अक्सर सांप का नाम सुनते ही लोग सहम जाते हैं और खौफ के साए में आ जाते हैं, मगर कुदरत की गोद में कुछ ऐसे भी अनोखे जीव मौजूद हैं जिनका रूप-रंग डर के बजाय हैरत और कौतूहल पैदा करता है। ऐसा ही एक बेहद दुर्लभ और आकर्षक सरीसृप है रेनबो स्नेक, जिसे विज्ञान की दुनिया में फरैंसिया एरिथ्रोग्राम्मा (Farancia erytrogramma) के नाम से पहचाना जाता है। इसके जिस्म पर सजी लाल, पीली और गहरी काली पट्टियां इसे किसी चलती-फिरती ज्वैलरी या कुदरती नगीने जैसा आकर्षण देती हैं, जिसकी बनावट किसी को भी पहली नजर में मंत्रमुग्ध कर सकती है।
कुदरती रंगों का इंद्रधनुषी संसार
रेनबो स्नेक का यह नाम इसके शरीर पर मौजूद रंगों के अद्भुत तालमेल की वजह से पड़ा है। जब रोशनी इसकी चिकनी और चमकदार चमड़ी पर पड़ती है, तो यह किसी सजे-धजे गहने जैसी चमक बिखेरती है। इसकी पीठ के ऊपर तीन लंबी और सीधी लाल धारियां खिंची होती हैं, जो सिर से लेकर पूंछ की दिशा तक जाती हैं। शरीर के बाकी हिस्सों में चमकदार काले और चटख पीले रंगों का गहरा संगम दिखाई देता है। इसका सिर गहरे रंग का होता है, जिसके आसपास लाल रंग के स्पष्ट निशान बने होते हैं। रंगों की यह अनोखी लिखावट इसे बाकी तमाम सांपों की कतार से बिल्कुल अलग और किसी कलाकार की पेंटिंग जैसा बना देती है।
जलीय ठिकानों और नमी से गहरा नाता
सामान्य तौर पर सूखी जमीन पर रेंगने वाले आम सांपों से उलट, रेनबो स्नेक का रहन-सहन पूरी तरह से पानी और नमी वाले प्राकृतिक इलाकों से जुड़ा हुआ है। यह शांत जलस्रोतों, दलदली भूमि और नदियों व तालाबों के किनारे के नम आवासों में ही अपनी जिंदगी गुजारना पसंद करता है। पानी की मौजूदगी इसके जैविक अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी होती है, यही कारण है कि सूखे मैदानी इलाकों के मुकाबले जलीय परिवेश के पास इसके पाए जाने की संभावना सबसे अधिक रहती है। अपनी इसी गुप्त जीवनशैली के चलते यह इंसानी नजरों से अक्सर ओझल ही रहता है।
बिना जहर का जीव और खतरे में अनोखा बर्ताव
रेनबो स्नेक को लेकर लोगों के बीच कई तरह के भ्रम और डर फैले रहते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार यह प्रजाति बिल्कुल गैर-विषैली यानी बिना जहर वाली होती है। इंसानों को डसने या आक्रामक होने के बजाय इसका बचाव का तरीका काफी निराला है। जब कभी इसे किसी खतरे या शिकारी की आहट महसूस होती है, तो यह आक्रामक रुख अपनाने या काटने के बजाय अपने शरीर को एक गेंद की तरह गोल-गोल लपेट लेता है। इसी मुद्रा में यह अपनी पूंछ के सिरे को ऊपर की ओर उठा लेता है, जिससे सामने वाला भ्रमित हो जाए और इसे बिना छेड़े आगे बढ़ जाए।
खूबसूरती के बावजूद दूरी बनाए रखना ही समझदारी
चमकदार और आकर्षक दिखने के कारण बहुत से लोग इसकी खूबसूरत तस्वीरें खींचने और इसे निहारने के लिए लालायित रहते हैं। हालांकि, इसका गैर-विषैला होना किसी को इसे हाथ लगाने या पालतू बनाने की छूट नहीं देता। प्रकृति का यह बुनियादी उसूल है कि हर जंगली जीव को उसके प्राकृतिक माहौल में स्वतंत्र रूप से रहने दिया जाए। इंसानी दखल जंगली जीवों के लिए संकट पैदा कर सकता है और भयभीत होने पर कोई भी जीव अप्रत्याशित व्यवहार कर सकता है। इसलिए अगर कभी कुदरत के इस रंग-बिरंगे जीव से सामना हो, तो बिना छेड़े और बिना उकसाए सुरक्षित दूरी से ही इसके सौंदर्य का आनंद लेना सबसे बेहतर कदम है।



















