दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित रामेश्वरम और धनुषकोडी की यात्रा सैलानियों को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। यहाँ समंदर की लहरों के बीच धार्मिक आस्था और अतीत के पन्नों में दबी दास्तान का अनूठा संगम महसूस होता है। मुख्य भूमि से इस द्वीप तक पहुँचने का सफर अपने आप में बहुत रोमांचक है, क्योंकि सड़क के दोनों तरफ दूर-दूर तक नीला पानी ही नजर आता है।
कोठंडारामस्वामी मंदिर और पौराणिक महत्व
धनुषकोडी क्षेत्र रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी छोर पर अपनी जगह बनाए हुए है। यहाँ का सबसे मुख्य आकर्षण कोठंडारामस्वामी मंदिर है, जो भगवान राम को समर्पित है। पानी के बीचों-बीच बने इस पवित्र स्थल तक जाने के रास्ते में चारों तरफ रेत और समंदर का मनमोहक परिदृश्य दिखाई देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर रावण के भाई विभीषण ने भगवान राम की शरण ली थी।
बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का मिलन
इस इलाके के पास ही बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर आपस में मिलते हैं। यहाँ के पानी का रंग, लहरों की गति और चारों तरफ पसरा सुकून भरा माहौल इस जगह को बेहद खास बनाता है। हालांकि पर्यटकों को सुरक्षा के लिहाज से समंदर के पानी में उतरने या तैरने से पूरी तरह बचना चाहिए और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
1964 के चक्रवात ने मिटा दिया था आबाद कस्बा
धनुषकोडी केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही भयानक इतिहास भी जुड़ा हुआ है। वर्ष 1964 में आए एक भयानक चक्रवात ने इस पूरे शहर को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था। उस तबाही से पहले यहाँ चहल-पहल हुआ करती थी, जहाँ रेलवे स्टेशन, चर्च, स्कूल और स्थानीय लोगों के पक्के मकान हुआ करते थे। उस प्राकृतिक आपदा के बाद से यह पूरा इलाका लगभग वीरान हो गया। आज भी यहाँ पुराने रेलवे स्टेशन और क्षतिग्रस्त चर्च के खंडहर साफ देखे जा सकते हैं, जिन्हें देखकर उस तबाही का मंजर आँखों के सामने आ जाता है। इन्हीं वीरान अवशेषों के कारण इस जगह को भूतिया शहर या घोस्ट टाउन के नाम से भी पुकारा जाता है।
रामनाथस्वामी मंदिर और ऐतिहासिक पंबन ब्रिज
रामेश्वरम की अपनी इस यात्रा के दौरान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन करना एक बेहद आध्यात्मिक अनुभव साबित होता है। यह मंदिर अपनी विशाल दीवारों, लंबे गलियारों, शानदार नक्काशी और गहरे धार्मिक महत्व के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। रामेश्वरम की तरफ बढ़ने वाले रास्ते पर जब सैलानी पहुँचते हैं, तो प्रसिद्ध पंबन ब्रिज हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। यह पुल मुख्य भूमि को रामेश्वरम द्वीप के साथ जोड़ता है। इसके आसपास फैला हुआ विशाल जल और उस पर से गुजरती हुई ट्रेन का नजारा किसी का भी मन मोह सकता है। जो लोग फोटोग्राफी के शौकीन हैं, उनके लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।
अरिचल मुनाई तक फैला सड़क मार्ग
धनुषकोडी से थोड़ा आगे बढ़ने पर अरिचल मुनाई नामक स्थान आता है जहाँ तक सड़क जाती है। इस जगह को देश के सबसे आखिरी सड़क योग्य छोरों में शुमार किया जाता है। यहाँ से समंदर का असीम विस्तार नजर आता है। यहाँ का शांत वातावरण और दूर तक फैली हुई रेत यात्रियों को कुछ पल के लिए रुकने और सोचने पर मजबूर कर देती है।
यहाँ पहुँचने के लिए ट्रेन का विकल्प सबसे सुगम माना जाता है क्योंकि रामेश्वरम में रेलवे स्टेशन मौजूद है और देश के कई प्रमुख शहरों से यहाँ के लिए सीधी ट्रेनें चलती हैं। यदि कोई हवाई जहाज से सफर करना चाहे तो मदुरै एयरपोर्ट तक की उड़ान ले सकता है और उसके बाद सड़क मार्ग का सहारा लेकर आसानी से रामेश्वरम पहुँचा जा सकता है।
रामेश्वरम से धनुषकोडी की कुल दूरी लगभग 20 किलोमीटर है, जिसे तय करने के लिए टैक्सी या अन्य स्थानीय वाहन आसानी से मिल जाते हैं। यहाँ घूमने के लिए साल के अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है क्योंकि इस दौरान मौसम काफी सुहाना और आरामदायक रहता है। यदि आप ऐसी जगहों की तलाश में हैं जहाँ प्रकृति के खूबसूरत नजारों के साथ-साथ प्राचीन इतिहास और धार्मिक आस्था को करीब से महसूस किया जा सके, तो इस डेस्टिनेशन को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर जोड़ें।



















