दक्षिण भारतीय व्यंजनों की जब भी चर्चा होती है, तब मेदु वड़े का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। बाहर से सुनहरे और कुरकुरे तथा अंदर से मुलायम व स्पंजी वड़े किसे पसंद नहीं आते हैं? हालांकि, जब इन्हें घर पर बनाने की कोशिश की जाती है, तो कई बार नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं निकलता। कभी बैटर ठीक होने के बावजूद वड़े बहुत ज्यादा तेल पी जाते हैं, तो कभी वे कड़क हो जाते हैं। ऐसे में रसोई का एक पुराना और आजमाया हुआ तरीका आपकी काफी मदद कर सकता है।
गरम तेल का इस्तेमाल और बैटर की तैयारी
कुकिंग से जुड़े एक लोकप्रिय नुस्खे के अनुसार, वड़े के बैटर में थोड़ा सा गरम तेल मिलाने से तलने के बाद उनका टेक्सचर काफी बेहतर हो जाता है। हालांकि, केवल तेल मिला देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी सही मात्रा और बैटर का गाढ़ापन भी बहुत मायने रखता है। पारंपरिक रूप से उड़द दाल को भिगोकर अच्छी तरह पीसकर यह बैटर तैयार किया जाता है। इसके बाद इसमें नमक, हरी मिर्च, अदरक, करी पत्ता और अन्य पसंद के मसाले मिलाए जाते हैं। मिश्रण तैयार होने के बाद इसमें निश्चित मात्रा में गरम तेल डालकर उसे अच्छी तरह फेंटा जाता है।
तेल की सही मात्रा और घोल का घनत्व
इस पूरी प्रक्रिया में माप का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पूरे बैटर के लिए लगभग 1 से 2 चम्मच गरम तेल ही काफी माना जाता है। बहुत अधिक तेल डालने से फायदे की जगह बैटर का संतुलन बिगड़ सकता है। तेल मिलाने के बाद घोल को अच्छी तरह फेंटना आवश्यक है ताकि उसमें हवा भर सके। बैटर न तो बहुत अधिक पतला होना चाहिए और न ही इतना गाढ़ा कि उसकी सही आकृति बनाना मुश्किल हो जाए। एक सही बैटर वह होता है जो छूने में हल्का और फूला हुआ महसूस हो।
तेल का तापमान और फ्राइंग की तकनीक
कई बार लोग शिकायत करते हैं कि उनके वड़े बहुत अधिक तेलीय हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण कड़ाही में तेल का गलत तापमान होना है। यदि तेल पर्याप्त गरम नहीं है, तो बैटर उसमें ज्यादा देर तक रहेगा और अधिक तेल सोख लेगा। वहीं, बहुत ज्यादा खौलते तेल में डालने से बाहरी परत तुरंत भूरी हो जाती है जबकि अंदर का हिस्सा कच्चा रह जाता है। इसलिए मध्यम से मध्यम-तेज आंच पर तेल को संतुलित रखना बेहद जरूरी होता है। इसके अलावा, एक साथ बहुत सारे वड़े कड़ाही में डालने से भी तेल का तापमान अचानक गिर सकता है, जिससे वे ऑयली हो जाते हैं।
बैटर की कंसिस्टेंसी परखने का आसान तरीका
दाल पीसते समय एक साथ बहुत सारा पानी डालने से बचना चाहिए। पानी हमेशा थोड़ा-थोड़ा करके ही मिलाना चाहिए ताकि बैटर नियंत्रण में रहे। अगर मिश्रण ज्यादा पतला हो जाता है, तो वड़ों को गोल आकार देने में परेशानी आती है और तलते वक्त उनका रूप भी बिगड़ सकता है। इसकी जांच करने के लिए आप बैटर की एक छोटी बूंद पानी में डालकर देख सकते हैं। यदि वह तुरंत फैलने के बजाय कुछ सेकंड तक अपनी आकृति बनाए रखती है, तो समझ लीजिए कि बैटर की कंसिस्टेंसी बिल्कुल सही है।
स्वाद बढ़ाने के लिए जरूरी सावधानियां
वड़े के मिश्रण में हरी मिर्च, अदरक और करी पत्ता मिलाने से इसकी खुशबू और स्वाद दोनों में इजाफा होता है। कुछ लोग इसमें बारीक कटा हुआ प्याज डालना भी पसंद करते हैं। हालांकि, यदि आप एकदम कुरकुरे मेदु वड़े चाहते हैं, तो बैटर को बहुत अधिक चीजों से भारी करने से बचना चाहिए। यह छोटी सी देसी तकनीक कोई जादुई नुस्खा नहीं है, लेकिन यदि इसे सही तापमान और सही घोल के साथ आजमाया जाए, तो घर पर ही बाजार जैसे शानदार वड़े तैयार किए जा सकते हैं।



















