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3 सित॰ 2026, 5:38 am (25 मिनट पहले)· 2

मानसून में लखीसराय के श्रृंगी ऋषि धाम की रंगत देखकर आप मनाली भूल जाएंगे

लखीसराय स्थित श्रृंगी ऋषि धाम मानसून में हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक जलकुंडों से निखर उठा है। जानिए रामायण काल से जुड़े इस धार्मिक व एडवेंचर पर्यटन स्थल की खासियतें और पहुंचने का तरीका।

बिहार के पर्यटन मानचित्र पर लखीसराय जिले में स्थित श्रृंगी ऋषि धाम प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का एक अद्भुत केंद्र बनकर उभर रहा है। घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और पथरीले रास्तों से घिरा यह स्थान सैलानियों के लिए किसी छिपे हुए खजाने से कम नहीं है। बारिश के दिनों में जब यहां की वादियां हरी-भरी हो जाती हैं, तो इसकी तुलना कश्मीर और मनाली जैसे प्रसिद्ध पर्वतीय स्थलों से होने लगती है। हर साल मानसून के समय यहां दूर-दूर से पर्यटक और श्रद्धालु प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने पहुंचते हैं।

पौराणिक मान्यताएं और धार्मिक महत्व

श्रृंगी ऋषि धाम का नाता केवल प्राकृतिक खूबसूरती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी है। लोक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रामायण काल में महर्षि श्रृंगी ने इसी रमणीक पहाड़ी की गुफाओं में वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। ऐसा माना जाता है कि अयोध्या के राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति की कामना से जो पुत्रकामेष्टि यज्ञ का आयोजन कराया था, उसके मुख्य पुरोहित महर्षि श्रृंगी ही थे। पहाड़ी पर स्थित प्राचीन गुफा में स्थापित शिवलिंग और महर्षि की तपोस्थली आज भी लाखों लोगों के लिए अटूट श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। यहां आने वाले लोग पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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मानसून में निखरती प्राकृतिक सुंदरता

जैसे ही बारिश का मौसम दस्तक देता है, इस धाम की रंगत पूरी तरह बदल जाती है। पहाड़ियों से नीचे की ओर बहने वाले प्राकृतिक जलस्रोत लबालब भर जाते हैं। पहाड़ों से गिरता पानी नीचे बने बड़े जलकुंडों में इकट्ठा होता है, जिससे जलाशयों का जलस्तर बढ़ जाता है। चारों तरफ फैली सघन हरियाली, बादलों से ढकी ऊंची चोटियां और घने जंगल के बीच से गुजरते टेढ़े-मेढ़े जंगली रास्ते मन को मोह लेते हैं। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह नजारा बेहद खास होता है। यहां की शांत और मनोरम आबोहवा में वक्त बिताना और खूबसूरत तस्वीरें कैमरे में कैद करना एक यादगार अनुभव बन जाता है।

ट्रेकिंग और एडवेंचर का अनोखा अनुभव

रोमांच और एडवेंचर की चाह रखने वालों के लिए भी यह स्थान बेहद मुफीद है। श्रृंगी ऋषि आश्रम से ऊपर की तरफ जाता हुआ एक पहाड़ी रास्ता ट्रेकिंग के शौकीनों को खूब आकर्षित करता है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, पहाड़ी की ऊंचाई पर एक प्राचीन कुआं मौजूद है, जहां तक पहुंचने के लिए पर्यटक ट्रेकिंग करते हैं। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से होकर कुएं तक की चढ़ाई पूरी करना अपने आप में रोमांच से भरा काम है। यही वजह है कि मानसून के दौरान यहां एडवेंचर पसंद करने वाले युवाओं की अच्छी खासी भीड़ देखी जाती है।

श्रृंगी ऋषि धाम कैसे पहुंचे?

यातायात और कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यहां पहुंचना काफी आसान है। श्रृंगी ऋषि धाम लखीसराय जिला मुख्यालय के साथ-साथ प्रसिद्ध किऊल रेलवे जंक्शन से लगभग 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। किऊल रेलवे स्टेशन से कजरा या चानन की तरफ जाने वाले मार्ग से सड़क के जरिए यहां बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है। यात्रियों की सुविधा के लिए निजी वाहनों के अलावा ऑटो रिक्शा और टैक्सी सेवाएं भी स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इसलिए यहां की यात्रा में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

सवाल-जवाब

श्रृंगी ऋषि धाम बिहार के किस जिले में स्थित है?
यह धाम बिहार के लखीसराय जिले में स्थित है और किऊल रेलवे जंक्शन से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर है।
श्रृंगी ऋषि धाम का धार्मिक और पौराणिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि रामायण काल में महर्षि श्रृंगी ने यहां तपस्या की थी और राजा दशरथ के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया था।
मानसून के मौसम में यहां कौन-कौन सी गतिविधियां खास हैं?
बारिश के दिनों में पर्यटक यहां प्राकृतिक जलकुंडों का नजारा देख सकते हैं, फोटोग्राफी कर सकते हैं और पहाड़ी पर प्राचीन कुएं तक ट्रेकिंग का आनंद ले सकते हैं।
किऊल रेलवे स्टेशन से श्रृंगी ऋषि धाम कैसे पहुंचा जा सकता है?
किऊल स्टेशन से कजरा या चानन सड़क मार्ग द्वारा ऑटो, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
क्या श्रृंगी ऋषि धाम में ट्रेकिंग की सुविधा उपलब्ध है?
हां, श्रृंगी ऋषि आश्रम से पहाड़ी के ऊपर स्थित प्राचीन कुएं तक एक ट्रेकिंग मार्ग बना हुआ है।
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