भारत में दिवाली पर्व की औपचारिक शुरुआत धनतेरस से होती है और इस पावन अवसर पर कीमती धातुओं की खरीद को बेहद शुभ माना जाता है। लंबे समय से यह परंपरा चली आ रही है कि धनतेरस के दिन सोना और चांदी घर लाने से समृद्धि, सुरक्षा और वित्तीय संपन्नता आती है। हालांकि जनवरी 2026 के अंत में बने अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से सोने की कीमतों में 23 प्रतिशत और चांदी में 56 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, लेकिन यदि दीर्घकालिक नजरिए से देखा जाए तो पिछले पांच सालों में धनतेरस दर धनतेरस सोने ने लगभग 175 प्रतिशत का जोरदार रिटर्न दिया है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के मौजूदा भाव
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट शुद्धता वाला सोना 1,37,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। इसी प्रकार 22 कैरेट सोने की दर 1,26,200 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। दूसरी ओर, 999 शुद्धता वाली चांदी का हाजिर भाव 1,80,080 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है।
एटर्नज के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि साल 2022 से 2025 के बीच इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की दरों के आधार पर सोने के भाव में 158.8 प्रतिशत का जबर्दस्त उछाल आया था। रुपये के लिहाज से यह बढ़ोतरी प्रति 10 ग्राम पर 79,522 रुपये रही थी। इसी अवधि में चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया और इसके भाव में प्रति किलोग्राम 1,13,675 रुपये यानी 204.6 प्रतिशत की भारी तेजी दर्ज की गई थी।
पांच धनतेरस के दौरान सोने और चांदी का ऐतिहासिक सफर
बीते पांच वर्षों में प्रत्येक धनतेरस पर कीमती धातुओं के दाम लगातार बढ़ते रहे हैं। 21 अक्टूबर 2022 को धनतेरस के दिन 24 कैरेट सोना 50,062 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 45,857 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जबकि चांदी की कीमत 55,555 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसके बाद 10 नवंबर 2023 को धनतेरस पर 24 कैरेट सोना बढ़कर 60,240 रुपये और 22 कैरेट सोना 55,180 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, वहीं चांदी 70,416 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। यानी इस एक साल में सोने में 20.33 प्रतिशत और चांदी में करीब 27 प्रतिशत की तेजी आई थी।
इसके बाद 29 अक्टूबर 2024 को धनतेरस के मौके पर 24 कैरेट सोने का भाव 78,745 रुपये और 22 कैरेट का भाव 72,130 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज हुआ, जबकि चांदी 97,873 रुपये प्रति किलोग्राम तक चढ़ गई। यह वार्षिक आधार पर सोने में 30.72 प्रतिशत और चांदी में 38.99 प्रतिशत की बढ़त थी। धातुओं के लिए सबसे शानदार दौर 2024 से 2025 के बीच रहा। 17 अक्टूबर 2025 को धनतेरस पर 24 कैरेट सोना 1,29,584 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,18,699 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1,69,230 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज हुई। इस दौरान सोने में 64.56 प्रतिशत और चांदी में 72.91 प्रतिशत की भारी वार्षिक वृद्धि देखने को मिली थी।
साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर को है, इसलिए 2 नवंबर के दरों के आधार पर गणना की गई है। सोमवार 2 नवंबर 2026 को 24 कैरेट सोने का भाव 1,37,770 रुपये, 22 कैरेट का भाव 1,26,200 रुपये और चांदी का भाव 1,80,080 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। वार्षिक आधार पर 2025 से 2026 के बीच सोने में 6.32 प्रतिशत और चांदी में 6.41 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो बीते पांच सालों में सबसे धीमी वार्षिक वृद्धि रही है।
उच्चतम स्तर से भारी गिरावट और वजहें
हालांकि पांच साल का कुल रिटर्न काफी आकर्षक रहा है, लेकिन हाल के महीनों में धातुओं में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। 29 जनवरी 2026 को 24 कैरेट सोने ने 1,78,850 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 4,10,000 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर छू लिया था। इसके बाद दोनों धातुओं में तेज गिरावट आई। इस भारी करेक्शन का मुख्य कारण ऊर्जा लागत में अप्रत्याशित वृद्धि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और महंगाई के बढ़ते दबाव रहे हैं। इन परिस्थितियों ने केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी का सिलसिला फिर शुरू करने पर मजबूर किया। जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तब सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों की चमक फीकी पड़ जाती है क्योंकि निवेशक निश्चित आय वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
एक लाख रुपये के निवेश पर कितना हुआ मुनाफा
यदि किसी निवेशक ने 2022 के धनतेरस पर सोने या चांदी में 1,00,000 रुपये का निवेश किया होता, तो आज उसकी संपत्ति में भारी वृद्धि हो चुकी होती। 2022 की कीमतों पर 1 लाख रुपये में 19.98 ग्राम 24 कैरेट सोना, 21.81 ग्राम 22 कैरेट सोना या 1.80 किलोग्राम चांदी खरीदी जा सकती थी।
साल 2025 के धनतेरस तक इस 1 लाख रुपये के 24 कैरेट या 22 कैरेट सोने का मूल्य बढ़कर 2,58,842 रुपये हो गया था, जिससे 1,58,842 रुपये का शुद्ध लाभ यानी 158.84 प्रतिशत का कुल रिटर्न मिला था। वहीं 1.80 किलोग्राम चांदी की कीमत 2025 में बढ़कर 3,04,614 रुपये हो गई थी, जो 2,04,614 रुपये का शुद्ध मुनाफा यानी 204.61 प्रतिशत का लाभ दर्शाता है।
यदि इस निवेश को 2 नवंबर 2026 तक बरकरार रखा गया, तो 24 कैरेट और 22 कैरेट दोनों श्रेणियों में 1 लाख रुपये का सोना बढ़कर 2,75,204 रुपये हो गया, जिससे 175.20 प्रतिशत का कुल रिटर्न मिला। वहीं चांदी में लगाया गया 1 लाख रुपये बढ़कर 3,24,146 रुपये पर पहुंच गया, जो 224.15 प्रतिशत का जबर्दस्त मुनाफा दर्शाता है। इस प्रकार लंबी अवधि में चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया।
धनतेरस पर सोना खरीदने का महत्व और बाजार का रुख
सोने को विशुद्ध धातु माना जाता है, इसलिए इसे आत्मिक शांति और पवित्रता का प्रतीक समझा जाता है। इसके अलावा सोने का सीधा संबंध धन-दौलत से है, क्योंकि कीमती होने के कारण इसमें निवेश करने से घर में समृद्धि और खुशहाली आने की धार्मिक मान्यता है। दिवाली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, इसलिए सोने को नकारात्मकता से सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, त्योहारी और आगामी शादियों के मौसम में प्रवेश करते ही आभूषणों की मौसमी मांग में मजबूती आ रही है। हाल के महीनों में कीमतों में आए करेक्शन से खरीदारों को काफी सहारा मिला है। खुदरा विक्रेता मांग पूरी करने के लिए अपनी इन्वेंट्री बढ़ा रहे हैं, जिससे आभूषण निर्माताओं के पास मजबूत ऑर्डर आ रहे हैं। दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही में भी सुधार देखा जा रहा है। प्रचार गतिविधियों के साथ-साथ ज्वैलर्स अब नए डिजाइनों और हल्के वजन वाले आभूषणों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, ताकि लोग दैनिक जीवन में भी इन्हें आसानी से पहन सकें।



















