घर की छत या बालकनी में बागवानी का शौक रखने वाले लोग इस बार सहजन यानी मोरिंगा का पौधा भी अपने घर में आसानी से लगा सकते हैं। इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल सजावट के काम नहीं आता, बल्कि रसोई में भी बहुत उपयोगी साबित होता है। इसकी पत्तियों और फलियों का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने में किया जाता है। सहजन को ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है और इसे घर पर उगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है।
सही आकार के गमले का चुनाव
सहजन का पौधा समय बीतने के साथ काफी बड़ा हो जाता है, इसलिए इसके लिए गमला चुनते समय उसके आकार का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। शुरुआत के दौर में लगभग 12 इंच गहरा गमला इसके लिए उपयुक्त रहता है। गमला ऐसा होना चाहिए जिसके निचले हिस्से में पानी बाहर निकलने के लिए पर्याप्त छेद दिए गए हों। यदि गमले के अंदर पानी लंबे समय तक रुका रहता है, तो पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं और उसे नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा, पौधे को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां भविष्य में उसकी शाखाओं को फैलने के लिए खुला स्थान मिल सके।
धूप और प्रकाश की जरूरत
मोरिंगा के पौधे को अच्छी तरह से बढ़ने के लिए भरपूर रोशनी की आवश्यकता होती है। गमले को घर की ऐसी छत या बालकनी में रखना सबसे अच्छा रहता है जहां पौधे को प्रतिदिन लगभग 6 से 8 घंटे की सीधी धूप मिल सके। यदि किसी स्थान पर प्राकृतिक प्रकाश बहुत कम मात्रा में आता है, तो पौधे की जरूरत को पूरा करने के लिए ग्रो लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, पौधे के लिए सबसे आसान और प्राकृतिक तरीका यही है कि उसे भरपूर धूप मिलने वाली जगह पर रखा जाए।
मिट्टी तैयार करने का तरीका
सहजन के पौधे के विकास के लिए ऐसी मिट्टी सबसे बेहतरीन मानी जाती है जिसमें से पानी आसानी से बहकर निकल जाए। सामान्य पॉटिंग मिट्टी में थोड़ी मात्रा में रेत या पर्लाइट मिलाने से मिट्टी को भुरभुरा और ढीला रखने में काफी मदद मिलती है। इस पौधे के लिए मिट्टी का पीएच मान लगभग 6 से 7 के बीच होना अनुकूल माना जाता है। पौधे में पानी डालने से पहले उसकी ऊपरी सतह को छूकर जांच लें, और यदि ऊपरी परत सूखी महसूस हो तभी दोबारा पानी दें। जरूरत से ज्यादा पानी देना पौधे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
पौधे को घना और स्वस्थ रखने के लिए छंटाई
गमले में उगाया गया सहजन का पौधा काफी तेजी से ऊपर की ओर लंबाई में बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में समय-समय पर इसकी हल्की छंटाई करते रहना जरूरी है ताकि इसकी ऊंचाई और आकार को ठीक से संभाला जा सके। बहुत अधिक लंबी या कमजोर हो चुकी टहनियों को जरूरत के हिसाब से काटा जा सकता है। छंटाई का काम हमेशा साफ उपकरणों की मदद से करें और एक ही बार में बहुत सारी शाखाओं को न काटें। इससे पौधे पर किसी भी तरह का अतिरिक्त दबाव पड़ने से बचाया जा सकता है।
कीटों से बचाव और खाद का प्रबंधन
मोरिंगा की पत्तियों और नई कोमल टहनियों पर समय-समय पर नजर बनाए रखना जरूरी है क्योंकि एफिड्स जैसे छोटे कीट पौधे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कीड़े नजर आने पर सबसे पहले प्रभावित पत्तियों को साफ करने का प्रयास करें और पौधे पर निगरानी रखें। जरूरत पड़ने पर पौधों के लिए बनाए गए सुरक्षित कीटनाशक साबुन का प्रयोग उसके पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है। इसके अलावा, पौधे के बेहतर विकास के लिए समय-समय पर खाद भी दी जा सकती है। लगभग चार सप्ताह के अंतराल पर हल्की मात्रा में खाद डालना एक अच्छा विकल्प है और खाद की मात्रा हमेशा पैकेट पर लिखे दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही रखनी चाहिए। अधिक मात्रा में खाद डालने से पौधे को लाभ की बजाय नुकसान हो सकता है।
मोरिंगा उगाने के घरेलू उपयोग और लाभ
घर पर मोरिंगा का पौधा लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी पत्तियों और फलियों दोनों का उपयोग खानपान में किया जाता है। इसकी पत्तियों को विभिन्न सब्जियों और अन्य व्यंजनों में शामिल किया जाता है, जबकि इसकी फलियों से पारंपरिक सहजन की स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जाती है। यह पौधा घर की रसोई की जरूरत को पूरा करने के साथ-साथ आपके घर की हरियाली को भी बढ़ाता है।























