आगरा की अनसुनी विरासत
उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर आगरा अपनी भव्य मुग़लकालीन इमारतों जैसे ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हर साल लाखों पर्यटक इन शानदार धरोहरों को देखने आते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि आगरा में ऐसी भी कई ऐतिहासिक संरचनाएं हैं, जो आज सरकारी उपेक्षा और लापरवाही के चलते अपनी पहचान खो रही हैं। ऐसी ही एक बेहद महत्वपूर्ण इमारत, जो कभी मुग़ल सल्तनत का गौरव मानी जाती थी, अब पूरी तरह से खंडहर में बदलने की कगार पर है। यह ऐतिहासिक स्थल मुग़ल बादशाह अकबर की पहली और मुख्य पत्नी महारानी Ruqaiya Begum Sultana का मकबरा है, जो इस समय अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है।
देखरेख के अभाव में खंडहर बनता मकबरा
आगरा के बोदला सेक्टर 1 में स्थित यह प्राचीन मकबरा ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इतिहासकारों के अनुसार, इस खूबसूरत स्मारक का निर्माण सम्राट अकबर की पहली और प्रमुख पत्नी Ruqaiya Begum Sultana की स्मृति में किया गया था। एक समय था जब इस इमारत की भव्यता दूर-दूर तक दिखाई देती थी, लेकिन आज यह अपनी मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए तरस रही है।
इस ऐतिहासिक संरचना की हालत इतनी नाजुक हो चुकी है कि इसमें लगीं प्राचीन लाहौरी ईंटें अब ढीली होकर बाहर निकल रही हैं और दीवारों का चूना लगातार झड़ रहा है। यह जर्जर इमारत किसी भी समय जमींदोज हो सकती है, जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। हालाँकि, इसके शीर्ष पर आज भी मुग़ल स्थापत्य कला की पहचान बताने वाला एक गोल और आकर्षक गुंबद मौजूद है, जो इसके गौरवशाली अतीत का प्रमाण है।
अवैध अतिक्रमण और नियमों का उल्लंघन
इस ऐतिहासिक मकबरे के बर्बाद होने का एक बड़ा कारण इसके चारों ओर बसी घनी आबादी और धड़ल्ले से हो रहा अवैध निर्माण है। पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी ऐतिहासिक इमारत के 100 मीटर के दायरे में किसी भी नए निर्माण कार्य की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण लोगों ने यहाँ पक्के मकान बना लिए हैं।
अतिक्रमण के कारण यह मकबरा चारों तरफ से पूरी तरह से घिर चुका है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि इस ऐतिहासिक स्थल के पास भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का कोई बोर्ड तक नहीं लगा है, जिससे आम लोगों को इसके महत्व और इतिहास के बारे में जानकारी मिल सके।
मुग़लकालीन विरासत बना कूड़े का ढेर
उचित रखरखाव और सुरक्षा के अभाव में स्थानीय लोगों ने अब इस ऐतिहासिक इमारत के आसपास कूड़ा-कचरा डालना शुरू कर दिया है। नतीजतन, मुग़ल साम्राज्य की यह अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर एक कूड़ेदान में बदल गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का इस गंभीर स्थिति की ओर कोई ध्यान नहीं है। अगर प्रशासन और सरकार ने समय रहते इस प्राचीन मकबरे के जीर्णोद्धार और सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया, तो मुग़ल बादशाह अकबर की पहली पत्नी की यह आखिरी निशानी हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएगी और आने वाली पीढ़ियाँ इसे केवल इतिहास की किताबों में ही पढ़ पाएंगी, TrendKia की एक रिपोर्ट के अनुसार।













