किराने की दुकान या दूध के बूथ पर जब कोई थैली खरीदने जाता है, तो नारंगी, हरे, नीले और गुलाबी रंगों के पैकेट कतार में सजे दिखाई देते हैं। अधिकांश उपभोक्ता इन रंगों को ब्रांड की सामान्य डिजाइनिंग मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि असल में ये रंग दूध के अंदर मौजूद फैट की मात्रा और उसकी विशिष्ट किस्म को समझाने के लिए एक व्यावहारिक संकेत की तरह काम करते हैं। इस व्यवस्था की मदद से लोग बिना पूरा विवरण पढ़े तुरंत अपनी पसंद की थैली चुन सकते हैं, यद्यपि अलग-अलग डेयरी ब्रांड्स के बीच इन रंगों के संकेत में कुछ भिन्नता भी देखने को मिल सकती है।
नारंगी रंग और फुल क्रीम दूध की खासियत
डेयरी बाजार में नारंगी रंग की थैली प्रायः फुल क्रीम दूध को दर्शाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। इस श्रेणी के दूध में फैट की मात्रा लगभग 6 प्रतिशत तक पाई जाती है, जिसके कारण यह काफी गाढ़ा, मलाईदार और स्वाद में समृद्ध होता है। घरेलू रसोई में जब खीर पकानी हो, पारंपरिक मिठाइयां तैयार करनी हों, गाढ़ा दही जमाना हो अथवा शुद्ध देसी घी निकालना हो, तब नारंगी पैकेट का चयन सबसे उपयुक्त माना जाता है। ऐसे लोग जिन्हें दूध का प्राकृतिक मलाईदार स्वाद अत्यधिक पसंद है, वे अमूमन इसी विकल्प को प्राथमिकता देते हैं।
संतुलित पसंद के रूप में हरे रंग का पैकेट
हरे रंग के पैकेट में कई प्रमुख ब्रांड्स स्टैंडर्डाइज्ड या सामान्य फैट स्तर वाला दूध उपलब्ध कराते हैं। इस किस्म में फैट की हिस्सेदारी करीब 4.5 प्रतिशत के आसपास दर्ज की जाती है। यह न तो फुल क्रीम जितना भारी होता है और न ही बहुत पतला, जिसके चलते इसका संतुलन दैनिक इस्तेमाल के लिए सबसे सटीक बैठता है। सुबह की चाय, कॉफी बनाने और बच्चों या वयस्कों के रोजाना पीने के उद्देश्य से यह हरा पैकेट रसोई घरों में खूब पसंद किया जाता है।
नीले रंग का चुनाव और टोन्ड मिल्क
नीले रंग की पैकेजिंग अमूमन टोन्ड मिल्क की पहचान होती है, जिसमें फैट की मात्रा लगभग 3 प्रतिशत के स्तर पर रखी जाती है। यह उन उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनता है जो फुल क्रीम वाले गाढ़ेपन से बचना चाहते हैं, लेकिन दूध के स्वाभाविक स्वाद और बनावट के साथ कोई बड़ा समझौता भी नहीं करना चाहते। दैनिक चाय अथवा नाश्ते के साथ हल्का पेय पसंद करने वालों के लिए यह एक संतुलित और सुलभ विकल्प सिद्ध होता है।
गुलाबी या मैजेंटा रंग में डबल टोन्ड विकल्प
कुछ डेयरी कंपनियां अपने डबल टोन्ड दूध की पहचान के लिए गुलाबी या मैजेंटा रंग के पैकेट का इस्तेमाल करती हैं। इस दूध में वसा की मात्रा घटकर लगभग 1.5 प्रतिशत रह जाती है। यह बेहद हल्का होता है और शरीर में वसा का सेवन घटाने वाले या वजन के प्रति सजग लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है।
पैकेट का रंग और दूध की गुणवत्ता का सच
अक्सर उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पैकेट का गहरा या चमकीला रंग दूध की शुद्धता अथवा बेहतर गुणवत्ता की गारंटी देता है। हकीकत यह है कि पाउच का रंग किसी भी दृष्टि से दूध की क्वालिटी या शुद्धता तय नहीं करता, बल्कि यह केवल फैट के अनुपात और प्रसंस्करण की श्रेणी को अलग-अलग दिखाने का माध्यम है। विभिन्न उत्पादक कंपनियां अपनी सुविधानुसार अलग रंग भी चुन सकती हैं, इसलिए खरीदारी करते वक्त केवल रंग पर निर्भर न रहें और पैकेट के पीछे मुद्रित फैट प्रतिशत, दूध का प्रकार तथा पोषण संबंधित सूची को अवश्य ध्यानपूर्वक पढ़ें।



















