झारखंड के कोडरमा जिले में मानसून की झमाझम बारिश ने एक अद्भुत प्राकृतिक छटा बिखेर दी है। लंबे समय से सूखी पड़ी पहाड़ियां, नदियां और घाटियां अब पूरी तरह से जीवंत हो चुकी हैं। इस सुहावने मौसम और ठंडी हवाओं के बीच जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थल भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। इन खूबसूरत जगहों में वृंदाहा और पेट्रो झरने विशेष रूप से लोगों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं, जहां का मनमोहक नजारा किसी जन्नत से कम नहीं लग रहा है। बारिश के पानी ने इन झरनों की रफ्तार और खूबसूरती को कई गुना बढ़ा दिया है।
प्रकृति का एक शानदार नजारा
पहाड़ों के बीच से सैकड़ों फीट की ऊंचाई से तेज गति से गिरता सफेद पानी एक बेहद शानदार दृश्य पेश कर रहा है। चारों तरफ मीलों तक फैली घनी हरियाली, बादलों को छूते ऊंचे पहाड़, समतल और विशाल चट्टानें प्रकृति प्रेमियों को असीम सुकून दे रही हैं। इन झरनों की कलकल करती तेज आवाज और ऊंचे पेड़ों पर चहचहाते रंग-बिरंगे पक्षियों का शोर लोगों को एक अलग ही मानसिक शांति का अनुभव कराता है। यह जगह शहरी जीवन की भागदौड़ और प्रदूषण से दूर एक बेहतरीन आश्रय बन गई है।
पर्यटकों के लिए बना आकर्षण का केंद्र
सप्ताहांत और छुट्टियों के दिन यहां का नजारा किसी बड़े और खुशनुमा मेले जैसा होता है। सिर्फ कोडरमा या इसके आसपास के स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार और अन्य दूरदराज के इलाकों से भी भारी संख्या में पर्यटक यहां का रुख कर रहे हैं। लोग अपने पूरे परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने, प्राकृतिक नजारों के बीच खूबसूरत तस्वीरें खींचने और शांति के पल बिताने के लिए इन झरनों पर पहुंच रहे हैं। यह जगह प्रकृति के करीब समय बिताने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन गई है।
सात प्राकृतिक कुंडों का अनोखा सफर
सतगांवा प्रखंड के घने जंगलों में स्थित पेट्रो वॉटरफॉल अपनी एक खास और अनोखी भौगोलिक बनावट के लिए पूरे इलाके में मशहूर है। इस विशाल झरने का मुख्य जलस्रोत महावर पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर मौजूद एक बिल्कुल साफ प्राकृतिक कुंड है। मानसून की बारिश का साफ पानी सबसे पहले पहाड़ की चोटी वाले इसी बड़े कुंड में जमा होता है। इसके बाद यह पानी धीरे-धीरे पहाड़ की पथरीली ढलानों से रिसते हुए नीचे की ओर अपना रास्ता बनाता है। इस लंबे सफर में पानी सात अलग-अलग प्राकृतिक कुंडों से होकर गुजरता है और अंत में तलहटी तक पहुंचता है।
जड़ी-बूटियों से होकर गुजरता पानी
पहाड़ की चोटी से लेकर नीचे जमीन तक आने की यह पूरी प्रक्रिया कई तरह के जंगली पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों के बीच से होकर पूरी होती है। यही मुख्य वजह है कि झरने का पानी न सिर्फ मिट्टी और गंदगी से बेहद साफ रहता है, बल्कि इसमें जंगल की जड़ी-बूटियों के प्राकृतिक गुण और खनिज भी अच्छी तरह घुल जाते हैं। यह प्राकृतिक जल शोधन प्रणाली पानी की गुणवत्ता को बरकरार रखती है।
मीठे जल की अद्भुत खासियत
स्थानीय निवासियों का गर्व के साथ कहना है कि पेट्रो झरने का पानी स्वाद में बहुत ही ज्यादा मीठा और देखने में एकदम निर्मल है। इस जगह पर पूरे दिन की पिकनिक मनाने आने वाले लोगों की सबसे खास बात यह देखने को मिलती है कि वे बाजार से मिलने वाले महंगे बोतलबंद पानी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते। खाना पकाने से लेकर प्यास बुझाने तक के लिए वे झरने के इसी बहते प्राकृतिक जल पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं। पानी की शुद्धता और स्वाद से प्रभावित होकर कई सैलानी लौटते वक्त इसे अपने साथ बड़े-बड़े डिब्बों और बोतलों में भरकर अपने घर भी ले जाते हैं।
स्थानीय लोगों की मान्यता और फायदे
बासोडीह के पूर्व पंचायत समिति सदस्य निहाज अंसारी और इलाके के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव प्रजापति ने इस पर्यटन स्थल की खासियत पर विस्तार से रोशनी डाली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रो वॉटरफॉल का असली उद्गम महावर पहाड़ की चोटी का वही प्राकृतिक कुंड है। उनका कहना है कि जब पानी सात अलग-अलग कुंडों से होकर नीचे की ओर गिरता है, तो हर स्तर और चट्टान पर पानी के टकराने की एक अलग, सुरीली गूंज पैदा होती है। आसपास का बिल्कुल शांत माहौल और पहाड़ों की घनी हरियाली इस जगह को जादुई बना देती है। इसके अलावा, स्थानीय लोगों में यह पक्का विश्वास है कि इस झरने के साफ पानी से पकाया गया खाना बहुत ही स्वादिष्ट होता है और यह पानी शरीर के पाचन तंत्र को भी तेजी से दुरुस्त रखता है।




















