भारत के लोगों में घूमने-फिरने का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है और वे अनिश्चितताओं या बाधाओं के आगे झुकने के बजाय परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाना बखूबी जानते हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि देश के लगभग 96 फीसदी यात्री किसी भी तरह की परेशानी या बदलाव की स्थिति पैदा होने पर अपना सफर पूरी तरह रद्द करने के बजाय उसके प्लान में फेरबदल करने को प्राथमिकता देते हैं। यह लचीलापन और सकारात्मक रवैया भारतीय पर्यटकों की अनूठी कार्यशैली को दर्शाता है। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी बुकिंग डॉट कॉम की एक नई रिपोर्ट में ये दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं, जो पर्यटन क्षेत्र को लेकर एक नया दृष्टिकोण पेश करती हैं।
प्लान में बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहते हैं 96 प्रतिशत लोग
ट्रैवल हैप्पीनेस इंडेक्स रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि सफर के दौरान यदि कोई रुकावट आती है, तो 96 फीसदी लोगों का यह मानना होता है कि वे अपनी यात्रा को बीच में ही छोड़ने या बंद करने के बजाय उसमें आवश्यक परिवर्तन करेंगे। जब इन पर्यटकों से यह पूछा गया कि वे किस तरह के बदलाव चुनेंगे, तो विभिन्न दिलचस्प विकल्प सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, बदलाव चाहने वाले ऐसे यात्रियों में से 28 फीसदी लोग किसी बिल्कुल नए और वैकल्पिक गंतव्य यानी दूसरी जगह पर जाने का चुनाव करते हैं। इसके अलावा, 19 प्रतिशत लोग अपनी इस यात्रा को कुछ समय के लिए आगे की तारीखों पर टाल देते हैं, जबकि अन्य 19 फीसदी लोग यात्रा की टाइमिंग या फिर इसकी कुल अवधि में फेरबदल कर लेते हैं ताकि उनका वेकेशन खराब न हो।
यात्रा की महज उम्मीद ही 90 प्रतिशत लोगों का मूड सुधार देती है
सफर के प्रति भारतीयों के लगाव का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यह सिर्फ घूमने की बात नहीं है, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर डालता है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश के 99 फीसदी यात्री घूमने-फिरने को सकारात्मक भावनाओं के साथ जोड़कर देखते हैं। वहीं, करीब 90 फीसदी लोगों का यह कहना है कि महज आने वाले सफर की उम्मीद ही उनके पूरे दिन का मूड बेहतर कर देती है। इसके अलावा, लगभग 82 प्रतिशत लोग इस बात की पुष्टि करते हैं कि नियमित रूप से यात्रा करना उनकी कुल खुशी और बेहतर जिंदगी यानी वेलबीइंग के लिए बेहद आवश्यक है, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है।
व्यक्तिगत विकास और बेहतर जीवन का माध्यम बनता जा रहा है सफर
पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में आ रहे इन बदलावों को लेकर बुकिंग डॉट कॉम के साउथ एशिया चीफ संतोष कुमार ने अपने एक बयान में खास तौर पर जोर दिया कि अब पर्यटन केवल रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से चंद दिनों की राहत पाने भर का जरिया नहीं रह गया है। उनका मानना है कि यह अब एक बेहतर जीवन शैली, आपसी रिश्तों को मजबूत करने और पर्सनल डेवलपमेंट यानी व्यक्तिगत विकास की दिशा में एक बड़ा इन्वेस्टमेंट बनता जा रहा है।
एशिया-प्रशांत के 10 हजार से अधिक लोगों पर किया गया व्यापक सर्वे
किसी भी अनिश्चितता के दौर में भी अपनी प्लानिंग को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उसमें लचीलापन लाकर सफर का भरपूर आनंद उठाने का यह रुझान वास्तव में काफी उत्साहित करने वाला है। यह संपूर्ण रिपोर्ट एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कुल 10 देशों में किए गए एक विस्तृत अध्ययन पर आधारित है, जिसमें 21 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के 10 हजार 136 लोगों को शामिल किया गया था। इस ऑनलाइन सर्वे को मई 2026 के दौरान अंजाम दिया गया था, जिसमें अकेले भारत से ही एक हजार 15 लोगों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई थी और अपने अनुभवों को साझा किया था।



















