फरीदाबाद में बेमौसम बारिश से टूटे रावण बनाने वाले कारीगरों के सपने, हजारों का नुकसानबिहार के रोहतास में बनता है खास पनीर खुरमा, झारखंड और छत्तीसगढ़ तक है डिमांडउत्तर कोरिया ने किया एआई आधारित टॉरपीडो का परीक्षण, नौसैनिक शक्ति बढ़ाने पर किम जोंग उन का जोर8वें वेतन आयोग पर दीवाली में बड़े फैसले की उम्मीद नहीं, न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा जारीराजस्थान में दो दिन की ट्रिप के लिए जोधपुर है खास, इन ऐतिहासिक जगहों का करें दीदारकारुण्या KR-772 लॉटरी ड्रा आज: 1 करोड़ रुपये के पहले इनाम के लिए तिरुवनंतपुरम में निकलेगा लकी नंबरमेघालय के जोवाई में वाइल्डलाइफ वीक के समापन पर वन्यजीव रक्षक हुए सम्मानितफरीदाबाद में पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर की पति की हत्या, गला रेतकर उतार दिया मौत के घाटसोजत के पास अरावली की वादियों में स्थित धारेश्वर महादेव, सर्दियों में घूमने के लिए है शानदार जगहनवरात्रि की जवारियों से कैसे पता चलते हैं अगले छह महीने और साल 2027 के संकेत, जानिए हर एक रंग का मतलब
राजस्थान में दो दिन की ट्रिप के लिए जोधपुर है खास, इन ऐतिहासिक जगहों का करें दीदारयात्रा
17 अक्तू॰ 2026, 4:13 pm (45 मिनट पहले)· 1

राजस्थान में दो दिन की ट्रिप के लिए जोधपुर है खास, इन ऐतिहासिक जगहों का करें दीदार

अगर आपके पास राजस्थान घूमने के लिए केवल दो दिन हैं, तो जोधपुर की ऐतिहासिक और खूबसूरत जगहें आपकी यात्रा को यादगार बना सकती हैं।

यदि आप राजस्थान की यात्रा का प्लान बना रहे हैं और आपके पास केवल दो दिन का सीमित समय है, तो जोधपुर आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। यहां के ऊंचे गढ़, भव्य महल, प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक इमारतें राजस्थान के गौरवशाली और शाही अतीत की जीवंत कहानी बयां करती हैं। अपने नीले मकानों की वजह से ब्लू सिटी के नाम से मशहूर इस शहर में घूमने के लिए कई ऐसी शानदार जगहें मौजूद हैं, जो किसी भी यात्री के लिए इतिहास के पन्नों को बहुत करीब से देखने का अनूठा अवसर प्रदान करती हैं। यदि आप कम अवधि में यहां की समृद्ध संस्कृति, उत्कृष्ट वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता का एक साथ आनंद लेना चाहते हैं, तो आप इन छह प्रमुख जगहों को अपनी यात्रा की सूची में जरूर शामिल कर सकते हैं।

मेहरानगढ़ किले का ऐतिहासिक वैभव

जोधपुर की पहचान माना जाने वाला मेहरानगढ़ का किला वह जगह है जिसके बिना आपकी यह यात्रा पूरी नहीं हो सकती है। इस विशाल और भव्य किले की नींव साल 1459 में राव जोधा द्वारा रखी गई थी। एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मजबूत दुर्ग अपनी शक्तिशाली दीवारों, विशाल द्वारों और कलात्मक महलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस किले के भीतर फूल महल, मोती महल और शीश महल जैसे कई हिस्से बने हुए हैं, जो पुराने राजघराने के बेहद भव्य और शानदार जीवनयापन की दास्तान सुनाते हैं। इसके अलावा यहां बने संग्रहालय में प्राचीन हथियार, शाही पोशाकें, पालकियों के साथ-साथ कई ऐतिहासिक वस्तुएं भी सुरक्षित रखी गई हैं। इस किले के ऊपरी हिस्से से पूरे जोधपुर शहर के नीले मकानों का बहुत ही मनोरम और सुंदर दृश्य दिखाई देता है। इतिहास को गहराई से जानने के शौकीनों और फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।

ये भी पढ़ें

चोखेलाओ बाग की हरियाली और सुकून

मेहरानगढ़ किले के बिल्कुल करीब स्थित चोखेलाओ बाग अपनी प्राकृतिक हरियाली और पारंपरिक उद्यान शैली के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां की बेहतरीन बनावट, पत्थरों से तराशी गई संरचनाएं और इसके चारों तरफ फैली ऐतिहासिक दीवारें पुराने मारवाड़ की संस्कृति की याद दिलाती हैं। किले की भव्यता और वास्तुकला को देखने के बाद इस शांत बाग में कुछ पल बिताना सैलानियों को मानसिक सुकून का अहसास कराता है। यहां टहलते हुए आप प्रकृति और प्राचीन इतिहास के एक बहुत ही खूबसूरत मेल को महसूस कर सकते हैं। यदि आपको शांत वातावरण में घूमना और बेहतरीन तस्वीरें कैद करना पसंद है, तो चोखेलाओ बाग को अपनी यात्रा में अवश्य जगह दें।

महामंदिर की अनूठी नक्काशी

जोधपुर का प्रसिद्ध महामंदिर भगवान शिव को समर्पित एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां बनाए गए कुल चौरासी नक्काशीदार खंभे हैं। इन सभी खंभों पर की गई बेहद बारीक और खूबसूरत कलाकारी भारत की प्राचीन वास्तुकला और शिल्पकला की समृद्ध परंपरा का बेहतरीन प्रदर्शन करती है। इस धार्मिक स्थल का अपना आध्यात्मिक महत्व तो है ही, साथ ही इसकी अनोखी बनावट भी हर आने वाले पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां पहुंचकर आप कुछ समय पूरी तरह शांत वातावरण में बिता सकते हैं और प्राचीन निर्माण कला को बहुत करीब से निहार सकते हैं। ऐतिहासिक इमारतों और धार्मिक स्थलों में गहरी रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह बेहद खास है।

उम्मेद भवन पैलेस की शाही शान

उम्मेद भवन पैलेस जोधपुर की सबसे भव्य और विशाल इमारतों में से एक है जिसकी अपनी एक अलग पहचान है। इस शानदार महल का निर्माण कार्य महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा साल 1929 में शुरू करवाया गया था। उस दौर में इस पूरे इलाके में भयंकर अकाल और रोजगार की भारी समस्या उत्पन्न हो गई थी, ऐसे में इस महल के निर्माण से स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ। इस विशाल इमारत को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 16 साल का लंबा समय लगा था। पूरी तरह से पीले बलुआ पत्थर से निर्मित यह भव्य महल अपनी विशालता, सुंदर गुंबदों और शाही सजावट के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। वर्तमान समय में इस महल का एक भाग शाही परिवार के निवास के रूप में काम आता है, जबकि दूसरे हिस्से को एक आलीशान होटल में तब्दील कर दिया गया है। इसके संग्रहालय में पर्यटक पुरानी और बेशकीमती ऐतिहासिक वस्तुओं को देख सकते हैं।

जसवंत थड़ा का सफेद संगमरमर

मेहरानगढ़ किले के नजदीक ही स्थित जसवंत थड़ा सफेद संगमरमर के पत्थरों से बना हुआ एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक स्मारक है। इस शानदार स्मारक का निर्माण महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में उनके अपने पुत्र महाराजा सरदार सिंह द्वारा करवाया गया था। साल 1906 में बनकर पूरी तरह तैयार हुआ यह स्मारक अपनी बेहद बारीक नक्काशी, संगमरमर की सुंदर जालियों और मनमोहक गुंबदों के लिए जाना जाता है। इसकी वास्तुकला इतनी ज्यादा आकर्षक है कि यहां पहुंचने वाला हर पर्यटक कुछ देर तक इसे बस देखता ही रह जाता है। इसके चारों तरफ का शांत माहौल और पास ही स्थित किले का नजारा इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है। इतिहास प्रेमियों और बेहतरीन तस्वीरें खींचने के शौकीनों के लिए यह जगह एक बेहतरीन विकल्प है।

माचिया सफारी पार्क का प्राकृतिक परिवेश

यदि आप किलों और महलों को देखने के साथ-साथ प्रकृति के बेहद करीब कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो आपको माचिया सफारी पार्क जरूर जाना चाहिए। यहां पर्यटकों को विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों और खूबसूरत पक्षियों को अपनी आंखों से देखने का शानदार अवसर मिलता है। यह जगह विशेष तौर पर बच्चों और अपने पूरे परिवार के साथ यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचक हो सकती है। पार्क के भीतर घूमते हुए आपको राजस्थान के अनोखे प्राकृतिक परिवेश और वन्यजीवों की जीवनशैली को समझने का मौका मिलेगा। हालांकि यहां जाने से पहले प्रवेश शुल्क और पार्क के खुलने के समय की सही जानकारी जरूर जुटा लें।

दो दिन की यात्रा का सही शेड्यूल

अपनी इस दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत पहले दिन सबसे पहले मेहरानगढ़ किले से करें। इसके बाद चोखेलाओ बाग घूमें और फिर पर्याप्त समय निकालकर महामंदिर के दर्शन के लिए जाएं। अपनी यात्रा के दूसरे दिन की शुरुआत उम्मेद भवन पैलेस से करें। इसके तुरंत बाद जसवंत थड़ा देखें और फिर अपने बचे हुए समय के अनुसार माचिया सफारी पार्क घूमने निकल जाएं। इन सभी जगहों के बीच आने-जाने में लगने वाले समय और दूरी को अच्छी तरह ध्यान में रखकर ही अपनी पूरी योजना तैयार करें ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

सवाल-जवाब

दो दिन की ट्रिप में जोधपुर में कौन सी मुख्य जगहें देख सकते हैं?
दो दिन की यात्रा में आप मेहरानगढ़ किला, चोखेलाओ बाग, महामंदिर, उम्मेद भवन पैलेस, जसवंत थड़ा और माचिया सफारी पार्क घूम सकते हैं।
मेहरानगढ़ किले की नींव कब और किसने रखी थी?
मेहरानगढ़ किले की नींव साल 1459 में राव जोधा द्वारा रखी गई थी।
उम्मेद भवन पैलेस का निर्माण क्यों शुरू किया गया था?
उम्मेद भवन पैलेस का निर्माण कार्य महाराजा उम्मेद सिंह ने साल 1929 में अकाल और रोजगार की समस्या से निपटने के लिए शुरू करवाया था।
जसवंत थड़ा का निर्माण किसकी याद में हुआ था?
जसवंत थड़ा का निर्माण महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में उनके पुत्र महाराजा सरदार सिंह ने करवाया था जो साल 1906 में पूरा हुआ था।
जोधपुर को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
जोधपुर को नीले रंग के घरों के कारण ब्लू सिटी के नाम से भी जाना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp