ऑस्ट्रेलिया में सेकेंड-हैंड सामान बेचने वाली एक प्रमुख चैरिटी संस्था को फटे हुए कपड़े को भारी कीमत पर बेचने की कोशिश के बाद जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद संस्था को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। पूरा विवाद सिडनी के सरी हिल्स इलाके में स्थित विनीज स्टोर से सामने आया, जहां ग्राहकों ने 16 डॉलर की कीमत पर एक फटी हुई टी-शर्ट बिक्री के लिए रखी देखी।
फटी लकॉस्ट पोलो शर्ट पर मचा हंगामा
सिडनी के सरी हिल्स स्थित विनीज स्टोर में खरीदारी करने पहुंचे लोगों की नजर एक नीले रंग की सेकेंड-हैंड लकॉस्ट पोलो टी-शर्ट पर पड़ी। इस टी-शर्ट पर 16 डॉलर (लगभग 1,350 भारतीय रुपये) का प्राइस टैग लगाया गया था। जब ग्राहकों ने कपड़े को ध्यान से देखा, तो उसमें एक बड़ा सा छेद नजर आया। दान में मिले फटे-पुराने कपड़े को इतनी अधिक कीमत पर बेचे जाने को लेकर ग्राहकों में भारी नाराजगी फैल गई और उन्होंने चैरिटी स्टोर की व्यावसायिक मानसिकता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
चैरिटी स्टोर ने माना गलती, मांगी सार्वजनिक माफी
सोशल मीडिया पर शुरू हुई तीखी आलोचना और ग्राहकों के विरोध को देखते हुए विनीज प्रबंधन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। संस्था के प्रवक्ता ने माना कि यह फटी टी-शर्ट कभी भी बिक्री के लिए डिस्प्ले रैक पर नहीं आनी चाहिए थी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि हर साल उनकी संस्था के पास लाखों की संख्या में कपड़े दान के रूप में आते हैं। कर्मचारियों द्वारा जांच के दौरान यह फटी टी-शर्ट गलती से छूट गई थी। संस्था ने इस लापरवाही के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और उस विवादित टी-शर्ट को तुरंत स्टोर से हटा दिया है।
सेकेंड-हैंड सामानों के मनमाने दामों पर उठे सवाल
चैरिटी स्टोर पर ज्यादा कीमत वसूलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। ग्राहकों का कहना है कि जब चैरिटी संस्थाओं को सभी सामान लोगों से मुफ्त दान में मिलते हैं, तो फिर सेकेंड-हैंड चीजों के मनमाने दाम क्यों वसूले जा रहे हैं। कुछ ग्राहकों ने अपने पिछले अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि स्टोर में जूतों के तलवों पर कीचड़ जमा होने के बावजूद उनकी कीमत 30 डॉलर रखी गई थी। इसी तरह एक इस्तेमाल की गई गंदी बोतल 8 डॉलर में बेची जा रही थी, जिसकी स्ट्रॉ बेहद गंदी थी, जबकि वैसी ही नई बोतल 12 डॉलर में मिल जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब चैरिटी स्टोर्स से सेकेंड-हैंड सामान खरीदने की तुलना में केमार्ट या टारगेट जैसे बड़े रिटेल स्टोर्स से नया सामान खरीदना ज्यादा किफ़ायती साबित हो रहा है।



















