कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहां पहुंचना ही असली रोमांच बन जाता है, और महराजगंज जिले का कुड़िया देवी मंदिर बिल्कुल वैसी ही जगह है. निचलौल इलाके के घने जंगलों के बीच बसा यह मंदिर जितना अपनी धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है, उतना ही यहां तक पहुंचने का सफर लोगों के दिल में बस जाता है. जंगल को चीरती हुई कच्ची सड़क, चारों तरफ बिखरी हरियाली और एकदम शांत माहौल शहर की भागदौड़ से थके मन को सुकून के कुछ पल दे जाता है.
यही वजह है कि यहां सिर्फ आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से श्रद्धालु और प्रकृति को करीब से महसूस करने वाले लोग भी खिंचे चले आते हैं. मंदिर तक का रास्ता जंगल के बीच से होकर गुजरता है, और असल में यही रास्ता इस पूरी जगह को बाकियों से अलग और खास बना देता है.
प्रकृति की गोद में बसा है मंदिर
निचलौल क्षेत्र के घने जंगलों के बीच मौजूद इस मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. जिन्हें शांत और प्राकृतिक माहौल पसंद है, उनके लिए यह जगह किसी पिकनिक स्पॉट से कम नहीं. जंगल की हरियाली और चारों तरफ फैली खामोशी यहां आने वाले हर इंसान को एक अलग ही एहसास कराती है, जो शहरों में मिलना मुश्किल है.
रहस्यमयी पोखरे की कहानी
कुड़िया देवी मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना बताया जाता है. स्थानीय मान्यताओं की मानें तो प्राचीन काल में यहां एक गांव बसा हुआ था, लेकिन किसी बड़ी विपदा की वजह से पूरा गांव एक पोखरे में समा गया. जंगल के बीच मौजूद यह पोखरा आज भी देखा जा सकता है. समय बीतने के साथ इसमें छोटे-छोटे पौधे और झाड़ियां उग आई हैं, फिर भी इससे जुड़ी कहानी लोगों की जिज्ञासा को आज तक बनाए हुए है. कई लोग तो खास तौर पर इसी रहस्यमयी पोखरे को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं.
मंदिर तक पहुंचने के लिए कोई फोर व्हीलर से आता है, कोई टू व्हीलर से, तो कोई साइकिल और पैदल भी सफर तय करता है. पहली बार आने वालों को जंगल के बीच से गुजरता यह रास्ता थोड़ा अलग जरूर लग सकता है, लेकिन यहां की प्राकृतिक सुंदरता धीरे-धीरे मन में अपनी जगह बना लेती है. यही वजह है कि धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ लोग यहां घूमने और प्रकृति के बीच वक्त बिताने भी आते हैं.
दीवारों पर घड़ियां, ये है सबसे अनोखी परंपरा
कुड़िया देवी मंदिर की सबसे खास पहचान यहां की एक अनोखी परंपरा है. आमतौर पर मंदिरों में लोग चुनरी, नारियल और पूजा का सामान चढ़ाते हैं, लेकिन यहां की दीवारों पर बड़ी संख्या में घड़ियां टंगी नजर आती हैं. मान्यता है कि पढ़ाई करने वाले बच्चे परीक्षा में अच्छे नतीजों की कामना लेकर यहां आते हैं और मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में घड़ी चढ़ाते हैं. यही परंपरा इस मंदिर को दूसरे धार्मिक स्थलों से बिल्कुल अलग बना देती है.
यही सब खूबियां मिलकर कुड़िया देवी मंदिर को महराजगंज की सबसे खास जगहों में शामिल कर देती हैं. अगर आप भी प्रकृति के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं और साथ में एक अलग अनुभव की तलाश में हैं, तो दोस्तों और परिवार के साथ यह जगह आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है.













