होटल के कमरों से बाहर निकलकर पूल के नीले पानी में वक्त बिताना ज्यादातर सैलानियों और तैराकी के शौकीनों के लिए सबसे सुकून भरा अनुभव माना जाता है। छुट्टी मनाने गए परिवार हों या दफ्तर की थकान मिटाने वाले कामकाजी लोग, हर कोई स्विमिंग पूल की तरफ खिंचा चला आता है। लेकिन सतह पर शांत दिखने वाला यही पानी कई बार छिपे हुए जानलेवा खतरों का केंद्र बन जाता है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित कॉनराड होटल के परिसर में हाल ही में दो विदेशी नागरिकों की जान जाने का मामला सामने आया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में पुलिस की प्राथमिक तफ्तीश पानी के भीतर विद्युत करंट फैलने की आशंका पर टिकी है। हालांकि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने के लिए संबंधित तकनीकी टीमों की गहन पड़ताल और अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
होटल प्रबंधन ने भी अपनी ओर से यही पक्ष रखा है कि अभी तक हादसे की सटीक वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है और वे प्रशासन की जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग दे रहे हैं। यह दर्दनाक वाकया साफ तौर पर आगाह करता है कि पानी में उतरना केवल तैरने की कला सीखने तक सीमित नहीं है। पूल के आसपास इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरण, पंपिंग तंत्र, प्रशिक्षित लाइफगार्ड की तैनाती, जीवनरक्षक साधन और पानी का रासायनिक संतुलन भी इंसान की हिफाजत के लिए उतने ही बुनियादी घटक हैं।
बेंगलुरु के फाइव स्टार होटल में क्या घटा था
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार, 30 अक्टूबर की शाम को इस लक्जरी होटल के तरणताल में एक अप्रत्याशित संकट पैदा हुआ। इस दर्दनाक घटनाक्रम में जर्मनी के 57 वर्षीय नागरिक अलेक्जेंडर मैक्सिमिलियन थीस और स्लोवाकिया के 45 वर्षीय जुराज होरवात को अपनी जान गंवानी पड़ी। जब दोनों को बचाने की कोशिशें शुरू हुईं, तो उस दौरान वहां मौजूद एक अमेरिकी अतिथि और होटल स्टाफ का एक सदस्य भी चपेट में आकर जख्मी हो गए। पुलिस ने घटनास्थल को सील करके जरूरी तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं और हादसे के मूल कारणों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ताओं का स्पष्ट मानना है कि पूरी तकनीकी समीक्षा पूरी होने से पहले किसी विशेष उपकरण या वायरिंग को अंतिम तौर पर जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी, इसलिए इसे वर्तमान में संदिग्ध विद्युत प्रवाह की घटना मानकर ही आगे बढ़ा जा रहा है।
तरणताल के पानी में कैसे फैल सकता है करंट का प्रवाह
आधुनिक स्विमिंग पूल केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं होते, बल्कि उनमें पानी को घुमाने वाले विशाल पंप, रात में चमकने वाली अंडरवाटर लाइटें और सफाई की स्वचालित प्रणालियां लगातार चलती रहती हैं। यह पूरा ढांचा बिजली पर निर्भर करता है। यदि पानी के नीचे लगी लाइटों की सीलिंग कमजोर पड़ जाए, तारों का इंसुलेशन कट जाए या अर्थिंग और फॉल्ट प्रोटेक्शन सर्किट में खराबी आ जाए, तो पूरा पानी एक विशाल कंडक्टर में तब्दील हो सकता है। अमेरिकी उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा आयोग की सुरक्षा गाइडलाइंस भी रेखांकित करती हैं कि पानी के आसपास लगे समस्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का नियमित तकनीकी मुआयना अनिवार्य है। किसी भी सूरत में मोबाइल चार्जर, खुले बिजली के बोर्ड या पोर्टेबल उपकरण पानी की सीमा के पास नहीं रखे जाने चाहिए। पानी चाहे कितना भी पारदर्शी या साफ क्यों न दिखे, नंगी आंखों से उसमें करंट की मौजूदगी भांपना नामुमकिन है, इसलिए केवल प्रमाणित तकनीशियनों द्वारा की गई नियमित जांच ही सुरक्षा की गारंटी दे सकती है।
शरीर में सिहरन या कंपन महसूस हो तो बरतें तत्परता
अगर आप पानी में तैर रहे हैं और अचानक उंगलियों में झनझनाहट, मांसपेशियों में अकड़न या हाथ-पैर हिलाने में अप्रत्याशित भारीपन लगे, तो इसे मांसपेशियों की सामान्य ऐंठन समझने की भूल कभी न करें। इसके अलावा अगर पूल के भीतर लगी लाइटें अचानक टिमटिमाने लगें, पानी में अजीब हलचल दिखे या साथ तैर रहा कोई व्यक्ति अचानक स्तब्ध और असहाय नजर आए, तो तत्काल सतर्क हो जाएं। ऐसे किसी भी संदेह पर तुरंत तेज आवाज लगाकर किनारे पर मौजूद लाइफगार्ड्स और सुरक्षा कर्मियों को आगाह करें। जो लोग बाहर हैं, उन्हें पानी से दूर सूखी जगह पर खड़े होकर मुख्य बिजली स्विच को बंद करना चाहिए। सबसे अहम नियम यह है कि करंट के संदेह में किसी को बचाने के लिए खुद पानी में छलांग न लगाएं, क्योंकि ऐसा करने से बचाने वाला व्यक्ति भी उसी क्षण लकवाग्रस्त होकर डूब सकता है।
तैरने की महारत के बावजूद अकेले पानी में जाने से बचें
बहुत से लोग यह मान बैठते हैं कि अगर उन्हें बहुत अच्छी तैराकी आती है, तो उनके लिए कोई जोखिम नहीं है। यह सच है कि तैराकी का हुनर डूबने की संभावना घटाता है, मगर यह दिल के दौरे, अचानक आई ऐंठन या उपकरण की खराबी से पूरी सुरक्षा नहीं दे सकता। इसलिए सुरक्षित तरीका यही है कि हमेशा किसी साथी के साथ पानी में जाएं और ऐसे पूल को प्राथमिकता दें जहां प्रशिक्षित लाइफगार्ड हर वक्त किनारे पर मुस्तैद हों। कई तैराक पानी के नीचे ज्यादा देर सांस रोकने की बाजी लगाते हैं या उतरने से पहले तेजी से गहरी सांसें लेते हैं, जिसे हाइपरवेंटिलेशन कहा जाता है। यह अभ्यास पानी के भीतर अचानक बेहोशी का सबब बन सकता है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी के आंकड़े बताते हैं कि डूबने की प्रक्रिया इतनी खामोश और तेज होती है कि पीड़ित को कुछ ही सेकंड में होश खोने से पहले चीखने या मदद मांगने का मौका तक नहीं मिल पाता।
बच्चों पर हर पल नजर रखें और फ्लोटर्स पर न रहें निर्भर
पारिवारिक छुट्टियों के दौरान अक्सर अभिभावक बच्चों को पानी में उतारकर खुद स्मार्टफोन में मग्न हो जाते हैं या आपस में गपशप करने लगते हैं। यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। छोटे बच्चों या नौसिखिया तैराकों के साथ हमेशा एक जिम्मेदार वयस्क का पानी में मौजूद रहना अनिवार्य है। भले ही वहां पेशेवर लाइफगार्ड निगरानी कर रहा हो, लेकिन माता-पिता का निजी दायित्व कभी खत्म नहीं होता। बाजार में मिलने वाले हवा भरे प्लास्टिक के खिलौने, आर्मबैंड या फ्लोटिंग ट्यूब केवल खेल की चीजें हैं, वे प्रमाणित लाइफ जैकेट का विकल्प नहीं हैं। बच्चे अगर तैरना सीख भी चुके हों, तब भी नजरें एक पल के लिए भी उनसे नहीं हटनी चाहिए। इसके साथ ही, जब पूल का उपयोग बंद हो, तो उसके चारों तरफ ऐसे सुरक्षा बैरियर या दरवाजे होने चाहिए जिससे छोटे बच्चे खेलते-खेलते अनजाने में पानी तक न पहुंच सकें।
दूषित पानी और बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण से बचाव
पानी की सुरक्षा सिर्फ डूबने या करंट तक सीमित नहीं होती, बल्कि अदृश्य सूक्ष्मजीव भी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर तरणताल का पानी सही ढंग से फिल्टर और ट्रीट न किया गया हो, तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया पेट की गंभीर गड़बड़ियों और उल्टी-दस्त का कारण बन सकते हैं। हालांकि पानी में मिलाई जाने वाली क्लोरीन कई रोगाणुओं को खत्म करती है, लेकिन कुछ परजीवी और जिद्दी कीटाणु खत्म होने में लंबा वक्त लेते हैं। तैराकों को हिदायत दी जाती है कि पानी को किसी भी हाल में निगलने से बचें और अगर पेट खराब हो तो दूसरों की हिफाजत के लिए पानी में न उतरें। पूल में जाने से ठीक पहले शावर लेना शरीर की धूल और पसीने को दूर रखता है। यदि तैरते वक्त आंखों में असहनीय चुभन होने लगे या त्वचा पर खुजली शुरू हो, तो तुरंत बाहर आएं। पानी का पीएच स्तर और क्लोरीन की सटीक मात्रा संतुलित बनाए रखना होटल या क्लब प्रबंधन का कानूनी कर्तव्य है।
गहराई के संकेतक और सक्शन ड्रेन की बनावट जांचें
तरणताल में कदम रखने से पहले उसकी तली पर नजर डालें। पानी इतना पारदर्शी होना चाहिए कि सबसे गहरे छोर पर भी फर्श और ड्रेनेज ग्रिल एकदम साफ नजर आए। अगर पानी मटमैला या धुंधला है, तो गहराई में किसी संकटग्रस्त तैराक को बाहर से देख पाना नामुमकिन हो जाता है। पूल की दीवारों पर अंकित गहराई के अंकों को ध्यान से पढ़ें और अपनी क्षमता के हिसाब से ही आगे बढ़ें। सबसे बड़ा खतरा कई बार पूल के तलहटी में लगे सक्शन ड्रेन से होता है, जो पानी को तेजी से फिल्टर की तरफ खींचता है। इस हिस्से के पास बच्चों को कभी न जाने दें। यदि ड्रेन का जालीदार कवर टूटा हुआ है, अपनी जगह से हटा है या ढीला पड़ा है, तो पानी में कतई न उतरें और कर्मचारियों को सचेत करें। सक्शन खिंचाव इतना शक्तिशाली हो सकता है कि तैराक के लंबे बाल, तैरने की पोशाक या शरीर का कोई हिस्सा उसमें फंसकर उसे सतह पर आने से रोक सकता है।
नशे और सुस्ती पैदा करने वाली दवाओं से रहें दूर
पूल पार्टी या मौज-मस्ती के दौरान अल्कोहल का सेवन करके पानी में उतरना एक बेहद जोखिम भरा कदम है। शराब दिमाग की निर्णय लेने की क्षमता, पानी की गहराई के आकलन और मांसपेशियों के समन्वय को कमजोर कर देती है। ठीक इसी तरह, सर्दी, एलर्जी या दर्द की ऐसी दवाएं जिनका असर सुस्ती या चक्कर लाने वाला होता है, तैराकी के दौरान घातक साबित हो सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति को मिर्गी, दिल की बीमारी या रक्तचाप से जुड़ी पुरानी बीमारी है, तो उसे पानी में जाने से पहले चिकित्सक की स्पष्ट सलाह लेनी चाहिए। किसी भी तैराक को अगर पानी के भीतर हल्का सा भी चक्कर, सांस फूलना या अस्वस्थता का अहसास हो, तो बहादुरी दिखाने के बजाय तुरंत बाहर निकल आना ही बुद्धिमानी है।


















