प्रकृति और हरियाली से जुड़ाव रखने वाले लोग अपने घर या बालकनी में तरह-तरह के पौधे लगाते हैं। हालांकि पौधों में कीड़े लगने की समस्या आम है, जो कई बार उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देती है। सही समय पर उचित कदम उठाने से पौधों को मुरझाने से बचाया जा सकता है और उन्हें हमेशा हरा-भरा रखा जा सकता है। बिहार के सारण जिले के दिघवारा प्रखंड के आमी गांव के रहने वाले नरेंद्र सिंह इस दिशा में एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहे हैं। वे अपने विशाल फूलों के बगीचे को सुरक्षित रखने के लिए बाजार के महंगे रासायनिक कीटनाशकों के बजाय घर पर ही प्राकृतिक उपाय तैयार करते हैं।
नीम और शैंपू से बनता है असरदार घोल
नरेन्द्र सिंह अपने बागवानी के शौक के चलते पौधों की खास देखभाल करते हैं। वे नीम की पत्तियों और साधारण शैंपू के मिश्रण से एक बेहद प्रभावी और कम लागत वाला कीटनाशक तैयार करते हैं। इस घरेलू फॉर्मूले में शैंपू के अलावा किसी भी तरह के भारी या हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। रासायनिक कीटनाशकों से अलग, यह घर में बना घोल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता और आसपास की हवा या मिट्टी को जहरीला भी नहीं बनाता है।
दो हजार से ज्यादा किस्मों के फूलों का संग्रह
फूलों के प्रति गहरी रुचि रखने वाले नरेंद्र सिंह के पास अपने बगीचे में दो हजार से अधिक किस्मों के फूलों के पौधे मौजूद हैं। जब भी इन दुर्लभ और सुंदर पौधों में कीटों का प्रकोप होता है, वे तुरंत इसी घरेलू नुस्खे का छिड़काव करते हैं। खासकर गुड़हल के पौधों में लगने वाली 'उजाला धब्बा' जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए नीम की पत्तियों के उबले पानी में शैंपू का घोल मिलाया जाता है। इस मिश्रण का छिड़काव करने से पौधे सुरक्षित रहते हैं और उनकी चमक बनी रहती है।
पिछले दस वर्षों से कर रहे हैं सफल इस्तेमाल
अपने लंबे अनुभव के बारे में बताते हुए नरेंद्र सिंह ने साझा किया कि वे पिछले 10 वर्षों से इसी आसान तरीके का उपयोग कर रहे हैं। वे सबसे पहले नीम के पत्तों को पानी में अच्छी तरह उबालते हैं और फिर उस पानी को छान लेते हैं। इसके बाद इस पानी में थोड़ा सा शैंपू मिलाया जाता है और प्रभावित पौधों पर इसका छिड़काव कर दिया जाता है। इस घरेलू उपाय से पौधा बिना किसी साइड इफेक्ट के पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है और कीड़ों से मुक्ति पा लेता है।



















