सितंबर में बोई पालक कुछ ही हफ्तों में देगी बंपर पैदावार, बुवाई शुरू करने से पहले समझ लें ये जरूरी टिप्सअजमेर के इस 250 साल पुराने मंदिर में भादवा में उमड़ती है रामदेवरा जैसी भीड़नेत्रदान से चेहरे की बनावट पर क्या असर पड़ता है? डॉक्टर रश्मि मित्तल ने दूर किए पांच बड़े भ्रमफाइव-स्टार होटलों से आगे निकलकर क्यों बढ़ रहा है रिवर्स वेकेशन का ट्रेंडहर दिन बालों में फिरने वाली कंघी में छिपी हो सकती है सिर की सेहत बिगाड़ने वाली गंदगीईरान का बड़ा पलटवार, अमेरिकी युद्धपोतों पर दागी बैलिस्टिक मिसाइलेंग्वालियर में विवेकानंद तिराहे के पास बस में आग, 25 यात्रियों ने कूदकर बचाई जानग्रीस के एयरशो में करतब दिखाते समय आग का गोला बना F-4 फैंटम, दोनों पायलट नहीं बचेबिलासपुर में अलग नगर निगम की मांग पर गरमाई सियासत, अमित तिवारी का पांचवें दिन भी अनशन जारीपाकिस्तान पर बड़ी जीत के बाद हरमनप्रीत कौर के कड़े तेवर, ऐतिहासिक मैच में रचा नया कीर्तिमान
फाइव-स्टार होटलों से आगे निकलकर क्यों बढ़ रहा है रिवर्स वेकेशन का ट्रेंडयात्रा
6 सित॰ 2026, 7:34 am (17 मिनट पहले)· 2

फाइव-स्टार होटलों से आगे निकलकर क्यों बढ़ रहा है रिवर्स वेकेशन का ट्रेंड

आधुनिक सुख-सुविधाओं और आरामदायक जीवन से दूरी बनाने का नया तरीका इन दिनों यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लोग लग्जरी रिसॉर्ट्स की जगह कठिन और शांत जगहों पर छुट्टियां बिताना पसंद कर रहे हैं।

छुट्टियों की योजना बनाते ही दिमाग में आमतौर पर आलीशान होटल, आधुनिक कमरे और हर वक्त सेवा के लिए तैयार लोग आ जाते हैं। लेकिन इन सारी सुख-सुविधाओं को पूरी तरह पीछे छोड़कर एक बिल्कुल उलट शैली इन दिनों लोगों को अपनी ओर खींच रही है। इस नए चलन के तहत यात्री ऐसी जगहों की तलाश कर रहे हैं जहाँ आधुनिक सुविधाएं न के बराबर हों और जीवन बेहद साधारण हो।

रिवर्स वेकेशन का असली अर्थ

इस अनूठी जीवनशैली का सीधा मतलब रोजमर्रा के आरामदायक जीवन से कुछ दिनों के लिए पूरी तरह किनारा करना है। लोग महंगे और भव्य रिसॉर्ट्स में रहने के बजाय दूरदराज के ग्रामीण इलाकों, साधारण होमस्टे या जंगल के बीच बने लकड़ी के केबिन चुन रहे हैं। इसका मकसद जानबूझकर खुद को कष्ट देना नहीं है, बल्कि आधुनिक चकाचौंध और स्क्रीन की दुनिया से कुछ पल के लिए मुक्ति पाना है।

ये भी पढ़ें

शहरों की भागदौड़ से बढ़ता मोहभंग

आज के समय में महानगरों की दिनचर्या बेहद तेज हो चुकी है जहाँ हर जरूरत एक इशारे पर पूरी हो जाती है। ऑनलाइन ऑर्डर से लेकर मिनटों में मिलने वाली सेवाओं ने इंसानी जीवन को पूरी तरह मशीनी बना दिया है। यहाँ तक कि सुकून के पल तलाशने के लिए की जाने वाली छुट्टियों की प्लानिंग भी अब एक तनावपूर्ण काम बन गई है। इसी तनाव से राहत पाने के लिए लोग इस अनोखी शैली की तरफ रुख कर रहे हैं, जहाँ इंटरनेट की दुनिया से दूर प्रकृति के करीब वक्त बिताया जा सके।

असुविधाओं में तलाश

विशेषज्ञों का मानना है कि एसी, वाई-फाई और तेज इंटरनेट जैसी तकनीकें अब इंसानी जरूरत का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। इनसे कुछ दिनों का अलगाव इन चीजों की असली अहमियत समझाता है। शुरुआत में नेटवर्क न होने या मनोरंजन के साधन न मिलने पर थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन वही सन्नाटा कुछ ही घंटों में मानसिक शांति का माध्यम बन जाता है।

इस अनूठे सफर को रोमांचक बनाने के तरीके

लोग अपनी छुट्टियों को खास और चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए कई तरह के कदम उठा रहे हैं। इनमें पूरी तरह से डिजिटल दूरी बनाना सबसे प्रमुख है, जहाँ मोबाइल सिग्नल न मिलने वाले क्षेत्रों को चुना जाता है। इसके अलावा पक्के कमरों की जगह मिट्टी के घरों या तंबुओं में रहना पसंद किया जाता है जहाँ बिजली और पानी की आपूर्ति भी सीमित होती है। स्थानीय जीवनशैली को अपनाना, खुद लकड़ी जलाकर भोजन तैयार करना और बिना किसी बाहरी मदद के लंबी पैदल यात्रा करना इस अनुभव का मुख्य हिस्सा बन चुका है।

यात्रा का उद्देश्य अब केवल यह दिखाना नहीं रह गया है कि आपने कितनी महंगी जगह पर समय बिताया। आधुनिक जीवन की छोटी-छोटी सुख-सुविधाओं का असली मोल समझने की चाहत ही आज के यात्रियों को इस अनूठे रास्ते पर ले आई है।

सवाल-जवाब

रिवर्स वेकेशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य आधुनिक सुख-सुविधाओं और डिजिटल दुनिया से कुछ दिनों के लिए दूर रहकर मानसिक शांति पाना है।
इस ट्रेंड में लोग किस तरह की जगहों पर रुकते हैं?
लोग महंगे रिसॉर्ट्स की बजाय छोटे होमस्टे, गांवों और जंगल के केबिन में रहना पसंद करते हैं।
डिजिटल डिटॉक्स का इसमें क्या महत्व है?
लोग ऐसे इलाके चुनते हैं जहां मोबाइल नेटवर्क न हो ताकि वे स्क्रीन से पूरी तरह कट सकें।
इस तरह की छुट्टियों से क्या फायदा मिलता है?
इससे जीवन की रफ्तार धीमी होती है और रोजमर्रा की छोटी सुविधाओं की असली कीमत समझ आती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR