विदेश जाकर शानदार करियर बनाने और डॉलर में कमाई करने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका में बसे अरहम इश्तियाक का एक सोशल मीडिया संदेश काफी चर्चा में है। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले अरहम ने अपने एक वीडियो में प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के भारत लौटने के फैसलों का व्यावहारिक विश्लेषण पेश किया है। उनका कहना है कि करियर की शुरुआत में यानी 20-22 वर्ष की उम्र में स्वदेश लौटना और जीवन के उत्तरार्ध में 40 वर्ष की आयु पार करने के बाद भारत वापस आना दो बिल्कुल अलग-अलग स्थितियां होती हैं। इन दोनों पड़ावों पर इंसान की कुल बचत, मासिक कमाई और सोच का स्तर एक जैसा नहीं होता, जिसका सीधा प्रभाव उनके जीवन से जुड़े बड़े फैसलों पर दिखाई देता है।
उम्र के दो पड़ाव: प्रवासियों की वित्तीय स्थिति का विश्लेषण
अरहम इश्तियाक के विश्लेषण के मुताबिक, विदेशों में रहने वाले प्रवासियों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में देखा जा सकता है। पहली श्रेणी उन लोगों की है जो 40 साल या उससे अधिक उम्र के हो चुके हैं। इस उम्र तक आते-आते अधिकांश लोग अपने पेशेवर जीवन में काफी हद तक स्थापित हो जाते हैं। वे विदेश में एक लंबा समय बिताकर अच्छी-खासी संपत्ति, बैंक बैलेंस और इनवेस्टमेंट तैयार कर चुके होते हैं। यदि ऐसे स्थापित प्रवासी अमेरिका छोड़कर भारत लौटने का फैसला करते भी हैं, तो उनकी लाइफस्टाइल पर कोई बड़ा आर्थिक झटका नहीं लगता। अरहम के शब्दों में कहें तो यदि कोई व्यक्ति अमेरिका में 2 करोड़ रुपये सालाना कमा रहा था और भारत आकर उसकी आय घटकर 1 करोड़ रुपये भी रह जाती है, तब भी वह भारत में सुकून, मान-सम्मान और स्थिरता के साथ अपना जीवन आसानी से व्यतीत कर सकता है।
करियर की शुरुआत और कमाई का बड़ा अंतर
इसके विपरीत, 20 से 25 साल के युवाओं की स्थिति पूरी तरह भिन्न होती है। यह वह पड़ाव है जब युवा अपने करियर के शुरुआती चरण में होते हैं और वित्तीय रूप से खुद को मजबूत बनाने की जद्दोजहद में लगे होते हैं। होटल इंडस्ट्री से जुड़े अरहम ने खुद की स्थिति का उदाहरण देते हुए इस खाई को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यदि वे भारत में रहकर इसी बैकग्राउंड में काम कर रहे होते, तो उनके लिए हर महीने 20 हजार रुपये कमाना भी एक बड़ी चुनौती होता। इसके मुकाबले, आज वे अमेरिका में रहकर हर दिन 20 हजार रुपये से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। शुरुआती करियर के दौरान भारत और अमेरिका के सैलरी पैकेज और काम के माहौल के बीच यह विशाल अंतर ही वह मुख्य कारण है, जिसकी वजह से 20s की उम्र में भारत लौटने का फैसला किसी भी युवा के लिए बेहद कठिन और जोखिम भरा बन जाता है।
कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलने की सलाह
सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने वीडियो के कैप्शन में अरहम ने यह साफ किया है कि उनका इरादा युवाओं को हमेशा के लिए भारत छोड़ने की सलाह देना बिल्कुल नहीं है। उनका मुख्य संदेश यह है कि युवाओं को अपने शुरुआती करियर में घर और अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलना चाहिए। वे कहते हैं कि युवाओं को बाहर जाकर संघर्ष करना चाहिए, अच्छी कमाई करनी चाहिए, नई चीजें सीखनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि वैश्विक स्तर पर दुनिया कैसे काम करती है। जब कोई व्यक्ति पूरी दुनिया देख ले और आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाए, तब उसे सोच-समझकर यह तय करना चाहिए कि वह अपना आगे का जीवन कहां बिताना चाहता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और युवाओं की प्रतिक्रियाएं
अरहम इश्तियाक के इस विचार ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। इस वीडियो पर यूजर्स की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां कई युवाओं ने अरहम के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि विदेश में रहने के बावजूद परिवार के साथ वक्त बिताने का सुख नहीं मिल पाता और हर समय एक कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली दौड़ में भागना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि हर इंसान की व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए किसी को भी विदेश जाने या भारत में रहने के अपने फैसले पर दूसरों को सफाई देने की जरूरत नहीं है।



















