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पूर्वी चम्पारण का अनोखा टी स्पॉट: सिकरहना नदी किनारे मिलती है सुकून वाली चाययात्रा
28 जून 2026, 4:36 pm (31 दिन पहले)· 2

पूर्वी चम्पारण का अनोखा टी स्पॉट: सिकरहना नदी किनारे मिलती है सुकून वाली चाय

बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में स्थित एक चाय की दुकान अपनी खास कुल्हड़ चाय और प्राकृतिक सुंदरता के लिए चर्चा में है। यहाँ आने वाले लोग नदी का नजारा देखते हुए चाय का आनंद लेते हैं।

बिहार में चाय के दीवानों की कोई कमी नहीं है। राज्य के हर कोने में चाय के शौकीन मिल जाते हैं, जिनके लिए दिन की शुरुआत या थकान मिटाने का जरिया केवल एक कप चाय ही है। जहां कुछ लोग घर पर बनी चाय को प्राथमिकता देते हैं, वहीं बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें दोस्तों के साथ किसी खास टी स्पॉट पर जाकर चुस्कियां लेना पसंद है। ऐसे ही चाय प्रेमियों के लिए पूर्वी चम्पारण जिले में एक बेहद शानदार ठिकाना मौजूद है, जो स्वाद के साथ-साथ मन को शांति भी देता है।

प्राकृतिक सुंदरता और चाय का संगम

पूर्वी चम्पारण के छपवा से सुगौली और रक्सौल के बीच जाने वाले मुख्य मार्ग पर सिकरहना नदी के ऊपर एक पुल बना है। इस पुल के समीप स्थित चाय की दुकानें आज इलाके में काफी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यहां की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राहगीरों के अलावा स्थानीय लोग भी यहां खिंचे चले आते हैं। कई चाय प्रेमी तो ऐसे हैं जो केवल 10 रुपये की चाय का लुत्फ उठाने के लिए रोजाना 50 से 100 रुपये का पेट्रोल जलाकर यहां तक पहुंचते हैं।

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सिकरहना नदी का अद्भुत नजारा

इस टी स्पॉट की सबसे बड़ी खासियत इसके बगल में बहती सिकरहना नदी है। यह चम्पारण की मुख्य नदियों में गिनी जाती है, और नदी का शांत वातावरण किसी को भी मंत्रमुग्ध कर सकता है। चाय की गर्म चुस्कियों के साथ इस नैसर्गिक सुंदरता को निहारना यहां आने वाले ग्राहकों को सुकून देता है। वास्तव में, इस जगह की प्राकृतिक खूबसूरती ने ही इस चाय के बाजार को एक अलग पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

मंदिर और धार्मिक आस्था

नदी के पुल के पास मौजूद टी स्पॉट के ठीक पीछे एक विशाल मंदिर स्थित है। इस मंदिर में विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जहाँ श्रद्धालु दर्शन और मन्नत मांगने के लिए पहुंचते हैं। मंदिर आने-जाने वाले भक्त भी अक्सर अपनी पूजा के बाद यहां चाय का आनंद लेना नहीं भूलते।

व्यस्त मार्ग और चाय का स्वाद

यह चाय की दुकानें उस रास्ते पर हैं जो छपवा से शुरू होकर सुगौली होते हुए रक्सौल तक जाता है। रक्सौल नेपाल की सीमा के बेहद करीब है, जिस कारण यह सड़क हर समय काफी व्यस्त रहती है। प्रतिदिन यहां से गुजरने वाले हजारों मुसाफिरों के लिए यह जगह एक आदर्श पड़ाव का काम करती है।

कुल्हड़ चाय की खास विधि

यहां पर चाय परोसने का अंदाज और स्वाद दोनों ही खास हैं। ग्राहकों को चाय मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाती है, जो इसे और भी जायकेदार बना देता है। स्थानीय जानकारों के अनुसार, यहां की चाय पूरी तरह भैंस के दूध से तैयार की जाती है। सबसे खास बात है इसे बनाने का तरीका—पहले कुल्हड़ को कोयले की आग पर अच्छी तरह पकाया जाता है, और फिर उसमें चाय को धीमी आंच पर तैयार किया जाता है। यही अनोखी प्रक्रिया यहां की चाय को स्वाद में सबसे अलग और लाजवाब बनाती है।

सवाल-जवाब

यह चाय का अड्डा कहां स्थित है?
यह स्थान पूर्वी चम्पारण जिले में छपवा से सुगौली और रक्सौल जाने वाले रास्ते पर सिकरहना नदी के पुल के पास स्थित है।
यहां की चाय में क्या खासियत है?
यहां की चाय भैंस के दूध से तैयार की जाती है और इसे कोयले की आंच पर कुल्हड़ में धीमी गति से पकाया जाता है।
यहां लोग चाय पीने के लिए क्यों आते हैं?
लोग यहां चाय के स्वाद और नदी के प्राकृतिक नजारे के साथ मंदिर के शांत वातावरण का आनंद लेने आते हैं।
क्या यह रास्ता काफी व्यस्त रहता है?
हां, यह रास्ता रक्सौल जाने वाला मुख्य मार्ग है और नेपाल सीमा के करीब होने के कारण यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में राहगीर गुजरते हैं।
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