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रांची के जलप्रपातों में उफान से बढ़ा खतरा, जोन्हा और सीता फॉल्स जाने वाले पर्यटकों के लिए चेतावनी जारीयात्रा
3 सित॰ 2026, 9:28 am (55 दिन पहले)· 3

रांची के जलप्रपातों में उफान से बढ़ा खतरा, जोन्हा और सीता फॉल्स जाने वाले पर्यटकों के लिए चेतावनी जारी

झारखंड में जारी भारी बारिश के कारण रांची के जोन्हा और सीता फॉल्स सहित प्रमुख झरने और नदियां उफान पर हैं। प्रशासन ने पर्यटकों को तेज बहाव और फिसलन भरी चट्टानों से दूर रहने की हिदायत दी है।

झारखंड की राजधानी रांची और इसके आसपास के इलाकों में बीते कई दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदियों, जलाशयों और जलप्रपातों का जलस्तर अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया है। प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज से देखा जाए तो बारिश के इस मौसम में रांची की वादियां, पहाड़ियां और जंगल हरी-भरी चादर से ढक गए हैं। पहाड़ियों की ऊंचाई से तेजी से नीचे गिरती सफेद जलधाराएं लोगों का मन मोह रही हैं, लेकिन इस अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती के बीच एक बड़ा खतरा भी मंडरा रहा है। बारिश के कारण जलस्रोतों में पानी का बहाव बेहद तेज हो गया है, जिससे कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। विशेष रूप से रांची के सुप्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में गिने जाने वाले जोन्हा फॉल्स और सीता फॉल्स में पानी का उफान चरम पर है। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों ने यहां पहुंचने वाले सभी सैलानियों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है।

जलप्रपातों में अचानक जलस्तर बढ़ने की चुनौती

मानसून के मौसम में झारखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बहने वाली नदियों और झरनों की स्थिति पल-पल में बदलती रहती है। जोन्हा फॉल्स और सीता फॉल्स जैसे स्थलों की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि ऊपर के पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश होते ही निचले इलाकों में स्थित झरनों में अचानक पानी का बहाव बढ़ जाता है। कई बार ऐसा होता है कि पर्यटक जब झरने के समीप मौजूद होते हैं, तब आसपास का मौसम पूरी तरह साफ दिखाई देता है, लेकिन ऊपरी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश का पानी अचानक नीचे आकर उफान ला देता है। बिना किसी पूर्व चेतावनी के जलप्रपात में जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और पानी की गति इतनी प्रचंड होती है कि किनारे खड़े लोगों के लिए संभलना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि सुरक्षा विशेषज्ञ इस मौसम में बहते पानी के अत्यधिक निकट जाने को जोखिम भरा मान रहे हैं।

सेल्फी और वीडियो बनाने के चक्कर में बढ़ता हादसों का जोखिम

जलप्रपातों के आसपास बारिश के पानी के निरंतर छिड़काव और नमी के कारण चट्टानों पर काई जम जाती है, जिससे वहां अत्यधिक फिसलन पैदा हो जाती है। जोन्हा और सीता फॉल्स के रास्तों तथा झरनों के आसपास बनी पथरीली सतहों पर इस समय चलना बेहद कठिन और जोखिम भरा हो गया है। अक्सर देखा जाता है कि खूबसूरत दृश्यों को अपने कैमरों में कैद करने या सोशल मीडिया के लिए फोटो और वीडियो बनाने की होड़ में पर्यटक फिसलन भरी चट्टानों के बिल्कुल मुहाने पर जाकर खड़े हो जाते हैं। पानी के तेज वेग और गीली सतह के संयोजन से एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से पर्यटकों को हिदायत दी है कि वे जलधाराओं से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी सूरत में खतरनाक चट्टानों पर न चढ़ें।

बच्चों की सुरक्षा और स्थानीय दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी

मौसम के सुहावने होने और चारों तरफ फैली हरियाली के कारण वीकेंड पर पर्यटन स्थलों में आम लोगों और परिवारों की चहल-पहल बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, प्रकृति के इस खूबसूरत नजारे का आनंद लेते समय बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अभिभावकों को सख्त सलाह दी गई है कि वे छोटे बच्चों को तेज बहाव वाले पानी या झरनों के किनारों के आसपास न जाने दें। इसके अतिरिक्त, जोन्हा और सीता फॉल्स में तैनात स्थानीय सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों का हर हाल में पालन किया जाना चाहिए। बारिश के इस दौर में सुरक्षा के नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद दूर खड़े होकर और पूरी तरह सतर्क रहकर ही उठाना चाहिए।

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सवाल-जवाब

रांची में किन झरनों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है?
रांची के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल जोन्हा फॉल्स और सीता फॉल्स में पानी का बहाव बहुत तेज हो गया है।
बारिश के मौसम में झरनों के पास जाना क्यों खतरनाक है?
ऊपरी पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से अचानक पानी का तेज बहाव आ सकता है और चट्टानों पर काई जमने से भारी फिसलन हो जाती है।
प्रशासन ने पर्यटकों के लिए क्या निर्देश दिए हैं?
प्रशासन ने पर्यटकों को जलधाराओं से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और फिसलन भरी चट्टानों पर फोटो लेने से बचने की सलाह दी है।
क्या मानसून में बच्चों को झरने के पास ले जाना सुरक्षित है?
नहीं, अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को तेज बहाव वाले पानी और जलस्रोतों के किनारों से दूर रखें।
यदि मौसम साफ दिखाई दे, तब भी सतर्क रहना क्यों जरूरी है?
क्योंकि ऊपर की पहाड़ियों में बारिश होने से निचले झरनों में बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक पानी का भारी उफान आ सकता है।
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