केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के गठन और इसके संभावित लाभों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्च के बीच कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इस बार दीवाली के त्योहारी सीजन के दौरान वेतन, भत्तों और पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है। हालांकि, मौजूदा वास्तविक स्थिति यह दर्शाती है कि नवंबर 2026 के दौरान आयोग से जुड़े किसी बड़े निर्णय की संभावना नहीं है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि वेतन आयोग की समिति फिलहाल विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श और सुझाव जुटाने के चरण में काम कर रही है।
समिति का गठन और रिपोर्ट सौंपने की तय समयसीमा
8वें वेतन आयोग का औपचारिक गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। इस समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उनके साथ पैनल में अंशकालिक सदस्य के रूप में प्रोफेसर पुलक घोष और सदस्य सचिव के तौर पर पंकज जैन शामिल हैं। इस तीन सदस्यीय पैनल को केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े विभिन्न पहलुओं, मांगों और वित्तीय व्यवहार्यता का बारीकी से मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि सरकार के विचारार्थ सबसे संतुलित और लाभकारी सिफारिशें तैयार की जा सकें।
जब पिछले वर्ष नवंबर में इस आयोग के विचारार्थ विषय (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) तय किए गए थे, तब पैनल को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने की अवधि दी गई थी। इस निर्धारित समयसीमा के अनुसार, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें मई 2027 में सरकार को सौंपे जाने की संभावना है। रिपोर्ट जमा होने के बाद सरकार उस पर विस्तृत विचार-विमर्श करेगी और कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।
विभिन्न राज्यों में परामर्श बैठकें और मुंबई का आगामी सत्र
हितधारकों की बात सुनने के उद्देश्य से वेतन आयोग की समिति विभिन्न राज्यों का दौरा कर रही है। समिति इससे पहले दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, लद्दाख और बेंगलुरु में कई महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित कर चुकी है। इन बैठकों में केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य प्रतिनिधियों से सीधे संवाद स्थापित किया गया है।
इसी कड़ी में अगली परामर्श बैठक महाराष्ट्र के मुंबई में 22 से 23 अक्टूबर के दौरान आयोजित होने जा रही है। इन मुलाकातों में समिति पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर, वेतन संरचना, विभिन्न भत्तों, महंगाई भत्ते (DA) के मूल वेतन में विलय, एरियर और पदोन्नति से जुड़े नियमों पर विस्तार से चर्चा कर रही है और सौंपे गए ज्ञापनों का मूल्यांकन कर रही है।
1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा लाभ
8वें वेतन आयोग के फैसलों का सीधा प्रभाव व्यापक कार्यबल पर पड़ेगा। इस आयोग की सिफारिशें लागू होने से 1 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है। इसमें लगभग 50 लाख सेवारत केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी व सेवानिवृत्त कर्मी शामिल हैं। यही वजह है कि वेतन ढांचे में किसी भी संशोधन पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
महंगाई भत्ते के विलय की मांग और वित्त मंत्रालय का रुख
कर्मचारी संगठनों और प्रतिनिधियों द्वारा उठाई जा रही प्रमुख मांगों में से एक 7वें वेतन आयोग के तहत मिल रहे महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिलाना है। यूनियनों का तर्क है कि DA के मूल वेतन में विलय से कर्मचारियों का बेसिक पे बढ़ जाएगा, जिससे अन्य भत्ते और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ भी अपने आप बढ़ जाएंगे।
हालांकि, वर्तमान समय तक महंगाई भत्ते के मूल वेतन में विलय को लेकर कोई आधिकारिक मंजूरी या योजना नहीं है। पिछले वर्ष दिसंबर में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि मौजूदा DA को मूल वेतन में मिलाने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। वर्तमान व्यवस्था में महंगाई भत्ते की गणना औद्योगिक श्रमिकों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधार पर समय-समय पर की जाती है। इस बीच, कर्मचारी वर्तमान 60% DA से आगे जुलाई 2026 के लिए देय महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी के फैसले का भी इसी महीने इंतजार कर रहे हैं।
न्यूनतम मूल वेतन को लेकर कर्मचारी यूनियनों के प्रस्ताव
7वें वेतन आयोग के अंतर्गत वर्तमान में न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष इसमें भारी बढ़ोतरी के प्रस्ताव रखे हैं
- नेशनल काउंसिल - जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF): इन संगठनों ने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 69,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
- महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: इस संगठन ने न्यूनतम मासिक वेतन को बढ़ाकर 65,000 रुपये करने की सिफारिश की है।
- इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA): इस संघ ने न्यूनतम बेसिक पे को 52,600 रुपये तक ले जाने का सुझाव दिया है।
- भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS): न्यूनतम वेतन को लेकर सबसे बड़ी मांग BPMS की तरफ से आई है, जिसने मूल वेतन को 72,000 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश रखी है।
फिटमेंट फैक्टर पर क्या हैं अलग-अलग सिफारिशें?
वेतन और पेंशन में अंतिम संशोधन काफी हद तक फिटमेंट फैक्टर के निर्धारण पर निर्भर करेगा। फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है, जिससे पुराने मूल वेतन को गुणा करके नया मूल वेतन तय किया जाता है। विभिन्न मंचों से फिटमेंट फैक्टर को लेकर कई सुझाव सामने आए हैं
- रूढ़िवादी दृष्टिकोण: सबसे सुरक्षित या न्यूनतम सुझाव 1.92 फिटमेंट फैक्टर का माना गया है।
- ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC): AITUC ने 3 के फिटमेंट फैक्टर की वकालत की है।
- जम्मू एंड कश्मीर एम्प्लॉई फोरम: इस मंच ने 3.05 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की सिफारिश की है।
- फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO): डाक कर्मचारी संघ का मानना है कि इसे बढ़ाकर 3.25 किया जाना चाहिए।
- जम्मू एंड कश्मीर एम्प्लॉईज कोऑर्डिनेशन कमेटी: इस समिति ने 2.86 से 3.68 के दायरे में फिटमेंट फैक्टर रखने का प्रस्ताव दिया है।
- IRTSA के सुझाव: IRTSA ने 2.92, 3.50 और 3.80 के दायरे में फिटमेंट फैक्टर रखने की बात कही है।
- NC-JCM और IRTSA की साझा राय: इन निकायों का यह भी मानना है कि उचित फिटमेंट फैक्टर लगभग 3.83 होना चाहिए।
- BPMS की सर्वोच्च मांग: भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने 8वें वेतन आयोग के लिए सबसे ऊंचा 4 का फिटमेंट फैक्टर तय करने का सुझाव दिया है।
लागू होने की प्रभावी तारीख, एरियर और संभावित समय
8वें वेतन आयोग के लागू होने की वास्तविक तारीख ही यह तय करेगी कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को कितना एरियर मिलेगा। पिछले 7वें वेतन आयोग के दौरान सिफारिशों को 1 जनवरी 2016 से प्रभावी माना गया था, जबकि उसका एरियर वित्त वर्ष 2016-17 में जारी किया गया था।
दस साल के नियमित वेतन आयोग चक्र के आधार पर, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए सामान्य प्रभावी तिथि की उम्मीद 1 जनवरी 2026 मानी जा रही है। हालांकि, वास्तविक कार्यान्वयन और एरियर का भुगतान पूरी तरह से केंद्र सरकार के अंतिम फैसलों पर निर्भर करेगा। चूंकि समिति की सिफारिशों की अंतिम रिपोर्ट मई 2027 में आने की संभावना है, इसलिए उन सिफारिशों को मंजूरी देकर पूरी तरह लागू करने में आगे दो से तीन साल का अतिरिक्त समय लग सकता है। इस प्रक्रिया को देखते हुए 8वें वेतन आयोग का पूर्ण कार्यान्वयन वर्ष 2028 या 2029 में होने की संभावना जताई जा रही है।


















