चाय के साथ कुछ करारा चाहिए और घर में मेथी के पत्ते रखे हैं, तो मठरी के लिए बाजार जाने की जरूरत नहीं. शाहीन सैयद ने अपनी रेसिपी में मैदा को पूरी तरह हटाकर सिर्फ गेहूं के आटे से यह डिश तैयार की है, और फिर भी टेक्सचर वैसा ही परतदार और कुरकुरा निकलता है जैसा दुकान की मठरी में मिलता है.
घर पर बनी मठरी क्यों है बेहतर पसंद
पैकेट या दुकान से खरीदी मठरी का स्वाद भले अच्छा लगे, मगर उसमें कितनी बार का तेल इस्तेमाल हुआ और सामग्री कैसी है, यह पता लगाना मुश्किल रहता है. गेहूं के आटे और ताजी मेथी-धनिया से घर पर तैयार यही स्नैक भरोसेमंद विकल्प बनता है. इसे बनाने में समय जरूर लगता है, पर एक बार तरीका समझ आने के बाद अगली बार यह काम आसान हो जाता है.
मेथी-धनिया की तैयारी से करें शुरुआत
एक मुट्ठी मेथी की पत्तियां और उतना ही हरा धनिया धोकर एक छलनी में रख दें ताकि पानी पूरी तरह निकल जाए, नमी बचने पर मठरी जल्दी सॉफ्ट हो सकती है. दोनों को बारीक काटकर थोड़े तेल में हल्का सा भूनें, इससे मेथी की कड़वाहट घटती है और भाप बनकर बची नमी भी निकल जाती है. जिस मौसम में मेथी न मिले, बिना मेथी के भी यही रेसिपी बनाई जा सकती है.
मसाले मिलाकर आटा गूंथने की विधि
एक बड़े परात में डेढ़ कप गेहूं का आटा और भुनी मेथी-धनिया डालें, फिर इसमें ये मसाले मिलाएं
- लाल मिर्च पाउडर, एक चम्मच
- हल्दी, आधा चम्मच
- जीरा, एक चम्मच
- कुटी काली मिर्च, आधा चम्मच
- स्वादानुसार नमक
- सफेद तिल, एक चम्मच
- अजवाइन, आधा चम्मच
कुरकुरापन लाने वाला मोयन डालना न भूलें, इसके लिए दो चम्मच तेल या घी काफी है. सारी सामग्री हाथों से मिलाकर धीरे-धीरे पानी डालें और कड़ा आटा तैयार करें, आटा ढीला या मुलायम नहीं रहना चाहिए. इसे कपड़े से ढककर करीब आधे घंटे आराम दें.
परतदार बनावट का राज, साटा
असली हलवाई वाली परतें चाहिए तो एक खास पेस्ट बनाना पड़ेगा, जिसे साटा कहा जाता है, तीन चम्मच पिघला घी और दो चम्मच सूखे आटे को साथ फेंटकर मलाईदार बना लें. फिर सेट हो चुके आटे से नौ के करीब बराबर हिस्से तोड़ें. हर हिस्से को पतला बेलकर उस पर साटा फैलाएं, दूसरा बेला हुआ हिस्सा उसके ऊपर रखकर फिर साटा लगाएं, और आखिर में तीसरा हिस्सा ऊपर रख दें. तीन-तीन परतों का यह स्टैक हल्के हाथों से थोड़ा बेला जाता है, फिर एक किनारे से शुरू करते हुए कसकर बेलन जैसा रोल बना लिया जाता है, बीच में हवा फंसने से मठरी तलते वक्त बिखर सकती है इसलिए इस पर ध्यान दें.
टुकड़ों को धैर्य से बेलें
रोल को चाकू से बराबर आकार के टुकड़ों में बांट लें. हर टुकड़े को पहले हथेली से हल्का सा दबाएं, उसके बाद बेलन से आराम से बेलें, यहां जल्दबाजी नुकसान कर सकती है क्योंकि ज्यादा दबाव पड़ने पर भीतर की परतें आपस में चिपक या टूट सकती हैं. साथ ही इन्हें बहुत पतला भी मत बेलिए, थोड़ी मोटाई रहने पर तलने के बाद बाहर का हिस्सा कुरकुरा और भीतर का हिस्सा परत-दर-परत खुलता हुआ मिलता है.
तलने और डिब्बाबंद करने का सही सलीका
कड़ाही में तेल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें, तेज आंच में सतह जल्दी भूरी हो जाती है जबकि भीतर का हिस्सा कच्चा रह जाता है. टुकड़ों को धीमी-मध्यम आंच पर तब तक तलें जब तक रंग सुनहरा और बनावट कुरकुरी न हो जाए. तलकर निकालते ही इन्हें किसी सोखने वाले कागज या छलनी में फैला दें और ठंडा होने का पूरा समय दें, मठरी गरम रहते हुए डिब्बे में भर दी जाए तो भीतर भाप जमा होकर कुरकुरापन खत्म कर देती है. ठंडा होने के बाद ही सूखे, हवाबंद डिब्बे में भरें, और हर बार निकालते समय हाथ या चम्मच सूखा व साफ रखें ताकि यह लंबे समय तक अच्छी बनी रहे.


















