किसी जमाने में टीवी पर आने वाले धारावाहिक अपनी कहानी से जितना जुड़ते थे, उतना ही जुड़ाव उनके टाइटल ट्रैक से भी बन जाता था। 2000 के दशक के ऐसे ही एक सुरीले सफर की मिसाल है सोनू निगम और पामेला जैन की आवाज में बना गीत 'जीवन कर लेता है श्रृंगार, सच है ना कुमकुम से', जो शो 'कुमकुम-एक प्यारा सा बंधन' का टाइटल ट्रैक था और आज भी सुनते ही उस दौर की याद ताजा कर देता है।
सात साल तक स्टार प्लस पर टिका रहा शो
'कुमकुम-एक प्यारा सा बंधन' 15 जुलाई 2002 को स्टार प्लस पर शुरू हुआ था और बिना किसी बड़े ब्रेक के 13 मार्च 2009 तक प्रसारित होता रहा। यानी करीब सात साल तक यह शो दर्शकों के दोपहर के समय का हिस्सा बना रहा, जो भारतीय डेली सोप्स के हिसाब से एक असाधारण लंबी पारी मानी जाती है। जब यह खत्म हुआ, तब तक यह 1449 एपिसोड तक पहुंच चुका था और उस दौर के सबसे लंबे समय तक चलने वाले दोपहर के धारावाहिकों में गिना जाने लगा। मुख्य किरदार कुमकुम को जूही परमार ने निभाया, जबकि सुमीत के रोल में हुसैन कुवाजेरवाला नजर आए। नियमित दर्शकों के लिए यह टाइटल ट्रैक एक तरह के संकेत की तरह काम करता था, धुन बजते ही समझ आ जाता था कि उनका पसंदीदा शो शुरू होने वाला है।
खुशी की शादी से अचानक आई त्रासदी तक
कहानी कुमकुम की उस शादी से शुरू होती है, जो उसकी वाधवा परिवार के बेटे जतिन से होती है। यह रिश्ता ठीक से बस भी नहीं पाता कि जतिन ब्रेन ट्यूमर के चलते चल बसता है, जिससे पूरा परिवार सदमे में आ जाता है और कुमकुम के आगे के जीवन को लेकर परेशान हो उठता है। उसका भविष्य अनिश्चित न रहे, इसलिए परिवार आखिरकार उसकी दोबारा शादी कराने का फैसला करता है, और यहीं से सुमीत उसकी जिंदगी में दाखिल होता है। इसके बाद कहानी रिश्तों के दोबारा बनने, पारिवारिक जिम्मेदारियों और निजी भावनाओं के टकराव तथा नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की रोजमर्रा की मुश्किलों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती चली जाती है। यही भावनात्मक कहानी सैकड़ों एपिसोड तक फैली रही और शो को महीनों नहीं, बल्कि सालों तक दर्शकों से जोड़े रखा।
दो आवाजें, एक धुन, दोनों वर्जन बने यादगार
जिस वक्त यह गाना रिकॉर्ड हुआ, सोनू निगम पहले से ही हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और सबसे ज्यादा मांग वाले प्लेबैक सिंगर्स में गिने जाते थे, यानी इंडस्ट्री में उनका नंबर-वन जैसा रुतबा था। इतने बड़े कद के बावजूद टीवी के इस टाइटल ट्रैक को उन्होंने जिस ईमानदारी और बारीकी से गाया, जिस तरह के काम को कई बड़े सिंगर मामूली असाइनमेंट मानकर छोड़ सकते थे, उसी ने इसे एक साधारण सीरियल जिंगल की बजाय लगभग कल्ट क्लासिक बना दिया। वहीं पामेला जैन, जिन्होंने इससे पहले कई क्षेत्रीय प्रोजेक्ट्स और बॉलीवुड फिल्मों के साथ-साथ 2000 के दशक के दूसरे लोकप्रिय शो में भी आवाज दी थी, के लिए यही गीत करियर का सबसे पहचाना जाने वाला और सबसे यादगार काम साबित हुआ। इस जोड़ी की खासियत यह रही कि दोनों गायकों ने एक ही धुन और बोल को अपनी-अपनी अलग शैली में रिकॉर्ड किया, फिर भी दोनों वर्जन आज तक श्रोताओं के जेहन में बराबर ताजा बने हुए हैं।
जूही परमार और हुसैन कुवाजेरवाला के करियर की नई उड़ान
जूही परमार के लिए यह धारावाहिक उनके ऐक्टिंग करियर के सबसे बड़े मोड़ों में से एक साबित हुआ। कुमकुम की भूमिका ने उन्हें देशभर के घरों में पहचान दिलाई, और यह पसंद सिर्फ लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही, उनकी अदाकारी को इंडियन टेली अवॉर्ड्स में बेस्ट एक्ट्रेस (क्रिटिक्स) के सम्मान से भी नवाजा गया। उनके सामने सुमीत का किरदार निभाने वाले हुसैन कुवाजेरवाला भी उतने ही दर्शक-पसंदीदा बन गए, और शो के पूरे दौर में दोनों की स्क्रीन जोड़ी को खूब सराहा गया। 'कुमकुम' से पहले हुसैन बेहद लोकप्रिय धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में भी काम कर चुके थे, लेकिन एक सपोर्टिंग चेहरे की बजाय लीड एक्टर के तौर पर अलग पहचान उन्हें इसी शो से मिली। बाद में उनका कद और बढ़ा, जब उन्होंने 'नच बलिए 2' का खिताब भी जीत लिया।
आज टेलीविजन का पूरा स्वरूप बदल चुका है। शोज को शूट करने की तकनीक, संगीत बनाने और प्रोड्यूस करने का तरीका, यहां तक कि कहानी कहने के अंदाज तक, 2009 के बाद से सब कुछ काफी बदल गया है। इसके बावजूद, जब भी 'जीवन कर लेता है श्रृंगार' की शुरुआती धुन बजती है, सुनने वाले सीधे उसी पुराने दौर में पहुंच जाते हैं। सोनू निगम और पामेला जैन की आवाज तथा जूही परमार-हुसैन कुवाजेरवाला की स्क्रीन केमिस्ट्री ने मिलकर 'कुमकुम-एक प्यारा सा बंधन' को भारतीय टीवी के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज करा दिया।


















