पावरलिफ्टिंग की दुनिया में भारत को एक नया सितारा मिल गया है। मात्र 45.70 किलोग्राम की काया वाली 21 वर्षीय कीया बनर्जी ने डेडलिफ्ट में अपने वजन से करीब तीन गुना भारी वजन उठाकर सबको चौंका दिया। यह कारनामा उन्होंने किसी सामान्य मुकाबले में नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय चैंपियनशिप के मंच पर कर दिखाया।
सन सिटी में रचा कमाल
साउथ अफ्रीका के सन सिटी शहर में IPF वर्ल्ड सब-जूनियर और जूनियर क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन हुआ, जिसमें कीया ने 47 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया। इंडिविजुअल डेडलिफ्ट स्पर्धा में उन्होंने 140 किलोग्राम भार जमीन से उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। गौर करने वाली बात यह है कि उनका अपना वजन इस भार के तीसरे हिस्से से भी कम, यानी सिर्फ 45.70 किलोग्राम है, जिससे उनकी ताकत और तकनीक दोनों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्क्वाट और बेंच प्रेस में भी दिखाया दम
चैंपियनशिप में कीया की काबिलियत सिर्फ डेडलिफ्ट तक सीमित नहीं रही। उन्होंने स्क्वाट राउंड में 90 किलोग्राम भार उठाया और बेंच प्रेस में 50 किलोग्राम वजन के साथ अपनी पकड़ मजबूत साबित की। पावरलिफ्टिंग में आमतौर पर इन तीनों स्पर्धाओं, यानी स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट के प्रदर्शन को जोड़कर ही खिलाड़ी की कुल रैंकिंग तय होती है। कीया के मामले में तीनों स्पर्धाओं को मिलाकर कुल भार 280 किलोग्राम रहा, जिसके आधार पर उन्हें अपने वर्ग में सिल्वर मेडल दिया गया।
कौन हैं कीया बनर्जी
21 साल की कीया बनर्जी भारत की उन गिनी-चुनी युवा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने बेहद कम उम्र में स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स में अपनी अलग पहचान बना ली है। लगातार कड़ी ट्रेनिंग और सख्त अनुशासन के बलबूते उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी कई बार पदक जीते हैं, और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी काबिलियत साबित कर दी है। सब-जूनियर और जूनियर वर्ग जैसी शुरुआती श्रेणियों में इस तरह का प्रदर्शन भविष्य में उनसे और बड़ी उम्मीदें बंधाता है।
महिला खिलाड़ियों के लिए मिसाल
कीया की यह उपलब्धि खासतौर पर उन युवा लड़कियों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आई है जो भारी वजन उठाने वाले खेलों की दुनिया में अब तक बनी पुरानी सोच और बंदिशों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं। स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स को लंबे समय तक पुरुष-प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन कीया जैसी खिलाड़ी इस धारणा को हर प्रतियोगिता के साथ चुनौती दे रही हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि लगातार मेहनत, सही तकनीक और मजबूत इरादों से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


















