अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों की जब भी चर्चा होती है, तो आम तौर पर दिल्ली के हौज खास मेट्रो स्टेशन को ही सबसे गहरा मान लिया जाता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर ऐसे कई मेट्रो स्टेशन मौजूद हैं जो अत्यधिक गहराई में बनाए गए हैं। दुर्गम पहाड़ी रास्तों, नदियों की विशेष गहराई तथा संभावित बम हमलों से बचाव के लिए इंजीनियरों को इन्हें जमीन के बहुत नीचे तैयार करना पड़ा था। इन चुनिंदा स्टेशनों की गहराई 100 मीटर से भी अधिक है। यहां एस्केलेटर के सहारे नीचे उतरने में 8 मिनट तक का समय लग जाता है, जबकि तेज रफ्तार लिफ्ट से नीचे जाने पर कान सुन्न पड़ जाते हैं और ऐसा अनुभव होता है मानो किसी हवाई जहाज में बैठे हों।
चीन के चोंगकिंग में स्थित होंगयानकुन मेट्रो स्टेशन
इस सूची में पहले पायदान पर चीन के चोंगकिंग शहर में बना होंगयानकुन मेट्रो स्टेशन आता है, जो वर्तमान में दुनिया का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन है। इसकी कुल गहराई 116 मीटर मापी गई है, जो कि किसी 40 मंजिला उल्टी इमारत के बराबर बैठती है। इसके सबसे ऊपरी गेट से एस्केलेटर के जरिए प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में पूरे 8 मिनट का लंबा समय लग जाता है। यहां आधुनिक और तेज रफ्तार लिफ्ट भी लगाई गई हैं, जो हवाई जहाज की तरह यात्रियों के कान सुन्न कर देती हैं। खास बात यह है कि इस स्टेशन पर 860 सीढ़ियों वाली चढ़ाई की अनोखी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं।
उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग का रहस्यमयी मेट्रो नेटवर्क
उत्तर कोरिया की राजधानी में स्थित प्योंगयांग मेट्रो सिस्टम दुनिया भर के यात्रियों के लिए किसी पहेली जैसा बना हुआ है। सरकार के आधिकारिक दावों के अनुसार, इसका पूरा नेटवर्क 110 मीटर से भी ज्यादा गहराई में फैला हुआ है। 1970 के दशक में तैयार किए गए इस स्टेशन को बनाने का मुख्य उद्देश्य केवल परिवहन नहीं बल्कि इसके साथ-साथ एक परमाणु बम शेल्टर का निर्माण करना भी था। यहां के मेट्रो स्टेशनों को भव्य झूमरों और शानदार संगमरमर से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया है। एस्केलेटर की मदद से यहां नीचे उतरने में लगभग साढ़े तीन मिनट का समय लगता है।
यूक्रेन के कीव का ऐतिहासिक आर्सेनलना स्टेशन
यूक्रेन के कीव शहर में स्थित आर्सेनलना स्टेशन 105.5 मीटर की गहराई पर स्थित है। लंबे समय तक इसे दुनिया का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन होने का गौरव प्राप्त था। यहां की खराब मिट्टी और भूजल की गंभीर समस्या के कारण इंजीनियरों को इसके कंस्ट्रक्शन डिजाइन में कई बार महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़े थे। यहां एस्केलेटर से प्लेटफार्म तक जाने में करीब 5 मिनट का वक्त लगता है। इसके अलावा, साल 2022 के युद्ध के दौरान जब मिसाइल हमले हो रहे थे, तब हजारों स्थानीय नागरिकों ने इसी गहरी पनाह में छिपकर अपनी जान बचाई थी।
यूक्रेन के कीव में स्थित जोलोटी वोरोटा मेट्रो स्टेशन
यूक्रेन की राजधानी कीव में ही 96.5 मीटर की गहराई पर बना जोलोटी वोरोटा स्टेशन यूरोप के सबसे सुंदर मेट्रो स्टेशनों में शुमार किया जाता है। साल 1989 में शुरू हुए इस स्टेशन की वास्तुकला किसी प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर जैसी प्रतीत होती है। इसकी दीवारों पर पुराने जमाने के शासकों और संतों के 80 से अधिक मनमोहक मोजेक चित्र उकेरे गए हैं। युद्ध के कठिन समय में यह मेट्रो स्टेशन भी शहर के आम नागरिकों के लिए एक बेहद मजबूत सुरक्षा कवच साबित हुआ था।
चीन के चोंगकिंग का होंगतुडी स्टेशन
चीन के चोंगकिंग शहर में ही स्थापित होंगतुडी स्टेशन 94.47 मीटर की गहराई तक जाता है। एक समय ऐसा भी था जब इसे चीन का सबसे गहरा स्टेशन माना जाता था। यहां एक मेट्रो लाइन से दूसरी लाइन पर स्विच करना किसी कठिन भूलभुलैया को पार करने जैसा अनुभव देता है, क्योंकि इस विशाल स्टेशन के भीतर 90 से अधिक एस्केलेटर लगाए गए हैं। इतनी अत्यधिक सीढ़ियों और भारी-भरकम गहराई की वजह से यह स्टेशन इंटरनेट पर भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
कीव का यूनिवर्सिटेट मेट्रो स्टेशन और इसका शरण स्थल रूप
यूक्रेन की राजधानी कीव में ही एक और महत्वपूर्ण यूनिवर्सिटेट मेट्रो स्टेशन स्थित है जो 87 मीटर की गहराई पर बना हुआ है। इसे साल 1960 में यात्रियों के लिए खोला गया था और यह लाल रंग के संगमरमर के खूबसूरत खंभों के साथ बेहद शानदार नजर आता है। यह स्टेशन अब केवल एक साधारण मेट्रो स्टॉप नहीं रह गया है, बल्कि साल 2022 के भीषण रूसी सैन्य हमले के दौरान इसने आम नागरिकों के लिए एक सुरक्षित बम शेल्टर की भूमिका निभाई, जहां हजारों लोगों ने शरण ली थी।
सेंट पीटर्सबर्ग का एडमिरलतेस्काया स्टेशन
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में बना एडमिरलतेस्काया 86 मीटर गहरा स्टेशन है जो इस पूरे शहर का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन कहलाता है। यहां की ऐतिहासिक और पुरानी इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वजह से इसे बनाने में कई दशक बीत गए और आखिरकार साल 2011 में इसे जनता के लिए खोला जा सका। कई वर्षों तक ट्रेनें इस स्टेशन से बिना रुके सीधे गुजरती रहती थीं, जिस वजह से लोग इसे भूतिया स्टेशन के नाम से भी पुकारने लगे थे। यहां यात्रियों को नीचे पहुंचाने के लिए 125 मीटर लंबे विशाल एस्केलेटर का सहारा लेना पड़ता है।
रूस के मॉस्को में पार्क पोबेडी स्टेशन
रूस की राजधानी मॉस्को में स्थित पार्क पोबेडी दुनिया के सबसे गहरे मेट्रो स्टेशनों में शामिल है, जो जमीन से 84 मीटर नीचे है। इसकी सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यूरोप का सबसे लंबा एस्केलेटर है, जिसमें कुल 740 सीढ़ियां बनी हुई हैं। इस लंबे एस्केलेटर के जरिए नीचे उतरने या वापस ऊपर आने में लगभग तीन मिनट का समय लगता है, और इसका रास्ता इतना लंबा है कि आप खड़े होकर एक सिरे से दूसरे सिरे को देख भी नहीं सकते। इसे साल 2003 में आम लोगों के लिए शुरू किया गया था।
अमेरिका के पोर्टलैंड में वाशिंगटन पार्क स्टेशन
वाशिंगटन पार्क का मेट्रो स्टेशन अमेरिका के पोर्टलैंड शहर में स्थित सबसे प्रमुख ट्रांजिट स्टेशन माना जाता है। यह साल 1998 में खुला था और जमीन के ठीक 79 मीटर नीचे गहराई में स्थित है। इसके चारों तरफ मौजूद विशेष चट्टानों के कारण यहां का तापमान हमेशा 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना रहता है। इस गहराई तक यात्रियों को पहुंचाने के लिए एस्केलेटर के स्थान पर तेज रफ्तार वाले एलीवेटर का उपयोग किया जाता है, जो पलक झपकते ही नीचे पहुंचा देते हैं।
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग का प्लोशचाद लेनिना स्टेशन
इस श्रृंखला में दसवें स्थान पर रूस के सेंट पीटर्सबर्ग का प्लोशचाद लेनिना मेट्रो स्टेशन आता है। यह स्टेशन जमीन से 67 मीटर की गहराई पर बनाया गया है। इसे साल 1958 में आम जनता के लिए खोला गया था। इस स्टेशन का ऐतिहासिक जुड़ाव रूस के महान नेता लेनिन से रहा है। इसका डिजाइन काफी साधारण लेकिन देखने में आकर्षक है, जिसमें लाल और सफेद रंगों का प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया है। शुरुआत में यहां रोशनी थोड़ी कम हुआ करती थी, लेकिन साल 2006 में इसे और अधिक चमकदार और आधुनिक स्वरूप दे दिया गया।



















