भारत में विवाह समारोह केवल सात फेरों और वरमाला तक ही सीमित नहीं रहते हैं, बल्कि देश के विभिन्न प्रांतों और समाजों में तमाम ऐसी प्राचीन प्रथाएं भी निभाई जाती हैं जिनके पीछे गहरी आस्था और मान्यताएं जुड़ी होती हैं। ऐसा ही एक अनूठा और दिलचस्प रिवाज पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में होने वाली पारंपरिक मैतेई शादियों के दौरान देखने को मिलता है। इस अनूठी रस्म के तहत विवाह के समय दो मछलियों को पानी के हवाले किया जाता है और इसके बाद इस बात पर बारीकी से नजर रखी जाती है कि वे किस दिशा में तैर रही हैं।
Nga Thaba रस्म का पूरा स्वरूप
मणिपुर की संस्कृति में इस खास परंपरा को Nga Thaba के नाम से जाना जाता है। इस अनुष्ठान के दौरान दो जीवित मछलियों को किसी नजदीकी तालाब, पोखरे या अन्य जलस्रोत में छोड़ा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में परिवार की बुजुर्ग और अन्य महिलाएं बहुत अहम भूमिका निभाती हैं। अध्ययन और लोक मान्यताओं के अनुसार, इस रस्म में इस्तेमाल की जाने वाली ये मछलियां विशेष रूप से Ngamu यानी Channa प्रजाति की होती हैं। इन जल जीवों को सीधे तौर पर दूल्हा और दुल्हन के रूप में देखा जाता है, जो उनके आने वाले जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मछलियों के तैरने के तरीके से तय होता है शगुन
इस पूरी प्रथा का सबसे आकर्षक और उत्सुकता पैदा करने वाला हिस्सा इसके बाद शुरू होता है। जब पानी में मछलियों को छोड़ा जाता है, तो वहां मौजूद सभी लोग उनके तैरने के तौर-तरीकों और दिशा का आकलन करते हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, यदि दोनों मछलियां पानी में एक-दूसरे के करीब या साथ-साथ तैरती नजर आती हैं, तो इसे नवविवाहित जोड़े के लिए एक बेहद शुभ और सकारात्मक संकेत माना जाता है। इस स्थिति को पति और पत्नी के बीच आपसी तालमेल, अटूट साथ और एक खुशहाल वैवाहिक जीवन की भविष्यवाणियों से जोड़ा जाता है।
अलग-अलग दिशा में जाने का क्या है अर्थ
इसके विपरीत, लोक कथाओं और परंपराओं के जानकारों का यह भी कहना है कि यदि छोड़ी गई दोनों मछलियां पानी में उतरते ही विपरीत या अलग-अलग दिशाओं में तैरने लगें, तो इसे अच्छा नहीं माना जाता था। इस तरह की पारंपरिक सोच में इसे भविष्य के जीवन में पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ने या अलगाव की आशंका के रूप में देखा जाता है। हालांकि, समाज के बुद्धिजीवी यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह पूरी तरह से एक लोक मान्यता है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अलग-अलग जगहों और स्रोतों पर इस रीति को निभाने के तौर-तरीकों और उसकी व्याख्या में थोड़ा बहुत अंतर भी देखने को मिल सकता है।
परंपरा का मुख्य संदेश और महत्व
इस तरह की प्रथाओं को केवल भविष्य बताने वाला यंत्र मान लेना पूरी तरह सही नहीं होगा। इस रस्म के पीछे का मुख्य भाव यह है कि पानी में छोड़ी जाने वाली दो मछलियां जोड़े के प्रतीक के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनका एक साथ पानी में आगे बढ़ना इस बात की कामना है कि नए जोड़े का जीवन भी ऐसा ही सुगम और आपसी सहमति से भरा हो। यही कारण है कि मणिपुर की यह अनोखी वैवाहिक परंपरा आज भी अपनी विशिष्टता के कारण काफी चर्चा में बनी रहती है और लोगों के बीच खासी आकर्षण का केंद्र होती है।



















