सर्दियों की शुरुआत के साथ ही देश भर में घूमने-फिरने का बेहतरीन दौर शुरू हो जाता है। सुहावने मौसम और कई प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों के चलते नवंबर के महीने में यात्रा करना एक शानदार अनुभव बन सकता है। चाहे बात पूर्वोत्तर के गुलाबी फूलों की हो, गंगा तट पर दीपों की रोशनी की हो, या फिर रेगिस्तान और जंगलों की, भारत में इस मौसम में हर तरह के पर्यटकों के लिए खास आकर्षण उपलब्ध हैं।
मेघालय का शिलांग: गुलाबी चेरी ब्लॉसम और स्थानीय संगीत
पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की राजधानी शिलांग में नवंबर की शुरुआत होते ही चारों तरफ चेरी ब्लॉसम के गुलाबी फूल खिलने लगते हैं। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए वार्ड्स लेक, शिलांग गोल्फ कोर्स और प्रसिद्ध उमियम लेक सबसे प्रमुख स्थान हैं। इस दौरान शहर में चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें लाइव म्यूजिक, लजीज खाना, कला प्रदर्शनियां और स्थानीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम शामिल होते हैं। ठंडे मौसम के बीच शहर के कैफे, स्थानीय बाजारों और आसपास फैली खासी पहाड़ियों की सैर करना पर्यटकों को काफी लुभाता है।
उत्तर प्रदेश का वाराणसी: देव दीपावली पर दीपों की अद्भुत चमक
धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र वाराणसी नवंबर में एक अलौकिक रूप ले लेता है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मनाई जाने वाली देव दीपावली के दौरान गंगा नदी के सभी घाट हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठते हैं। वर्ष 2026 में देव दीपावली का यह भव्य आयोजन 24 नवंबर को निर्धारित है। शाम के वक्त गंगा में नाव पर बैठकर जगमगाते घाटों का नजारा देखना बेहद सुकून भरा होता है। इसके साथ ही दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती, बनारस की प्राचीन गलियां और ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन यात्रा को संपूर्ण बनाते हैं।
राजस्थान का पुष्कर: ऊंटों का पारंपरिक मेला और रेतीला सफर
पारंपरिक ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति और रेगिस्तानी माहौल को करीब से देखने के लिए राजस्थान का पुष्कर एक प्रमुख केंद्र है। वर्ष 2026 का पुष्कर मेला 17 नवंबर से 24 नवंबर तक आयोजित होने जा रहा है। इस विश्व प्रसिद्ध आयोजन में ऊंट और पशुधन का बड़ा मेला लगता है, जहां रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक खेल और दिलचस्प प्रतियोगिताएं दर्शकों को आकर्षित करती हैं। इस उत्सव में शामिल होने के अलावा पवित्र पुष्कर झील और आसपास स्थित प्राचीन मंदिरों के दर्शन भी किए जा सकते हैं।
गुजरात का कच्छ: सफेद रण और पारंपरिक रण उत्सव
सफेद नमक की चादर ओढ़े कच्छ के रेगिस्तान में नवंबर से रण उत्सव की औपचारिक शुरुआत हो जाती है। वर्ष 2026-27 के लिए यह बहुप्रतीक्षित रण उत्सव 1 नवंबर से शुरू होकर 7 मार्च तक संचालित होगा। दूर-दूर तक फैले सफेद नमक के विशाल मैदान, साफ खुला आसमान और हल्की ठंड इस यात्रा को अविस्मरणीय बनाती है। कच्छ के ग्रामीण इलाकों में जाकर स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाकृतियों को देखा जा सकता है, साथ ही ऐतिहासिक सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े स्थल धोलावीरा का भ्रमण भी किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश का कान्हा: वन्यजीव सफारी और जनजातीय संस्कृति
जंगलों और वन्यजीवों के शौकीनों के लिए नवंबर कान्हा नेशनल पार्क की सैर का अनुकूल समय माना जाता है। मानसून बीतने के बाद यहां का मौसम ठंडा और सुहावना होने लगता है, जिससे जंगल सफारी का अनुभव काफी सुखद रहता है। सुबह और शाम के समय आयोजित होने वाली जीप सफारी के दौरान सैलानियों को बाघ, तेंदुआ, बारहसिंगा और गौर जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वास में देखने का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त, पार्क के आसपास के गांवों में गोंड और बैगा समुदाय की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को भी समझा जा सकता है।
ओडिशा की चिलिका झील: प्रवासी परिंदों का बसेरा और डॉल्फिन
प्रकृति प्रेमियों और बर्डवॉचर्स के लिए ओडिशा की चिलिका झील नवंबर में एक अनोखा आकर्षण पेश करती है। इस दौरान सर्दियों के प्रवासी पक्षी सुदूर देशों से यहां पहुंचने लगते हैं। मंगलाजोडी क्षेत्र में नाव की सवारी करते हुए पक्षियों की कई दुर्लभ प्रजातियों को देखा जा सकता है। वहीं झील के सतपाड़ा वाले हिस्से में जाने पर पर्यटकों को इरावदी डॉल्फिन की अठखेलियां देखने का रोमांचक अवसर मिल सकता है।
पंजाब का अमृतसर: स्वर्ण मंदिर की भव्यता और गुरु नानक जयंती
सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल अमृतसर में नवंबर का माहौल बेहद भक्तिमय रहता है। वर्ष 2026 में गुरु नानक जयंती 24 नवंबर को मनाई जाएगी। इस पावन पर्व पर पूरे स्वर्ण मंदिर परिसर को भव्य रोशनी से सजाया जाता है। शहर में धार्मिक दीवान, भजन-कीर्तन और नगर कीर्तन के रूप में भव्य जुलूस निकाले जाते हैं। हरमंदिर साहिब में मत्था टेकने के साथ लंगर सेवा में शामिल होना यहां का अनिवार्य अनुभव है, जबकि अमृतसर का मशहूर स्थानीय खानपान इस यात्रा को और भी यादगार बना देता है।
केरल का कोल्लम: शांत बैकवाटर और रोमांचक बोट रेस
दक्षिण भारत में बैकवाटर और शांत प्राकृतिक दृश्यों की तलाश कर रहे पर्यटकों के लिए केरल का कोल्लम एक बेहतरीन विकल्प है। यहां अष्टमुडी झील में होने वाली राष्ट्रपति ट्रॉफी बोट रेस में पारंपरिक लंबी नावों की रोमांचक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। खेल के इस रोमांच के अलावा, सैलानी कोल्लम के हरे-भरे बैकवाटर में नाव की धीमी सवारी करते हुए शांति और सुकून का आनंद ले सकते हैं।



















