सैनिक स्कूल से निकलकर आईएएस, गूगल और इसरो तक पहुंचते हैं छात्रकुमकुम के टाइटल सॉन्ग ने सोनू निगम-पामेला जैन की आवाज को बना दिया था हर घर की पहचानशेफ शालू की टिप्स से घर पर बनेगा एकदम रेस्टोरेंट जैसा व्हाइट सॉस पास्ता, बच्चों को भी बेहद पसंद आएगानागौर में जयप्रकाश शर्मा ने गोबर और गौमूत्र से बनाई इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं, लंदन तक पहुंची मांगमहिला टी20 एशिया कप 2026: दुबई में भारत-पाक जंग, टॉस का गणित और स्पिनरों का राजशिक्षक दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया शिक्षकों का सम्मान, राधाकृष्णन को किया यादखाड़ी में बदलते सुरक्षा समीकरणों पर शशि थरूर के नए कॉलम ने खड़ा किया बड़ा सवालमानसून में आज भी फैंस को दीवाना बनाता है कुदरत का ये गीत, वजह जानकर चौंक जाएंगेझुंझुनूं में आज से शुरू हो रही ऐतिहासिक 24 कोसी परिक्रमा, लोहार्गल धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़सबालेंका से सेरेना विलियम्स तक, प्रेस कॉन्फ्रेंस के सवालों पर भड़कीं महिला खिलाड़ी
झुंझुनूं में आज से शुरू हो रही ऐतिहासिक 24 कोसी परिक्रमा, लोहार्गल धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़राजस्थान
5 सित॰ 2026, 12:15 pm (29 मिनट पहले)· 2

झुंझुनूं में आज से शुरू हो रही ऐतिहासिक 24 कोसी परिक्रमा, लोहार्गल धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

शेखावाटी के प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र लोहार्गल धाम में आज से पारंपरिक 24 कोसी परिक्रमा की शुरुआत हो रही है। इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

राजस्थान के शेखावाटी अंचल में स्थित ऐतिहासिक लोहार्गल धाम में आज शनिवार से पारंपरिक और आस्था से परिपूर्ण 24 कोसी परिक्रमा का भव्य आगाज होने जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है और देश के विभिन्न हिस्सों से भक्तों का यहां पहुंचना लगातार जारी है। कार्यक्रम की शुरुआत के तहत पवित्र सूर्यकुंड से साधु-संतों की देखरेख में श्रद्धालुओं की यह पैदल यात्रा आगे बढ़ेगी, जिसका मुख्य आकर्षण भगवान श्री ठाकुरजी की पालकी का स्वागत होगा।

इस धार्मिक आयोजन की रूपरेखा के अनुसार, खंडेला के चारोड़ा धाम से बाबा घनश्याम दास के मार्गदर्शन में भगवान श्री ठाकुरजी की मुख्य पालकी पहले ही रवाना हो चुकी है। इस पवित्र पालकी यात्रा में बड़ी संख्या में संत-महात्मा और आम श्रद्धालु शामिल हुए हैं, जो आज लोहार्गल धाम पहुंचेंगे। धाम पहुंचने पर इस पालकी का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद सूर्यकुंड के तट से आधिकारिक रूप से परिक्रमा की शुरुआत कर दी जाएगी।

ये भी पढ़ें

यह पूरी 24 कोसी परिक्रमा केवल एक साधारण यात्रा नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र की सदियों पुरानी संस्कृति और लोक आस्था का एक बड़ा प्रतीक है। लोहार्गल से शुरू होने वाली यह पदयात्रा किरोड़ी, शाकंभरी, नागकुंड, टपकेश्वर, शोभावती और खोरीकुंड जैसे कई महत्वपूर्ण और पवित्र धार्मिक पड़ावों से होकर गुजरेगी। अरावली पहाड़ियों की वादियों के बीच से गुजरने वाले इस मार्ग पर भक्तजन पैदल चलते हैं और रास्तेभर होने वाले भजन-कीर्तन से संपूर्ण वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक बन जाता है।

इस पावन स्थल के नाम और महत्व के पीछे महाभारत काल से जुड़ा एक बेहद प्राचीन इतिहास मौजूद है। चारोड़ा धाम के महंत बाबा घनश्याम दास के हवाले से यह मान्यता प्रचलित है कि महाभारत के भीषण युद्ध के उपरांत पांडव अपने पापों के प्रायश्चित के लिए विभिन्न तीर्थों के भ्रमण पर निकले थे और इसी क्रम में वे यहां आए थे। ऐसा विश्वास किया जाता है कि जब उन्होंने यहां के सूर्यकुंड में स्नान किया, तब उनके सभी लोहे के अस्त्र-शस्त्र पानी में गल गए थे, जिसके बाद से इस जगह का नाम लोहार्गल पड़ गया और इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला प्रमुख तीर्थ माना जाने लगा।

अरावली पर्वतमाला की प्राकृतिक सुंदरता के आंचल में बसा लोहार्गल नैसर्गिक सौंदर्य और धार्मिक विश्वास का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। यह पूरा इलाका सात पावन जलधाराओं और अनगिनत प्राचीन तीर्थों से जुड़ा हुआ है, जहां आने वाले लोग सूर्यकुंड में डुबकी लगाने के बाद अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन भी करते हैं। ऐसी गहरी धार्मिक मान्यता है कि इस कठिन परिक्रमा को पूरा करने और कुंड में स्नान करने से मनुष्य को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

जैसे-जैसे परिक्रमा के दिन आगे बढ़ेंगे, इस धाम में आने वाले यात्रियों की संख्या में और अधिक इजाफा दर्ज किया जाएगा। इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान का सबसे मुख्य और बड़ा आकर्षण भाद्रपद अमावस्या के अवसर पर लगने वाला विशाल मेला और सूर्यकुंड का शाही स्नान रहने वाला है। इस बार यह मुख्य मेला और शाही स्नान आगामी 11 सितंबर को आयोजित किया जाएगा, जिस दिन भारी जनसैलाब के लोहार्गल जुटने की पूरी संभावना है। कुंड में आस्था की डुबकी लगाने के साथ ही श्रद्धालु अपनी इस पवित्र परिक्रमा की परंपरा को संपन्न करेंगे।

सवाल-जवाब

लोहार्गल धाम में 24 कोसी परिक्रमा की शुरुआत कब से हो रही है?
लोहार्गल धाम में 24 कोसी परिक्रमा की शुरुआत शनिवार यानी आज से हो रही है।
भगवान श्री ठाकुरजी की मुख्य पालकी कहां से रवाना हुई थी?
भगवान श्री ठाकुरजी की मुख्य पालकी खंडेला स्थित चारोड़ा धाम से रवाना हुई थी।
इस परिक्रमा का मुख्य धार्मिक महत्व किस काल से जुड़ा है?
इस परिक्रमा का मुख्य धार्मिक महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है।
इस वर्ष सूर्यकुंड का शाही स्नान और मुख्य मेला कब आयोजित होगा?
इस वर्ष मुख्य मेला और शाही स्नान 11 सितंबर को आयोजित किया जाएगा।
लोहार्गल नाम पड़ने के पीछे क्या पौराणिक कथा है?
मान्यता है कि यहां सूर्यकुंड में स्नान करने के दौरान पांडवों के लोहे के अस्त्र-शस्त्र गल गए थे, जिसके कारण इस स्थान का नाम लोहार्गल पड़ा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 मिनट पहले

यह पारंपरिक आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इससे शेखावाटी अंचल में पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी को भी बड़ा बढ़ावा मिलता है। अरावली की पहाड़ियों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने से प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की चुनौती बढ़ जाती है, जिस पर प्रशासन की नजर रहेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 मिनट पहले

लोहार्गल धाम की इस 24 कोसी परिक्रमा में जुटने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा है। अरावली के दुर्गम रास्तों और विभिन्न पड़ावों पर यातायात नियंत्रण, भगदड़ रोकने के उपाय और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की तैनाती पर पुलिस बल को विशेष सतर्कता बरतनी होगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR