लखनऊ से गुजरने वाले रास्तों में एक ऐसी जगह है जहां एक नदी के ठीक ऊपर से एक नहर बहती नजर आती है. यह नजारा देखने वालों को हैरान कर देता है क्योंकि आमतौर पर नदी और नहर एक-दूसरे में मिल जाती हैं, लेकिन यहां नहर को एक विशाल पुलनुमा ढांचे के सहारे नदी के ऊपर से पार कराया गया है. यह अनोखा ढांचा उत्तर प्रदेश के इंदिरा डैम पर बना है, जो लखनऊ शहर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. डैम के ठीक ऊपर से इंदिरा नहर गुजरती है, जिसे शारदा कैनाल के नाम से भी जाना जाता है.
कहां है यह डैम और कब हुआ था इसका निर्माण
इंदिरा डैम लखनऊ से सुल्तान रोड पर स्थित है और फैजाबाद हाइवे से पहले बीच में पड़ता है. इस नहर को बनाने का काम 1972 के आसपास शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में पूरे 5 साल का समय लगा. इसे बनाने के पीछे मकसद यह था कि घाघरा नदी का पानी एक नहर के जरिये लखनऊ के आसपास के इलाकों तक पहुंचाया जा सके. यह नहर खासतौर पर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई थी, ताकि सिंचाई की समस्या दूर हो सके.
गोमती नदी बनी सबसे बड़ी अड़चन
इस पूरी योजना में सबसे बड़ी दिक्कत लखनऊ की गोमती नदी बनकर सामने आई, जो नहर के रास्ते में बीच में पड़ रही थी. अगर नहर का पानी सीधे गोमती नदी में छोड़ दिया जाता, तो पूरी योजना का मकसद ही खत्म हो जाता. ऐसा होने पर सारा पानी गोमती नदी के साथ बहकर आगे निकल जाता और जिन किसानों के लिए यह नहर बनाई जा रही थी, उन्हें इसका कोई फायदा नहीं मिल पाता.
इंजीनियरों ने निकाला अनोखा हल
नहर परियोजना पर काम कर रहे इंजीनियरों के सामने यह चुनौती थी कि नहर को गोमती नदी के आर-पार कैसे ले जाया जाए, बिना उसका पानी नदी में मिलाए. इसका जो एक ही उपाय निकला, वह था नहर को एक पाइपनुमा ढांचे के जरिये नदी के ऊपर से पार कराना. योजना के मुताबिक ठीक यही किया गया. गोमती नदी के ऊपर एक विशाल ढांचा तैयार कर उसके ऊपर से नहर को दूसरी तरफ निकाला गया. यही ढांचा आज इंजीनियरिंग के अनोखे नमूने के तौर पर जाना जाता है, जहां नीचे नदी बहती है और ऊपर नहर का पानी गुजरता है.
70 के दशक में किसानों तक पानी पहुंचाने की मुहिम
बताया जाता है कि 70 के दशक में लखनऊ-रायबरेली, सुल्तानपुर से लेकर बलिया, वाराणसी, गाजीपुर और मऊ तक के इलाकों में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया था. इसी समस्या से निपटने के लिए शारदा नहर निकाली गई थी. यह नहर लखीमपुरखीरी के शारदा नगर डैम से अपनी यात्रा शुरू करती है. आगे चलकर सीतापुर जिले के महमूदाबाद में यह नहर दो हिस्सों में बंट जाती है. इसकी एक शाखा बाराबंकी होते हुए अयोध्या की तरफ बढ़ती है, जबकि दूसरी शाखा लखनऊ, रायबरेली और अमेठी होते हुए आगे का सफर तय करती है.
पुल के आंकड़े जो हैरान कर देंगे
इस नहर को नदी के ऊपर से गुजारने के लिए पुल की बुनियाद करीब 100 मीटर तक खोदी गई थी. इसके लिए कुल 12 पिलर तैयार किए गए, और हर पिलर के बीच की दूरी करीब 33 मीटर रखी गई. नदी के ठीक ऊपर से किसी नहर का बहना अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं लगता. इस पूरे एक्वाडक्ट यानी जलसेतु की कुल लंबाई 382 मीटर है, जो लगभग एक किलोमीटर के बराबर मानी जा सकती है. देशभर में इसे सबसे लंबा एक्वाडक्ट बताया जाता है. इसकी गहराई भी 38.5 मीटर है, जो इसे और खास बनाती है.
सैलानियों के लिए मरीन ड्राइव जैसा एहसास
यह अनोखा पुल लखनऊ से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस नहर के समानांतर दो सड़कें भी बनाई गई हैं, जिनसे यहां दो चौराहे भी बनते हैं. इस जगह पर पहुंचने वाले पर्यटकों को मरीन ड्राइव जैसा एहसास होता है. इसी नहर के बगल से एक एक्सप्रेसवे भी गुजरता है, और पास में ही ड्रीमवैली वॉटर पार्क भी मौजूद है, जो इस इलाके को घूमने-फिरने वालों के लिए और आकर्षक बना देता है.











