राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसा किला है, जो मानसून आते ही पूरी तरह बदल जाता है। आम तौर पर हम झरनों को पहाड़ों और घने जंगलों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सोजत का यह प्राचीन किला इस सोच को पलट देता है। यहां बारिश शुरू होते ही पानी पहाड़ों से नहीं, बल्कि किले की सदियों पुरानी सीढ़ियों से दूधिया झरने की तरह बहने लगता है। यही वजह है कि लोग इसे प्यार से ‘वॉटरफॉल फोर्ट’ कहने लगे हैं। अगर इस सावन आप कहीं घूमने का मन बना रहे हैं, तो यह जगह आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
मानसून में इस किले का माहौल कुछ अलग ही हो जाता है। ऊपर से पूरा सोजत शहर बेहद खूबसूरत दिखता है, और कई बार ऐसा लगता है मानो बादलों ने पूरे किले को अपनी आगोश में ले लिया हो। हल्की फुहारें हों या फिर अचानक होने वाली झमाझम बारिश, ऐसे में किले की सीढ़ियों पर बैठ जाइए, सामने का नजारा इतना सुकून भरा होता है कि वापस घर लौटने का मन ही नहीं करता।
आमेर और मेहरानगढ़ से भी पुराना है यह दुर्ग
जोधपुर का मेहरानगढ़ और जयपुर का आमेर किला देखकर तो हर कोई इनकी भव्यता का कायल हो जाता है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि सोजत का यह किला इन दोनों से भी पुराना है। चारों ओर मजबूत परकोटे से घिरे इस दुर्ग पर एक नहीं, बल्कि कई शासकों की हुकूमत रही है। फिलहाल यह किला सरकार के अधीन है। इसके बावजूद आज भी हर होली पर अलग अलग समाजों की ओर से यहां गैर का आयोजन होता है, जिससे इसकी परंपरा आज भी जिंदा है। एक बार जो इसकी खूबसूरती देख लेता है, वह दोबारा यहां आना जरूर चाहता है।
फोटोग्राफी के दीवानों के लिए जन्नत
यह किला सिर्फ इतिहास के लिहाज से ही खास नहीं है, बल्कि स्थापत्य कला और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां के पत्थरों की प्राचीन बनावट और वास्तुकला अपने आप में बेहतरीन शिल्पकारी का अनूठा नमूना है। किले के सबसे ऊंचे छोर पर खड़े होकर जब आप कैमरा उठाते हैं, तो लेंस के जरिए पूरा सोजत शहर एक खूबसूरत कैनवास की तरह नजर आता है।
यहां के ऐतिहासिक पत्थरों का टेक्सचर, सदियों पुरानी दीवारों की बनावट और मानसून में चारों तरफ फैली हरियाली के साथ बादलों की लुका-छिपी, फोटोग्राफर्स को ऐसे विजुअल्स और परफेक्ट एंगल देती है, जो किसी भी फ्रेम में चार चांद लगा देते हैं। यही खूबियां इस किले को फोटोग्राफी के नजरिए से एक अलग पहचान देती हैं।













