घर की हरियाली बढ़ाने और धार्मिक मान्यताओं के लिहाज से तुलसी का पौधा बेहद खास माना जाता है। ज्यादातर घरों में इसकी देखभाल की जाती है, लेकिन मौसम में होने वाले बदलाव या फिर सही ढंग से रखरखाव न हो पाने के कारण इस पौधे में कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं। कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि पौधे की पत्तियां मुड़ने लगती हैं, मुरझा जाती हैं या फिर उनमें कीड़े पनपने लगते हैं। ऐसी स्थिति में पौधे की समय पर देखरेख करना बहुत आवश्यक हो जाता है ताकि उसे सूखने से बचाया जा सके।
नीम के तेल का स्प्रे बनाने की आसान विधि
तुलसी के पौधे को कीटों के प्रकोप से बचाने और उन्हें स्वस्थ रखने के लिए नीम के तेल का एक हल्का घोल बहुत असरदार साबित होता है। इसे तैयार करने के लिए एक लीटर पानी में लगभग एक चम्मच नीम का तेल और उसमें डिश सोप या हल्के लिक्विड सोप की कुछ बूंदें मिलानी पड़ती हैं। पानी में नीम के तेल को अच्छी तरह मिलाने के लिए साबुन की यह मात्रा जरूरी होती है जिससे दोनों चीजें आपस में ठीक से घुल जाएं।
तैयार किए गए इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने के बाद एक स्प्रे बोतल में भर लिया जाता है। इसके बाद पौधे की पत्तियों पर ऊपर और नीचे दोनों तरफ इस घोल का छिड़काव किया जाता है। पत्तियों के निचले हिस्से पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि ज्यादातर छोटे कीट वहीं पर छिपे रहते हैं और पौधे को नुकसान पहुंचाते हैं।
इस्तेमाल करने के दौरान बरतने वाली जरूरी सावधानियां
इस स्प्रे का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। पौधे की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कुछ दिनों के अंतराल पर दोबारा इसका छिड़काव किया जा सकता है। कीड़ों का हमला कम होते ही बार-बार स्प्रे करने की प्रक्रिया को रोक देना चाहिए। इसके अलावा, घोल को पूरे पौधे पर छिड़कने से पहले एक या दो पत्तियों पर थोड़ा सा डालकर जांच कर लेनी चाहिए ताकि किसी भी नुकसान का पता चल सके।
यदि पत्तियों पर किसी तरह के दाग-धब्बे या जलने के निशान दिखाई दें, तो इस घोल का प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। इसके साथ ही, बहुत तेज धूप या अत्यधिक गर्मी के समय पत्तियों पर कभी भी स्प्रे नहीं करना चाहिए।
पौधे की सेहत के लिए अन्य जरूरी कदम
केवल स्प्रे कर देने मात्र से ही पौधे की हर समस्या का समाधान नहीं हो जाता है। तुलसी के पौधे को हमेशा ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां उसे पर्याप्त मात्रा में ताजी हवा और सूर्य की रोशनी मिल सके। इसके गमले की मिट्टी में कभी भी जलभराव नहीं होने देना चाहिए और जरूरत के अनुसार ही पानी डालना चाहिए। पौधे की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए साफ कैंची की मदद से उन पत्तियों को काट कर हटा देना चाहिए जो बुरी तरह से खराब हो चुकी हैं या संक्रमित हो चुकी हैं।



















