18वें ब्रिक्स समिट के लिए दुनियाभर से मेहमानों के दिल्ली पहुंचने से पहले ही राजधानी के पांच सितारा होटलों के किराए आसमान छूने लगे हैं. समिट में हिस्सा लेने वाले देशों के राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और बड़े प्रतिनिधिमंडलों की वजह से होटल उद्योग में ऐसी हलचल मची है कि आम दिनों में मिलने वाले कमरे भी अब कई गुना ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं.
सर्च में उछाल, किराया दोगुना से ज्यादा
ट्रैवल प्लेटफॉर्म इक्सिगो के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के फाइव स्टार होटलों को खोजने वाले यूजर्स की संख्या में करीब 50 फीसदी का इजाफा हुआ है. इससे पता चलता है कि यात्री और मेहमान समिट के दौरान ठहरने के इंतजाम को लेकर पहले से ही सक्रिय हो चुके हैं. कई होटलों में तो पिछले हफ्ते की तुलना में किराया 100 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ चुका है. यह तेजी खासतौर पर 12 और 13 सितंबर की तारीखों के आसपास सबसे ज्यादा देखी जा रही है, क्योंकि इन्हीं दिनों समिट से जुड़ी सबसे बड़ी गतिविधियां होने की संभावना है. स्थिति यह हो गई है कि राजधानी के कई जाने-माने होटल इन तारीखों के लिए पूरी तरह भर चुके हैं, और जहां कहीं इक्का-दुक्का कमरे बचे भी हैं, वहां एक रात ठहरने के लिए न्यूनतम 1 लाख रुपये और अधिकतम 2.4 लाख रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं.
प्रेसिडेंशियल सुइट के लिए 14 लाख रुपये प्रति रात
ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के प्रमुखों, विदेशी राजनयिकों और हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडलों की भारी आवाजाही के चलते लुटियंस दिल्ली और एयरोसिटी इलाके के बड़े होटल लगभग पूरी तरह पैक हो चुके हैं. इन होटलों के प्रेसिडेंशियल और सुपर लग्जरी सुइट का किराया अब रिकॉर्ड 14 लाख रुपये प्रति रात तक जा पहुंचा है, जो सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना ज्यादा है. विदेशी मेहमानों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही रणनीतिक रूप से अहम इन होटलों के बड़े हिस्से को अपने लिए रिजर्व करा लिया है, जिससे आम मेहमानों के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या और भी घट गई है. सीमित उपलब्धता का असर सिर्फ लग्जरी सुइट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामान्य एग्जीक्यूटिव और डीलक्स कैटेगरी के कमरों के दाम भी कई गुना बढ़ गए हैं. सम्मेलन के दौरान लागू भारी सुरक्षा घेरे और वीवीआईपी प्रोटोकॉल की वजह से आम पर्यटकों को दिल्ली के टॉप होटलों में जगह मिलना लगभग नामुमकिन हो चुका है. इसी वजह से अब गुरुग्राम और बाकी एनसीआर इलाकों के प्रीमियम होटलों पर भी बुकिंग का जबरदस्त दबाव बन गया है, क्योंकि दिल्ली में जगह न मिलने पर लोग आसपास के शहरों का रुख कर रहे हैं.
पिछले साल से 25 फीसदी ज्यादा बुकिंग
बुकिंग प्लेटफॉर्म क्लियरट्रिप के 'पीकाबू ट्रेंड्स ट्रैकर' के अनुसार समिट वाले वीकेंड के आसपास दिल्ली में होटल बुकिंग पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 25 फीसदी बढ़ी है. यह आंकड़ा साफ बताता है कि इस बार राजधानी में मेहमानों की आमद हर लिहाज से ज्यादा रहने वाली है. होटल ताज जैसी जगहों पर सामान्य दिनों में एक रात का किराया करीब 1.5 लाख रुपये तक रहता था, जो अब बढ़कर 14 लाख रुपये तक पहुंच गया है, यानी करीब नौ गुना का उछाल. फिलहाल हालत यह है कि दिल्ली के ज्यादातर पांच सितारा होटलों में एक भी कमरा खाली नहीं बचा है, और नई बुकिंग लेना लगभग बंद हो चुका है.
विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी के लिए तैयार होटल
राजधानी के बड़े होटल भी अपने यहां ठहरने वाले विदेशी मेहमानों के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं. द ललित न्यू दिल्ली में भी कई देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों और अधिकारियों के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है. होटल के जनरल मैनेजर विशाल शर्मा के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका, बुरुंडी और यूएई समेत कई देशों के डेलिगेशन इस होटल में ठहरेंगे, जिससे समिट के दौरान अलग-अलग देशों के मेहमानों की मौजूदगी और बढ़ जाएगी. उन्होंने बताया कि ब्रिक्स समिट की वजह से कमरों की मांग में असाधारण उछाल आया है, और अब कमरे सामान्य दर की तुलना में करीब 30 फीसदी ज्यादा कीमत पर मिल रहे हैं. कुल मिलाकर देखें तो ब्रिक्स समिट ने दिल्ली के होटल कारोबार को बड़ा फायदा पहुंचाया है. विदेशी प्रतिनिधिमंडलों, अधिकारियों और अन्य यात्रियों की आवाजाही बढ़ने से जहां होटलों की कमाई बढ़ी है, वहीं सीमित उपलब्धता ने आम लोगों के लिए दिल्ली में ठहरना पहले से कहीं ज्यादा महंगा और मुश्किल बना दिया है.


















