बारिश के मौसम में राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू का रंग-रूप पूरी तरह बदल जाता है। पहाड़ियां हरी चादर ओढ़ लेती हैं और बादल इतने नीचे उतर आते हैं कि लगता है हाथ बढ़ाकर छुआ जा सकता है। ज्यादातर सैलानी यहां नक्की झील जैसी मशहूर जगहों तक ही सीमित रह जाते हैं, जबकि पहाड़ों और जंगलों के बीच कुछ ऐसे छिपे हुए व्यू पॉइंट भी हैं जहां से मानसून का नजारा कहीं ज्यादा खूबसूरत दिखता है। आइए जानते हैं माउंट आबू के ऐसे 5 सीक्रेट व्यू पॉइंट के बारे में।
गोल्डन हॉर्न व्यू पॉइंट
जंगल के बीचोंबीच बसा गोल्डन हॉर्न व्यू पॉइंट ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। यहां तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं है, सैलानियों को पहाड़ों और घने जंगल के बीच से होते हुए ट्रेक करना पड़ता है। इस जगह का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां की एक चट्टान किसी जानवर के सींग जैसी दिखती है, और सुबह के वक्त पूरा पहाड़ सुनहरी रोशनी में नहाया नजर आता है। यहां से अरावली की वादियों का नजारा बेहद खूबसूरत दिखता है, खासकर मानसून में जब घाटियां बादलों से ढकी होती हैं।
नक्की झील किनारे मेंढक आकार की चट्टान
माउंट आबू की मशहूर नक्की झील के ठीक किनारे बना यह व्यू पॉइंट माउंट आबू शहर और झील के आसमानी नजारे के लिए जाना जाता है। यहां बनी एक विशाल चट्टान की बनावट हूबहू मेंढक जैसी है, जिसकी वजह से यह जगह पहचानी जाती है। यहां से अरावली की पहाड़ियों का नजारा भी बेहद सुंदर दिखता है। हालांकि इस पॉइंट तक पहुंचना थोड़ा मेहनत का काम है, क्योंकि यहां पहुंचने के लिए करीब 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
अधर देवी मंदिर के पास टेबल जैसी चट्टान
नक्की झील से करीब 3 किलोमीटर दूर अधर देवी मंदिर के पास बना यह व्यू पॉइंट एक मशहूर ट्रेकिंग स्पॉट भी है। यहां मौजूद एक बड़ी चट्टान का आकार किसी टेबल जैसा है, जिसकी वजह से इस जगह की पहचान बनी। यहां से अरावली की पहाड़ियां और चारों तरफ फैली हरियाली एक साथ देखने को मिलती है। खास बात यह है कि यहां एक कैंपिंग साइट भी है, जहां सैलानी रात में ठहर सकते हैं और खुले आसमान के नीचे पहाड़ों के बीच रात बिता सकते हैं।
केमल रॉक
माउंट आबू की तलहटी में मौजूद यह पहाड़ी दिखने में हूबहू ऊंट जैसी लगती है, यही वजह है कि इसे केमल रॉक नाम मिला। इतना ही नहीं, आसपास की रिहायशी बस्ती और वहां का स्कूल भी इसी नाम से जाना जाता है। यह जगह ट्रेकिंग के लिए भी लोकप्रिय है और यहां से आसपास के इलाके का नजारा भी बेहद खूबसूरत दिखता है।
आधार शिला, ऋषिकेश इलाका
माउंट आबू की तलहटी के ऋषिकेश इलाके में मौजूद एक पहाड़ी को आधार शिला के नाम से जाना जाता है। यहां बनी एक विशाल शिला पहाड़ी के बाकी हिस्से से अलग उठी हुई नजर आती है, जिसकी वजह से इस जगह का नाम पड़ा। इस स्थान का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है, मान्यता है कि तपस्वी राजा अंबरीष ने यहीं तपस्या की थी। पास ही बने ऋषिकेश मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु अक्सर इस शिला के दर्शन के लिए भी यहां पहुंचते हैं।
गाइड और वन विभाग की अनुमति जरूरी
माउंट आबू की इन छिपी हुई जगहों तक पहुंचने के लिए अकेले निकलना खतरे से खाली नहीं है। यह इलाका वन्यजीव क्षेत्र में आता है, इसलिए साथ में एक प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड होना जरूरी है, वरना रास्ता भटकने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा वन क्षेत्र में घूमने के लिए वन विभाग से अनुमति लेना भी अनिवार्य है। सैलानी तय फॉरेस्ट फीस चुकाकर ही इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।




















