उबला अंडा बनाने के बाद ज्यादा देर बाहर रखा तो बिगड़ सकती है सेहत, जानें सुरक्षित रखने का तरीकाकार्तिक आर्यन ने शेयर किया 'कैप्टन इंडिया' का फर्स्ट लुक, डायरेक्टर शिमित अमीन ने टीम को दी खास बधाईअब डॉक्स और स्लाइड्स के अंदर ही इमेज बनाएगा गूगल का नया पिक्स टूलमूलांक 4 राशिफल 6 सितंबर 2026: शरीर के संकेत अनदेखा करना पड़ सकता है भारी, खुद से दवा लेने से बचेंबारिश-भूस्खलन से जूझ रहे मुर्शिदाबाद में अब धरती डोली, देर रात दहशत में लोगमूलांक 5 राशिफल 6 सितंबर 2026: मित्रों और परिवार से बढ़ेगी नजदीकी, दिन रहेगा उत्साह से भरपूर45 किलो की कीया बनर्जी ने डेडलिफ्ट में उठाया 140 किलो वजन, जीता वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडलब्रिक्स समिट से पहले दिल्ली के होटलों में एक रात के 14 लाख रुपये, कमरा मिलना हुआ मुश्किलफ्रेस्नो में विमान दुर्घटना से दो की मौत, दो अन्य घायलकिराए के घर में भी बन सकती है अपने मकान की किस्मत, बस लगाएं ये 5 पौधे
बारिश-भूस्खलन से जूझ रहे मुर्शिदाबाद में अब धरती डोली, देर रात दहशत में लोगभारत
6 सित॰ 2026, 9:20 am (16 मिनट पहले)· 2

बारिश-भूस्खलन से जूझ रहे मुर्शिदाबाद में अब धरती डोली, देर रात दहशत में लोग

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में भारी बारिश और भूस्खलन के बाद शनिवार देर रात रिक्टर स्केल पर 3.7 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया, जिससे लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए.

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले को इस हफ्ते प्रकृति से जरा भी राहत नहीं मिली. पिछले कई दिनों से हो रही भारी से बहुत भारी बारिश ने जिले के कई हिस्सों में भूस्खलन ला दिया था, जिसमें एक भूस्खलन ने न्यू फराक्का रेल रूट तक ठप कर दिया, जिसे मरम्मत टीमों ने कड़ी मेहनत के बाद दोबारा चालू किया. हालात संभलते, इससे पहले ही शनिवार देर रात अचानक धरती हिल उठी और रिक्टर स्केल पर 3.7 तीव्रता के भूकंप ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी.

रात 10:24 बजे आया झटका, जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था केंद्र

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक मुर्शिदाबाद में भूकंप ठीक रात 10 बजकर 24 मिनट पर दर्ज हुआ. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.7 मापी गई, जो आमतौर पर महसूस तो हो जाती है लेकिन बड़ा नुकसान करने वाली नहीं मानी जाती. हैरानी की बात यह रही कि भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से महज करीब 10 किलोमीटर नीचे था, और NCS ने इसका केंद्र बिंदु मुर्शिदाबाद जिले में ही दर्ज किया. इतने अचानक आए झटके के बावजूद अब तक किसी तरह की चोट या नुकसान की खबर सामने नहीं आई है.

ये भी पढ़ें

धुलियान-फराक्का के बीच झटकों से लोग घरों से बाहर भागे

स्थानीय लोगों ने बताया कि झटके सबसे ज्यादा धुलियान और फराक्का के बीच वाले इलाके में महसूस हुए, यही वे इलाके हैं जो हफ्तों से बारिश और भूस्खलन की मार झेल रहे थे. देर रात आए इन झटकों ने ज्यादातर लोगों को नींद से जगा दिया और वे तब तक घरों से बाहर खड़े रहे जब तक उन्हें यकीन नहीं हो गया कि उनके घर सुरक्षित हैं. पहले से भूस्खलन और रेल सेवा बाधित होने की मार झेल चुकी आबादी के लिए यह भूकंप, भले ही तीव्रता में हल्का रहा हो, एक नई चिंता लेकर आया. जिला प्रशासन हो या NCS, दोनों में से किसी ने भी भूकंप से जुड़ी किसी जनहानि या नुकसान की पुष्टि नहीं की है.

बंगाल बेसिन में क्यों बार-बार दर्ज होते हैं ऐसे झटके

भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और उसके आसपास फैला बंगाल बेसिन लंबे समय से भूकंपीय गतिविधियों वाले क्षेत्र में गिना जाता रहा है. दशकों में आए कई बड़े भूकंपों के झटके इस बेसिन तक पहुंच चुके हैं, और विशेषज्ञों के मुताबिक यह इलाका आज भी कई सक्रिय भ्रंश क्षेत्रों यानी फॉल्ट लाइनों के असर में है. यही वजह है कि यहां आने वाले छोटे-मोटे भूकंपों को पूरी तरह असामान्य नहीं माना जा सकता, भले ही यह झटका भूस्खलन और भारी बारिश से जूझ रहे जिले के लिए बेहद मुश्किल वक्त में आया हो.

सवाल-जवाब

मुर्शिदाबाद में भूकंप कब आया?
शनिवार देर रात 10 बजकर 24 मिनट पर.
भूकंप की तीव्रता कितनी थी?
रिक्टर स्केल पर 3.7.
भूकंप का केंद्र कहां था?
NCS के मुताबिक केंद्र मुर्शिदाबाद जिले में ही, जमीन की सतह से करीब 10 किलोमीटर नीचे था.
क्या भूकंप से कोई नुकसान हुआ?
अब तक किसी तरह की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है.
भूकंप से पहले मुर्शिदाबाद में और क्या हुआ था?
भारी बारिश की वजह से जिले में भूस्खलन हुआ था, जिससे न्यू फराक्का रेल रूट बाधित हो गया था.
झटके सबसे ज्यादा कहां महसूस हुए?
धुलियान और फराक्का के बीच वाले इलाके में.
क्या बंगाल में पहले भी भूकंप आते रहे हैं?
हां, विशेषज्ञों के मुताबिक बंगाल बेसिन भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र रहा है और यहां पहले भी बड़े भूकंपों का असर पहुंच चुका है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

मुर्शिदाबाद में भारी बारिश और भूस्खलन के बीच 3.7 तीव्रता का भूकंप आना आपदा प्रबंधन के लिए एक गंभीर चुनौती है। हालांकि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे केंद्र होने के बावजूद कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन लगातार होती प्राकृतिक आपदाएं जिले की सुरक्षा व्यवस्था और जिला प्रशासन की आपदा तैयारियों की कड़ी परीक्षा ले रही हैं। बंगाल बेसिन की सक्रिय फॉल्ट लाइनों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया बलों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रहना चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 मिनट पहले

मुर्शिदाबाद में एक के बाद एक आ रही प्राकृतिक आपदाएं सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह देश के संवदेनशील भू-वैज्ञानिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। बंगाल बेसिन की सक्रिय फॉल्ट लाइनों और लगातार बारिश के बीच, यह जरूरी हो गया है कि केंद्र और राज्य की नीतियां केवल राहत कार्यों तक सीमित न रहें, बल्कि आपदा-रोधी निर्माण और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणालियों को प्राथमिकता दें ताकि भविष्य के जोखिमों को कम किया जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR