यदि आप रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी और महानगरों के शोरगुल से दूर पहाड़ों की शांत वादियों में कुछ पल बिताना चाहते हैं, लेकिन आपके पास लंबी छुट्टियों का अभाव है, तो उत्तराखंड का नाग टिब्बा ट्रेक आपके लिए एक आदर्श विकल्प साबित हो सकता है। यह विशेष ट्रेक उन लोगों के लिए बेहद मुफीद है जो बिना किसी लंबे अवकाश के अल्पकालिक अंतराल में ही पर्वतीय ट्रेकिंग के रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा अनुभव लेना चाहते हैं। इस पूरे सफर की रूपरेखा देहरादून से शुरू होती है और पंतवाड़ी गांव से होते हुए नाग टिब्बा की ऊंची चोटी तक पहुंचती है, जहां पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब जाने का अवसर मिलता है।
देहरादून से पंतवाड़ी तक की सड़क यात्रा
इस रोमांचक यात्रा की शुरुआत उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से होती है। यात्रा के पहले चरण में ट्रेकर्स को देहरादून से पंतवाड़ी गांव तक लगभग 90 किलोमीटर की सड़क मार्ग से दूरी तय करनी होती है। गाड़ी से यह सफर पूरा करने में सामान्यतः 4 से 5 घंटे का समय लग जाता है। समुद्र तल से पंतवाड़ी गांव की ऊंचाई करीब 1,450 मीटर यानी 4,700 फीट है। सड़क मार्ग से इस बेस तक पहुंचने के बाद ही आगे का असली पैदल सफर शुरू होता है, जो पर्यटकों को धीरे-धीरे घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से होते हुए आगे ले जाता है।
कैंप 1 तक की पहली पैदल चढ़ाई
पंतवाड़ी गांव पहुंचने के बाद लगभग 4 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई का सिलसिला शुरू होता है, जिसे पूरा करने में तकरीबन 3 घंटे का समय लगता है। इस कठिन चढ़ाई को पार करते हुए यात्री कैंप 1 पर पहुंचते हैं। इस कैंप की ऊंचाई लगभग 2,300 मीटर यानी 7,700 फीट दर्ज की गई है। पंतवाड़ी के बेसकैंप पर यात्रियों की सुविधा के लिए क्लोकरूम का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, यदि कोई पर्यटक इस ट्रेक के साथ परिवहन की सुविधा भी लेना चाहता है, तो वह बुकिंग के दौरान टीटीएच के ऐड-ऑन विकल्प के जरिए इसे आसानी से चुन सकता है।
नाग टिब्बा चोटी का रोमांचक दूसरा दिन
यात्रा के दूसरे दिन का सफर पहले दिन की तुलना में काफी ज्यादा चुनौतीपूर्ण और रोमांचक होता है। इस चरण में पर्यटकों को कैंप 1 से आगे बढ़कर सीधे नाग टिब्बा की मुख्य चोटी तक पहुंचना होता है। नाग टिब्बा टॉप की कुल ऊंचाई करीब 3,000 मीटर यानी 9,900 फीट है। इस चोटी तक सफलतापूप्र्वक पहुंचने और वापस उसी दिन पंतवाड़ी गांव लौटने के लिए कुल मिलाकर लगभग 12 किलोमीटर की लंबी ट्रेकिंग करनी पड़ती है। इस पूरे और थका देने वाले सफर को पूरा करने में करीब 10 से 11 घंटे का लंबा समय लग सकता है।
शारीरिक क्षमता और फिटनेस का महत्व
विशाल चोटी के शिखर पर पहुंचना इस पूरे ट्रेक का सबसे मुख्य और संतोषजनक हिस्सा माना जाता है। हालांकि, इस कठिन रास्ते को तय करने के लिए अच्छी शारीरिक सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प और पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि इस ट्रेक पर निकलने से पहले हर यात्री को अपनी शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि रास्ते में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
यात्रा शुरू करने से पहले जरूरी सावधानियां
भले ही नाग टिब्बा ट्रेक को एक वीकेंड यानी दो दिनों में पूरा किया जा सकता है, लेकिन इसे किसी भी हाल में हल्का नहीं समझना चाहिए। सफर पर निकलते समय अपने साथ आरामदायक ट्रेकिंग शूज, पर्याप्त गर्म कपड़े, पीने के पानी की बोतल और जरूरी जीवन रक्षक दवाइयां जरूर रखनी चाहिए। मौसम के मिजाज को ध्यान में रखते हुए ही अपने कपड़ों और साजो-सामान की सटीक तैयारी करें। चढ़ाई के दौरान अपनी चाल या गति को एक समान बनाए रखें और थकान महसूस होने पर थोड़ा रुककर आराम जरूर करें, ताकि शरीर की ऊर्जा बनी रहे।
बैग पैक करते समय इन सामानों को करें शामिल
नाग टिब्बा के इस खूबसूरत ट्रेक पर रवाना होने से पहले अपने बैग में रेन कवर वाला बैकपैक और डे-पैक, चलने के लिए वॉकिंग स्टिक, पानी की बोतल या हाइड्रेशन पैक, छोटा टिफिन, कुछ एनर्जेटिक स्नैक्स और एक हेड टॉर्च अवश्य रखें। पहनावे के मामले में सिंथेटिक क्विक-ड्राई टी-शर्ट, फ्लीस टी-शर्ट, फ्लीस जैकेट, विंडप्रूफ तथा डाउन जैकेट, थर्मल इनर, ट्रेक पैंट, फ्लीस पैंट और वाटरप्रूफ ग्लव्स को शामिल करें। इसके अलावा सिर की सुरक्षा के लिए ऊनी टोपी, सन कैप, बालाक्लावा, नेक गेटर, इसके साथ ही मजबूत ट्रेकिंग शूज, फ्लोटर्स, कॉटन और ऊनी मोजे, गेटर्स, सनग्लासेस, सनस्क्रीन, अच्छा मॉइश्चराइजर, लिप बाम, टूथब्रश, टूथपेस्ट, टॉयलेट पेपर, साफ वाइप्स, नहाने का साबुन, हैंड सैनिटाइजर, तौलिया और एक व्यक्तिगत मेडिकल किट साथ रखना बिल्कुल न भूलें। यदि रास्ते में बारिश या भारी बर्फबारी की स्थिति बन जाए, तो उसके लिए पोंचो या वाटरप्रूफ जैकेट-पैंट और अपनी जरूरत के मुताबिक माइक्रोस्पाइक्स भी अपने बैग में अच्छी तरह पैक कर लें।


















