बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सत्र का आगाज बहुत जल्द होने जा रहा है। वर्षाकाल के दौरान रोक लगाए जाने के बाद अब अक्टूबर महीने के मध्य से जंगल सफारी को फिर से पटरी पर लाने की पुरजोर कोशिशें चल रही हैं। मौसम के बदलते रुख को देखते हुए वन विभाग बेहद सतर्कता बरत रहा है, लेकिन सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो अक्टूबर के मध्य से पर्यटक एक बार फिर घने जंगलों के बीच वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे।
बाढ़ और बारिश से तय समय में आई रुकावट
सामान्य तौर पर मॉनसून का दौर खत्म होते ही जंगल सफारी पर लगी पाबंदी हटा ली जाती है और 31 सितंबर तक इसे फिर से शुरू करने की व्यवस्था रहती है। इस मर्तबा हालात काफी चुनौतीपूर्ण बन गए क्योंकि नेपाल से आए बाढ़ के तेज पानी और लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने अभ्यारण्य के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया था। जंगलों में जलभराव और खराब रास्तों की वजह से परिस्थितियां अनुकूल नहीं बन पाई थीं, जिस वजह से सफारी की शुरुआत को आगे बढ़ाकर अक्टूबर तक टालने का निर्णय लिया गया। अब ताजा तैयारियों को देखते हुए 16 अक्टूबर से जंगल सफारी का सिलसिला दोबारा शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
रास्तों की मरम्मत और बजट की रणनीति
सफारी मार्ग को ठीक करने के मामले में वन विभाग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। वन अधिकारियों के मुताबिक जंगल के भीतर सफारी ट्रैक और रास्तों की मरम्मत के लिए विभाग को पूरे साल में केवल एक बार ही बजट आवंटित किया जाता है। यदि समय से पहले मरम्मत का कार्य करा दिया जाए और फिर से तेज बारिश हो जाए, तो दोबारा ट्रैक दुरुस्त कराना प्रशासनिक और वित्तीय दोनों ही स्तरों पर संभव नहीं हो सकेगा। इसी वित्तीय सीमा और मौसम के अनिश्चित मिजाज के कारण वन अधिकारी किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से बच रहे हैं। बहरहाल, आंतरिक स्तर पर पर्यटकों के स्वागत और व्यवस्थाओं से जुड़ी सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है।
राज्य का इकलौता राष्ट्रीय उद्यान और समृद्ध जैव विविधता
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान है, जो हिमालयी तराई परिदृश्य के बेहद खूबसूरत और घने हिस्से में बसा हुआ है। यह पूरा वन क्षेत्र लगभग 901.07 वर्ग किलोमीटर के व्यापक दायरे में फैला हुआ है। भौगोलिक बनावट के लिहाज से यह इलाका अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान और परसा वन्यजीव अभ्यारण्य से बिल्कुल सटा हुआ है।
संरक्षण के गंभीर प्रयासों के चलते इस संरक्षित वन क्षेत्र में बाघों की संख्या में उत्साहजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां वयस्क बाघों और शावकों को मिलाकर बाघों का कुल कुनबा बढ़कर 54 तक पहुंच चुका है। बाघों के अलावा इस समृद्ध तराई क्षेत्र में एक सींग वाला गैंडा, भालू, तेंदुआ, हिरण, घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन जैसे दुर्लभ और महत्वपूर्ण जलीय व वन्य जीव भी स्वच्छंद विचरण करते हैं।



















