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देहरादून के स्कूल में 6 साल की उम्र में पड़ी थीं 10 छड़ियां, क्लास टॉपर अर्चना पूरन सिंह ने याद किए शुरुआती दिनटीवी
29 जुल॰ 2026, 3:00 am (91 दिन पहले)· 1

देहरादून के स्कूल में 6 साल की उम्र में पड़ी थीं 10 छड़ियां, क्लास टॉपर अर्चना पूरन सिंह ने याद किए शुरुआती दिन

लोकप्रिय अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह ने अपने बचपन के स्कूल के दिनों को याद करते हुए एक दर्दनाक सजा का खुलासा किया है। 6 साल की उम्र में 10 छड़ियां खाने के बावजूद वह अपनी कक्षा में हमेशा टॉप करती थीं।

मशहूर अभिनेत्री, टीवी होस्ट और यूट्यूब व्लॉगर अर्चना पूरन सिंह ने अपने बचपन और स्कूल के दिनों से जुड़ी कई पुरानी यादें साझा की हैं। फीवर एफएम के साथ एक खास बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी प्रिंसिपल ऑफिस में बुलाया गया था, तो उन्होंने 6 साल की उम्र में मिली एक बेहद सख्त सजा का जिक्र किया। प्रथम कक्षा में पढ़ते समय घटित इस घटना का दर्द और अहसास इतने सालों बाद भी उनके मन में पूरी तरह ताजा है।

6 साल की उम्र में 10 छड़ियों की सजा और कॉन्वेंट का अनुशासन

अर्चना पूरन सिंह ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई उत्तराखंड के देहरादून स्थित एक कॉन्वेंट स्कूल में हुई थी। जब वह महज 6 साल की थीं और पहली कक्षा में पढ़ती थीं, तब उन्हें हैड नन के दफ्तर में ले जाया गया था। वहां हैड नन के पास एक बड़ी छड़ी रखी हुई थी। नन ने उन्हें शरारती बच्ची कहते हुए हाथ पर 10 बार छड़ी से मारा था। अर्चना ने स्वीकार किया कि उन्हें आज यह याद नहीं है कि उन्हें किस बात के लिए इतनी कठोर सजा दी गई थी, लेकिन उस वक्त का शारीरिक दर्द वह आज तक नहीं भूल पाई हैं।

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क्लास के बाहर घुटनों के बल बैठने की अनोखी सजा

अपने स्कूल के माहौल का जिक्र करते हुए अर्चना ने कहा कि देहरादून का वह कॉन्वेंट स्कूल बेहद सख्त अनुशासन के लिए जाना जाता था। वहां बच्चों को सजा देने के तरीके आम स्कूलों से बिल्कुल अलग थे। वहां बच्चों से उठक-बैठक नहीं करवाई जाती थी और न ही बकरा या मुर्गा बनाया जाता था। इसके बजाय, शरारत करने वाले बच्चों को क्लास के बाहर घुटनों के बल बैठने के लिए कहा जाता था। नन बच्चों से कहती थीं कि बैठो मेरे शरारती बच्चों, और बच्चों को गलियारे में वैसा ही करना पड़ता था। कॉन्वेंट स्कूल में यह सजा बहुत शर्मिंदगी से भरी लगती थी क्योंकि वहां हर छात्र से बहुत ही अनुशासित व्यवहार की उम्मीद की जाती थी। हालांकि नियमों की सख्ती के बावजूद अर्चना को अपना स्कूल बहुत पसंद था।

पढ़ाई में टॉपर और फर्स्ट बैंचर होने का अनुभव

शरारती स्वभाव होने के बावजूद अर्चना पढ़ाई-लिखाई में हमेशा आगे रहती थीं। वह अपनी क्लास में फर्स्ट बैंचर थीं और हमेशा टॉपर छात्रों में शामिल रहती थीं। उनकी इस प्रतिभा को देखकर टीचर्स अक्सर उनसे पूछा करते थे कि वह अपनी काबिलियत और प्रतिभा को शरारतों में क्यों बर्बाद कर रही हैं। जब अर्चना आगे चलकर अभिनय के क्षेत्र में आ गईं, तो उनके टीचर्स का सोचना था कि अर्चना को आईएएस या आईएफएस अफसर बनना चाहिए था। टीचर्स को लगता था कि एक्टिंग की दुनिया चुनकर उन्होंने अपनी जिंदगी और करियर खराब कर लिया है।

देहरादून से दिल्ली और फिर मुंबई तक का सफर

अर्चना पूरन सिंह का शैक्षणिक और पेशेवर सफर कई शहरों से होकर गुजरा। देहरादून से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद 18 से 19 साल की उम्र में वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई शिफ्ट हो गईं। वहां उन्होंने एक्टिंग के क्षेत्र में कदम रखा और एक सफल करियर की नींव रखी।

सवाल-जवाब

अर्चना पूरन सिंह को 6 साल की उम्र में क्या सजा मिली थी?
अर्चना पूरन सिंह जब पहली कक्षा में 6 साल की थीं, तब उन्हें हैड नन ने 10 बार छड़ी से मारा था।
अर्चना पूरन सिंह ने अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई कहां से की थी?
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा उत्तराखंड के देहरादून स्थित एक सख्त अनुशासन वाले कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की थी।
कॉन्वेंट स्कूल में शरारती बच्चों को क्या सजा दी जाती थी?
वहां उठक-बैठक करवाने के बजाय बच्चों को क्लासरूम के बाहर घुटनों के बल बैठा दिया जाता था।
अर्चना के स्कूल टीचर्स उन्हें भविष्य में क्या बनता देखना चाहते थे?
पढ़ाई में टॉपर होने के कारण उनके टीचर्स सोचते थे कि अर्चना आगे चलकर आईएएस (IAS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनेंगी।
मुंबई जाने से पहले अर्चना पूरन सिंह ने कहां से पढ़ाई की थी?
देहरादून से स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज से पढ़ाई की और 18-19 साल की उम्र में मुंबई शिफ्ट हो गईं।
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