ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की बेटी जहरा पेजेशकियन ने हाल ही में अपने पति हसन मजीदी के साथ ब्रिक्स बाजार का भ्रमण किया। इस सांस्कृतिक प्रदर्शनी में विभिन्न देशों के पारंपरिक उत्पादों की भरमार थी, लेकिन ईरानी स्टॉल पर रखी एक विशिष्ट हस्तनिर्मित शॉल ने उनका ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। उन्होंने इस शॉल की बारीक बुनाई और पारंपरिक कलात्मकता से प्रभावित होकर इसे खरीद लिया। पहली नजर में यह शॉल भले ही एक साधारण पहनावा प्रतीत हो, लेकिन इसकी बनावट और कलात्मक पैटर्न में ईरान की सदियों पुरानी टेक्सटाइल परंपरा की गहरी छाप समाहित है।
ईरानी कढ़ाई कला रश्ती-दूजी का ऐतिहासिक महत्व
इस शॉल की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशेष कढ़ाई शैली है, जिसे रश्ती-दूजी के नाम से जाना जाता है। यह हस्तशिल्प कला ईरान के उत्तरी क्षेत्र में स्थित गिलान प्रांत और विशेष रूप से रश्त शहर की पहचान मानी जाती है। रश्ती-दूजी को फारसी टेक्सटाइल उद्योग में सबसे जटिल और प्रतिष्ठित तकनीकों में गिना जाता है। इस कला के माध्यम से कपड़े पर प्राकृतिक दृश्यों, पक्षियों, बेल-बूटों और ज्यामितीय डिजाइनों को बेहद सुंदरता के साथ उकेरा जाता है। सदियों से रश्त शहर के कारीगर इस विद्या को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजते आ रहे हैं।
माहूत कपड़े और हुक से चेन स्टिच तैयार करने की तकनीक
रश्ती-दूजी तकनीक की निर्माण प्रक्रिया अत्यंत श्रमसाध्य और धैर्य की मांग करती है। इस शॉल के निर्माण के लिए आधार के रूप में माहूत नामक मोटे ऊनी कपड़े का उपयोग किया जाता है। इसके बाद कलाकार रंग-बिरंगे रेशमी धागों की मदद से इस पर हाथ की कारीगरी करते हैं। कढ़ाई के लिए एक विशेष धातु के हुक का उपयोग किया जाता है, जिसे कपड़े के आर-पार ले जाकर रेशम के धागे की छोटी-छोटी लूप बनाई जाती हैं। इन लूपों के निरंतर संयोजन से एक मजबूत और सुंदर चेन स्टिच तैयार होती है। कारीगर सबसे पहले कपड़े पर मूल डिजाइन को चिन्हित करते हैं और उसके बाद पूरे कपड़े पर बारीक कढ़ाई का काम पूरा करते हैं। इस शॉल में भी एक बड़ा केंद्रीय पैटर्न बनाया गया है, जिसके चारों तरफ सुंदर बॉर्डर और कोनों की सजावट की गई है।
फारसी कालीन और सांस्कृतिक रूपांकन की झलक
इस शॉल में लाल, काले और क्रीम रंगों का बहुत ही संतुलित और आकर्षक प्रयोग किया गया है। शॉल पर उकेरे गए बारीक फूलों और लताओं के पैटर्न पारंपरिक फारसी कला के प्रतीकात्मक स्वरूप हैं। इस तरह के डिजाइन फारसी संस्कृति में प्रकृति, उद्यानों और जीवन की समृद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस शॉल का दृश्य स्वरूप काफी हद तक ईरान के प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कालीनों की याद दिलाता है। फारसी कालीनों में जिस प्रकार सममित आकृतियों और बेल-बूटों का बारीक समन्वय होता है, वही सुंदरता इस शॉल में भी देखने को मिलती है। ईरान लंबे समय से अपने बेहतरीन कालीनों, रेशमी वस्त्रों और हाथ से बने सजावटी परिधानों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध रहा है, और यह शॉल उसी समृद्ध कलात्मक विरासत की एक जीवंत मिसाल है।



















