माओवादियों के खौफ से निकलकर पर्यटकों की भीड़ तक, जमुई के इस झरने की कहानी बदल रही हैयात्रा
2 घंटे पहले· 2

माओवादियों के खौफ से निकलकर पर्यटकों की भीड़ तक, जमुई के इस झरने की कहानी बदल रही है

जमुई के घने जंगलों में बहने वाला पंचभूर झरना अब झारखंड और आसपास के जिलों से आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है, जबकि प्रशासन इसे इको-टूरिज्म स्थल के तौर पर विकसित करने की तैयारी कर रहा है.

बिहार के जमुई जिले में घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बहने वाला पंचभूर झरना अब हर मानसून में पर्यटकों की भीड़ खींच रहा है. जमुई, आसपास के जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं. लोग परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाते हैं, प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताते हैं और यादगार तस्वीरें व वीडियो अपने साथ ले जाते हैं.

किसानों के लिए भी जीवनरेखा है यह झरना

पंचभूर झरना सिर्फ घूमने की जगह नहीं है. हरणी पंचायत के कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए इसी झरने के पानी पर निर्भर हैं. इसी वजह से यहां के खेत सालभर हरे-भरे रहते हैं और फसलों को पर्याप्त पानी मिलता रहता है. गांव वालों के लिए झरने का बहाव सीधे उनकी खेती से जुड़ा हुआ है.

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स्थानीय ग्रामीण सुनील मरांडी, शोभन हांसदा और बड़की सोरेन बताते हैं कि एक दौर था जब माओवादियों के डर से लोग इस इलाके में आने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे. उनके मुताबिक अब वह खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है. आज बड़ी संख्या में पर्यटक बेझिझक यहां पहुंचते हैं और झरने की खूबसूरती का लुत्फ उठाते हैं. ग्रामीण इसे बीते दौर से एक बड़ा बदलाव मानते हैं.

प्रशासन की नजर इको-टूरिज्म पर

पंचभूर झरने की बढ़ती लोकप्रियता के बीच जिला प्रशासन इसे इको-टूरिज्म स्थल के तौर पर विकसित करने में जुट गया है. मार्च महीने में डीएम श्री नवीन के नेतृत्व में एक प्रशासनिक टीम झरने पर पहुंची और विकास की संभावनाओं का जायजा लिया. इस दौरान झरने तक बेहतर सड़क बनाने, पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाने और अन्य विकास कार्यों पर चर्चा हुई.

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अगर ये योजनाएं वाकई जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले दिनों में पंचभूर झरना बिहार के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शुमार हो सकता है. इस मानसून अगर आप प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो पंचभूर झरना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है.

सवाल-जवाब

पंचभूर झरना कहां स्थित है?
पंचभूर झरना बिहार के जमुई जिले में घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है.
यहां किन-किन जगहों से पर्यटक आते हैं?
जमुई और आसपास के जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पंचभूर झरना देखने आते हैं.
झरने का पानी स्थानीय लोगों के लिए किस तरह उपयोगी है?
हरणी पंचायत के कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए इसी झरने के पानी पर निर्भर हैं, जिससे खेतों में सालभर हरियाली बनी रहती है.
पहले लोग यहां आने से क्यों डरते थे?
ग्रामीण सुनील मरांडी, शोभन हांसदा और बड़की सोरेन के मुताबिक पहले माओवादियों के खौफ के कारण लोग यहां आने से डरते थे.
क्या अब यहां आना सुरक्षित है?
ग्रामीणों के अनुसार अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और बड़ी संख्या में पर्यटक बिना किसी भय के यहां पहुंच रहे हैं.
क्या प्रशासन इस जगह को विकसित कर रहा है?
हां, जिला प्रशासन पंचभूर झरने को इको-टूरिज्म स्थल के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है और मार्च में डीएम श्री नवीन के नेतृत्व में टीम ने यहां जायजा लिया था.
विकास योजना में क्या शामिल है?
योजना में झरने तक बेहतर सड़क बनाना, पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाना और अन्य विकास कार्य शामिल हैं.
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