुपम सुंदरता में चार चांद लगा देता है।

3. दादू पालका धाम: समतल भूमि पर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र

जयपुर ग्रामीण के अंतर्गत आने वाले सांभर क्षेत्र के नरैना में दादू पालका धाम स्थित है। अन्य स्थलों की भांति यह किसी ऊंची पहाड़ी पर न होकर समतल धरातल पर निर्मित है। सावन के महीने में जब बारिश की बूंदें धरती पर गिरती हैं, तब इस स्थल का निखार और भी बढ़ जाता है। यह धाम महान संत दादूदयाल की निर्गुण भक्ति परंपरा और आध्यात्मिक चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। मंदिर परिसर के ठीक सामने बना विशाल सरोवर और ग्रामीण परिवेश की प्राकृतिक सुंदरता यहां की मुख्य विशेषता है। निर्गुण भक्ति धारा के प्रणेता संत दादूदयाल से जुड़े होने के कारण यहां आने वाले लोगों को एक विशेष आध्यात्मिक शांति और सुकून का अहसास होता है।

4. जोबनेर माता मंदिर: ऐतिहासिक पहाड़ी पर माता का पावन धाम

जयपुर जिले के प्रसिद्ध जोबनेर क्षेत्र में स्थित जोबनेर माता मंदिर एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात है। पहाड़ी के शीर्ष पर विराजमान माता के दर्शन के लिए स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त भारी संख्या में पहुंचते हैं। मानसून के मौसम में बारिश की फुहारों से पूरी पहाड़ी निखर उठती है और अरावली का यह क्षेत्र बेहद आकर्षक दिखने लगता है। पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित यह प्राचीन मंदिर इसे साधारण धार्मिक स्थलों की तुलना में एक विशिष्ट और अलग पहचान देता है। वर्षा ऋतु में पहाड़ी के चारों ओर पसरी हरियाली और चलने वाली ठंडी बयार श्रद्धालुओं की पूरी यात्रा को अत्यंत सुगम और आनंददायक बना देती है।

5. सांभर की शाकम्भरी माता: नमक के रेगिस्तान और पहाड़ियों का अनूठा संगम

सांभर क्षेत्र में स्थित शाकम्भरी माता का मंदिर अपनी अनूठी भौगोलिक संरचना के लिए जाना जाता है। इस स्थान के एक तरफ अरावली की पहाड़ियां हैं तो दूसरी ओर दूर तक फैला विशाल सफेद नमक का रेगिस्तान मौजूद है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह परिदृश्य किसी दिव्य अनुभव से कम नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी शाकम्भरी को अन्न और वनस्पति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। ऐसी कथा है कि प्राचीन काल में जब धरती पर भीषण अकाल और संकट आया था, तब देवी ने अन्न और पेड़-पौधे उत्पन्न कर सभी जीवों की रक्षा की थी। मानसून के समय मंदिर तक पहुंचने वाली सड़कें चारों तरफ से हरियाली से घिरी दिखाई देती हैं, जिससे धार्मिक दर्शन के साथ-साथ प्राकृतिक सैर का भी आनंद मिलता है।

6. जगजीवन धाम, दादर: शहर के शोर से दूर सुकून और भक्ति

जयपुर के दादर इलाके में स्थित जगजीवन धाम धार्मिक आस्था और शांति का एक प्रमुख केंद्र है। यहां भक्तजन पूजा-अर्चना करने के साथ-साथ शांत वातावरण में कुछ समय बिताने के उद्देश्य से पहुंचते हैं। मानसून के आगमन से धाम के आसपास का समूचा क्षेत्र पेड़-पौधों की नई पत्तियों और हरियाली से खिल उठता है। सावन के महीने में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और भजनों के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है। शहरी जीवन के शोर-शराबे से उचित दूरी पर प्राकृतिक वातावरण में स्थित होने के कारण यह स्थान अध्यात्म के साथ-साथ मानसिक शांति की तलाश करने वाले पर्यटकों को भी बहुत आकर्षित करता है।

सवाल-जवाब

जयपुर के पास मानसून में घूमने के लिए कौन से मुख्य धार्मिक स्थल हैं?
सामोद वीर हनुमानजी, मालेश्वर महादेव, दादू पालका धाम (नरैना), जोबनेर माता मंदिर, शाकम्भरी माता (सांभर) और जगजीवन धाम (दादर) मानसून में घूमने के लिए प्रमुख स्थान हैं।
सामोद वीर हनुमानजी मंदिर जाने के लिए कौन से दिन विशेष माने जाते हैं?
सामोद वीर हनुमानजी मंदिर में मंगलवार और शनिवार के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए पहुंचती है।
शाकम्भरी माता मंदिर की क्या भौगोलिक खासियत है?
शाकम्भरी माता मंदिर सांभर क्षेत्र में स्थित है जहाँ एक तरफ अरावली की हरी पहाड़ियां हैं और दूसरी तरफ विशाल नमक का रेगिस्तान फैलाव लिए हुए है।
संत दादूदयाल से जुड़ा कौन सा धार्मिक स्थल नरैना में है?
सांभर क्षेत्र के नरैना में दादू पालका धाम स्थित है, जो निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत दादूदयाल की आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा हुआ है।
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