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पुणे के पास मौजूद लोहागढ़ किले को 'लोहे का किला' क्यों कहा जाता हैयात्रा
3 घंटे पहले· 3

पुणे के पास मौजूद लोहागढ़ किले को 'लोहे का किला' क्यों कहा जाता है

पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किला अपनी मजबूत बनावट की वजह से 'आयरन फोर्ट' कहलाता है, जानिए इसका करीब 2,000 साल पुराना इतिहास और यहां की खासियतें।

काव्या नायरकाव्या नायरट्रैवल एडिटर 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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पुणे के आसपास घूमने की जगह तलाश रहे हैं तो लोहागढ़ किला एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इतिहास, ट्रेकिंग और मानसून की हरियाली, तीनों का मजा एक साथ देने वाला यह किला अपनी मजबूत बनावट की वजह से आयरन फोर्ट यानी लोहे का किला भी कहलाता है। आखिर इस किले को यह खास नाम क्यों मिला, इसका इतिहास कितना पुराना है और यहां देखने लायक क्या-क्या है, आइए जानते हैं।

लोहे का किला नाम क्यों पड़ा

लोहागढ़ शब्द दो हिस्सों से मिलकर बना है, लोहा और गढ़ यानी किला। सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब हुआ लोहे जितना मजबूत किला। इतिहासकार बताते हैं कि इस किले की दीवारें पत्थर की बनी बेहद मजबूत हैं और यह एक ऐसी जगह पर बना है जहां तक पहुंचना ही आसान नहीं था। यही वजह रही कि दुश्मन इसे आसानी से जीत नहीं पाते थे, और धीरे-धीरे इसे आयरन फोर्ट के नाम से जाना जाने लगा।

2,000 साल से भी पुराना है इतिहास

माना जाता है कि लोहागढ़ किले का इतिहास करीब 2,000 साल पुराना है। इतने लंबे समय में यहां कई राजवंशों की सत्ता रही। सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, बहमनी, निज़ामशाही, मुगल और मराठा साम्राज्य, इन सभी ने अलग-अलग दौर में इस किले पर राज किया। बाद के समय में छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी इस किले को अपनी ताकत और प्रतिष्ठा के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया। किले की मजबूत बनावट की वजह से यह लंबे समय तक एक अहम सैन्य ठिकाना बना रहा।

मानसून में और निखर जाती है खूबसूरती

बारिश के मौसम में लोहागढ़ किले के आसपास का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। चारों तरफ फैली हरियाली और पहाड़ पर चढ़ने वाला रोमांचक ट्रेकिंग रूट, दोनों मिलकर एक यादगार अनुभव देते हैं। यही वजह है कि हर साल बड़ी तादाद में ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमी इस किले की तरफ खिंचे चले आते हैं।

विंचूकाटा और किले की बाकी खासियतें

लोहागढ़ किले की सबसे अलग पहचान है इसका विंचूकाटा, यानी बिच्छू की पूंछ जैसा दिखने वाला हिस्सा। चट्टानों से बनी यह लंबी संरचना देखने में बिच्छू की पूंछ जैसी लगती है और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके अलावा किले का विशाल प्रवेश द्वार भी ध्यान खींचता है। पुरानी इमारतों और महलों के खंडहरों से यहां से सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला का नजारा भी बेहद शानदार दिखाई देता है।

घूमने का सही समय

लोहागढ़ किला घूमने के लिए सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर और फिर अक्टूबर से फरवरी के बीच माना जाता है। इन महीनों में यहां की प्राकृतिक खूबसूरती अपने चरम पर होती है और मौसम भी ट्रेकिंग के लिहाज से आरामदायक रहता है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: इतिहास और ट्रेकिंग पसंद करने वाले यात्री मानसून या सर्दियों की छुट्टियों की योजना बनाते समय लोहागढ़ किले को अपनी घूमने की लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।
  • पुणे में: पुणे और आसपास रहने वालों के लिए यह वीकेंड ट्रेकिंग का आसानी से पहुंचा जा सकने वाला विकल्प है, खासकर जुलाई से सितंबर और अक्टूबर से फरवरी के बीच जब मौसम सबसे सुहावना रहता है।

सवाल-जवाब

लोहागढ़ किला कहां स्थित है?
यह किला महाराष्ट्र में पुणे के पास स्थित है।
इसे 'आयरन फोर्ट' यानी लोहे का किला क्यों कहा जाता है?
इसकी पत्थर की मजबूत दीवारों, मुश्किल जगह पर होने और आसानी से न जीते जाने की वजह से इसे लोहे जितना मजबूत किला माना जाता है।
लोहागढ़ किले का इतिहास कितना पुराना है?
माना जाता है कि इसका इतिहास करीब 2,000 साल पुराना है।
इस किले पर किन-किन राजवंशों ने राज किया?
सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, बहमनी, निज़ामशाही, मुगल और मराठा साम्राज्य, इन सभी ने अलग-अलग समय में यहां शासन किया।
छत्रपति शिवाजी महाराज का इस किले से क्या संबंध है?
उन्होंने इस किले का इस्तेमाल अपनी ताकत और प्रतिष्ठा के प्रतीक के तौर पर किया था।
विंचूकाटा क्या है?
यह चट्टानों से बनी एक लंबी संरचना है जो बिच्छू की पूंछ जैसी दिखती है और किले की सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है।
लोहागढ़ किला घूमने का सबसे अच्छा समय कब है?
जुलाई से सितंबर और फिर अक्टूबर से फरवरी के बीच का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
काव्या नायर
लेखक के बारे मेंकाव्या नायरट्रैवल एडिटर देहरादून
विशेषज्ञताट्रैवल लेखन, पर्यटन, डेस्टिनेशन गाइड, संस्कृति, लाइफस्टाइल ट्रैवल, होटल, एडवेंचर ट्रैवल, फूड एवं ट्रैवल, वैश्विक पर्यटन रुझान

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, पर्यटन रुझानों, संस्कृति और लाइफस्टाइल अनुभवों को कवर करती हैं। वे दुनियाभर के यात्रियों के लिए दिलचस्प कहानियाँ और व्यावहारिक जानकारी साझा करती हैं।

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों की कवरेज, ट्रैवल फ़ीचर, सांस्कृतिक खोज और ट्रैवल लाइफस्टाइल पत्रकारिता में विशेषज्ञता रखती हैं। वे लोकप्रिय व उभरते पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, होटल व आतिथ्य अनुभवों, स्थानीय संस्कृतियों, खानपान परंपराओं और एडवेंचर टूरिज़्म के बारे में लिखती हैं। प्रेरक और जानकारीपूर्ण कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए काव्या पाठकों को नई जगहें खोजने और सार्थक यात्रा अनुभव योजना बनाने में मदद करती हैं। उनका काम वैश्विक पर्यटन रुझानों, बजट व लक्ज़री ट्रैवल की अंतर्दृष्टि और पाठकों को दुनियाभर की जगहों से जोड़ने वाली सांस्कृतिक कहानियों को उजागर करता है।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें ↗
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