घर के आंगन या बालकनी में लगा मोगरे का पौधा यदि केवल पत्तियां और शाखाएं बढ़ा रहा हो मगर उस पर फूल न आ रहे हों, तो यह केवल पोषक तत्वों के अभाव का मामला नहीं होता। अक्सर पौधे को जरूरत के अनुसार धूप नहीं मिल पाती, गमले में आवश्यकता से अधिक पानी रुकने लगता है, अथवा सही वक्त पर सूखी टहनियों की कटाई-छंटाई नहीं की जाती। इस तरह की कमियों के चलते नई कलियों का बनना धीमा पड़ जाता है। बागवानी विशेषज्ञ चेतना भल्ला के अनुसार, कुछ बुनियादी बागवानी नियमों का पालन करके मोगरे की धीमी बढ़त को सुधारा जा सकता है और पौधे को फूलों से महकाया जा सकता है।
धूप की सही अवधि और सीधी दोपहर से बचाव
मोगरे के पौधे की उचित बढ़त के लिए भरपूर प्राकृतिक रोशनी सबसे बुनियादी जरूरत मानी जाती है। चेतना भल्ला के अनुसार, इस पौधे को प्रतिदिन तकरीबन 6 से 8 घंटे की धूप मिलना आवश्यक है। रोशनी की कमी होने पर पौधा ऊपर की तरफ खिंचकर लंबा तो दिखाई देने लगता है, लेकिन कलियां बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि पौधे को दोपहर की अत्यंत तीखी और झुलसा देने वाली धूप से सुरक्षित रखा जाए, क्योंकि अत्यधिक गर्मी पत्तियों और नई कलियों को मुरझा सकती है।
गमले का आकार और जल निकासी की व्यवस्था
पौधे को लगाने के लिए 12 से 14 इंच माप का मिट्टी का गमला सर्वोत्तम माना गया है। प्लास्टिक के मुकाबले मिट्टी के बर्तन हवा और नमी के संतुलन को बेहतर बनाए रखते हैं। गमले के तल में जल निकासी के लिए उचित छेद होना अनिवार्य है। यदि पानी देर तक मिट्टी के भीतर ठहरा रहेगा, तो जड़ें सड़ने का खतरा पैदा हो जाता है, जिससे पौधे का संपूर्ण विकास बाधित हो जाता है।
पौधारोपण के समय मिट्टी और पोषण का मिश्रण
नया पौधा लगाते वक्त मिट्टी की बनावट पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। प्रारंभिक चरण में 60 प्रतिशत मोटी मिट्टी, 30 प्रतिशत वर्मीकंपोस्ट तथा 10 प्रतिशत परलाइट का मिश्रण तैयार करना चाहिए। यह बनावट जड़ों तक हवा पहुंचाने में मदद करती है। पौधा रोपते समय उसकी जड़ों में थोड़ा एलोवेरा जेल और एक चुटकी हल्दी लगाने का सुझाव दिया गया है, जो प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
बड़े पौधे के लिए पोषक तत्वों का संतुलन
जब मोगरे का पौधा स्थापित होकर थोड़ा बड़ा हो जाए, तो उसके पोषण चक्र को बदलने की आवश्यकता होती है। ऐसे पौधे के लिए 40 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत कंपोस्ट, 20 प्रतिशत रेत या धान की भूसी (राइस हस्क) और 10 प्रतिशत बोन मील का मिश्रण उपयोगी रहता है। यदि किसी कारणवश बोन मील उपलब्ध न हो, तो उसकी जगह रॉक फॉस्फेट और सरसों की खली का विकल्प इस्तेमाल में लाया जा सकता है। यह मिश्रण फास्फोरस और जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है।
सिंचाई का सही नियम और अधिक पानी से बचाव
मोगरे को जरूरत से ज्यादा सींचना उसके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। बारंबार पानी डालने से गमले की सतह के नीचे लगातार गीलापन बना रहता है, जिससे जड़ों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी की जांच करना जरूरी है। जब गमले की ऊपरी लगभग 2 इंच की परत छूने पर सूखी महसूस होने लगे, केवल तभी पौधे को दोबारा पानी देना चाहिए।
प्याज के छिलके की खाद, एप्सम सॉल्ट और छंटाई
यदि पौधा हरा-भरा होने के बावजूद फूल देने में असमर्थ है, तो प्राकृतिक पोषण और प्रूनिंग पर ध्यान देना चाहिए। चेतना भल्ला ने घरेलू स्तर पर प्याज के छिलकों से तैयार खाद और एप्सम सॉल्ट के उपयोग की सिफारिश की है। इन दोनों का प्रयोग प्रत्येक 15 दिन के अंतराल पर करने की सलाह दी गई है। किसी भी प्रकार की खाद डालने के लिए शाम का समय सबसे अनुकूल होता है; तेज धूप के दौरान खाद देने से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा, जैसे ही फूल सूखने लगें, उन्हें तुरंत शाखा से काटकर अलग कर देना चाहिए। सूखे फूलों को हटाने से पौधा अपनी ऊर्जा नई शाखाओं और नई कलियों को विकसित करने में लगाने लगता है।



















