जैसलमेर के रामदेवरा में इन दिनों लोक देवता बाबा रामदेव का सालाना भादवा मेला पूरी रौनक के साथ चल रहा है। देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा की समाधि पर हाजिरी लगाने और अपनी मन्नतें मांगने के लिए पहुंच रहे हैं। इस धार्मिक यात्रा का एक प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान पवित्र रामसरोवर तालाब में स्नान करना माना जाता है। बड़ी संख्या में आ रहे भक्त बाबा के मुख्य दर्शन करने से पहले इस पावन स्थल पर आस्था की डुबकी लगाते हैं। मेलार्थियों की इस भारी भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की दुर्घटना या डूबने की घटनाओं को टालने के वास्ते स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा प्रबंधों को बेहद पुख्ता कर दिया है।
रामसरोवर में सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त
पवित्र रामसरोवर तालाब में स्नान करने के दौरान पानी की गहराई का अंदाजा न लगा पाने के कारण किसी भी श्रद्धालु के डूबने जैसी अनहोनी न हो, इसके लिए मेला प्रशासन ने गत 20 अगस्त से ही राज्य आपदा मोचन बल की एक विशेष टुकड़ी को तैनात कर दिया है। जोधपुर से आई इस एसडीआरएफ यूनिट के हेड कांस्टेबल भंवराराम के निर्देशन में कुल 10 प्रशिक्षित जवान नाव के माध्यम से पूरे तालाब और घाटों के आसपास निरंतर गश्त कर रहे हैं। ये सुरक्षाकर्मी लाउडस्पीकर के जरिए लगातार स्नान करने वाले लोगों को आगाह कर रहे हैं कि वे केवल सुरक्षित दायरे में ही स्नान करें और किसी भी स्थिति में गहरे पानी की तरफ आगे न बढ़ें।
मुस्तैद जवानों ने बचाई श्रद्धालुओं की जिंदगी
एसडीआरएफ के जवानों द्वारा सुबह से लेकर रात तक की जा रही इस मुस्तैद निगरानी का ही परिणाम है कि इस बार के मेले में अभी तक किसी भी गंभीर हादसे की खबर सामने नहीं आई है। हालांकि, स्नान के दौरान अनजाने में या जरा सी असावधानी के कारण गहरे पानी में उतर जाने की वजह से 10 से अधिक श्रद्धालुओं के डूबने की नौबत आ गई थी। लेकिन मौके पर मौजूद सतर्क एसडीआरएफ के जवानों ने तुरंत हरकत में आते हुए समय रहते उन सभी भक्तों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सुरक्षाकर्मियों की इस फुर्ती और तत्परता की वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी खुलकर प्रशंसा की है।
आस्था का सैलाब और पारंपरिक प्रसाद
इस बार अच्छी बारिश होने के कारण पवित्र रामसरोवर तालाब में लगभग 12 से 13 फीट तक बरसाती पानी जमा है। श्रद्धालुओं के बीच ऐसी गहरी मान्यता है कि बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन करने से पूर्व रामसरोवर में स्नान करना अनिवार्य और पुण्य का काम है, जिससे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि घाटों के चारों तरफ भक्तों का भारी हुजूम उमड़ रहा है। स्नान संपन्न होने के बाद अधिकांश परिवार घाट के नजदीक ही बाबा रामदेव के प्रिय भोजन माने जाने वाले दाल बाटी चूरमा का प्रसाद तैयार करते हैं और मिलजुलकर उसका आनंद लेते हैं। इस दौरान देश के तमाम राज्यों से पहुंचे लोगों की मौजूदगी से यहां भारतीय संस्कृति की अद्भुत और रंगीन छटा देखने को मिलती है।
26 सितंबर तक तैनात रहेगी टीम
रामसरोवर तालाब के तट पर श्रद्धालुओं की यह चहल-पहल और भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह विशेष एसडीआरएफ टीम मेले के समापन यानी आगामी 26 सितंबर तक लगातार अपनी सेवाएं देती रहेगी। दूसरी ओर, प्रशासन ने भी तमाम आने वाले श्रद्धालुओं से पुरजोर अपील की है कि वे सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से पालन करें और छोटे बच्चों को पानी के किनारों से दूर रखें, ताकि यह पूरा धार्मिक उत्सव बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।



















