उदयपुर को झीलों की नगरी कहा जाता है, लेकिन इस शहर की पहचान सिर्फ पानी से नहीं बल्कि हरियाली से भी जुड़ी है. शहर के ठीक बीचोंबीच फैला गुलाब बाग उदयपुर का सबसे बड़ा हरित क्षेत्र माना जाता है, जिसे स्थानीय लोग शहर का ऑक्सीजन हब भी कहते हैं. सैकड़ों एकड़ में फैले इस बाग में लाखों पेड़-पौधे मौजूद हैं और यही वजह है कि इसे उदयपुर की जीवनरेखा तक कहा जाता है. सुबह और शाम के वक्त यहां बड़ी तादाद में लोग टहलने, योग करने और व्यायाम करने पहुंचते हैं. घने पेड़ों के बीच से गुजरते हुए ऐसा लगता है जैसे शहर के बीच में ही कोई छोटा जंगल बसा हो. शहर के मध्य में स्थित होने के बावजूद यहां का माहौल इतना शांत है कि लोग यहां आकर प्रकृति के करीब महसूस करते हैं.
महाराणा सज्जन सिंह के दौर से जुड़ा इतिहास
गुलाब बाग की नींव मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह के शासनकाल में रखी गई थी. महाराणा सज्जन सिंह को बागवानी और प्रकृति से गहरा लगाव था और वे अक्सर विदेश यात्राओं पर जाया करते थे. इन्हीं यात्राओं के दौरान वे अलग-अलग देशों से दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे लेकर आते और उन्हें उदयपुर में लगवाते थे. यही कारण है कि आज भी गुलाब बाग में देश और विदेश, दोनों जगहों की खास वनस्पतियां देखने को मिलती हैं. बाग परिसर में बना विक्टोरिया हॉल इसकी ऐतिहासिक छवि को और निखारता है. ब्रिटिश दौर की झलक देने वाली इस इमारत की वास्तुकला आज भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है. बच्चों के लिए यहां टॉय ट्रेन की सुविधा भी दी गई है, जो बरसों से आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी हुई है.
प्रदूषण के दौर में क्यों अहम है यह हरित क्षेत्र
पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो शहरीकरण और प्रदूषण जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसमें गुलाब बाग जैसे हरे-भरे क्षेत्र किसी भी शहर के लिए बेहद जरूरी हो जाते हैं. यहां मौजूद हजारों पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि तापमान को नियंत्रित रखने, जैव विविधता बचाने और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. यानी यह बाग सिर्फ घूमने-फिरने की जगह भर नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरण तंत्र का एक जरूरी हिस्सा है.
पर्यटन और शहर की पहचान से जुड़ाव
पर्यटन के लिहाज से भी गुलाब बाग की अहमियत कम नहीं है. हर साल यहां देश और विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. हरियाली, ऐतिहासिक इमारतें और प्राकृतिक सुंदरता का यह मेल गुलाब बाग को उदयपुर की खास पहचान बनाता है. यही वजह है कि इसे सिर्फ एक बाग नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरण, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का जीता-जागता प्रतीक माना जाता है.




















