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अयोध्या दान चोरी जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार से सवाल, स्वतंत्र जांच टीम बनाने का सुझावउत्तर प्रदेश
20 जुल॰ 2026, 6:37 pm (100 दिन पहले)· 1

अयोध्या दान चोरी जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार से सवाल, स्वतंत्र जांच टीम बनाने का सुझाव

राम मंदिर के दान में गड़बड़ी के मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मौजूदा SIT की भूमिका पर सवाल किए और पूरे मामले की जांच के लिए एक नई SIT बनाने का सुझाव दिया।

राम मंदिर के दान से जुड़े कथित घोटाले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की मौजूदा जांच व्यवस्था पर कई सवाल उठाए। अदालत ने साफ किया कि अभी तक बनी SIT ने अगर सिर्फ शुरुआती पड़ताल की है, तो पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एक नई और स्वतंत्र SIT गठित की जा सकती है।

सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को क्या बताया

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि पहले गठित SIT का मकसद सिर्फ यह जांचना था कि इस मामले में कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। इस टीम ने अपनी रिपोर्ट में माना कि मामला दर्ज करने लायक अपराध बनता है, जिसके आधार पर पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा SIT खुद इस मामले की जांच नहीं कर रही है, बल्कि उसका काम सिर्फ शुरुआती पड़ताल तक ही सीमित था और आगे की जांच के लिए अब तक कोई अलग टीम तय नहीं की गई थी।

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नई SIT बनाने का सुझाव

जब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या मामले की असली जांच के लिए अलग से कोई SIT बनाई गई है, तो अदालत को बताया गया कि ऐसी कोई टीम अब तक नहीं बनी है। इस पर अदालत ने सुझाव दिया कि पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक नई SIT का गठन किया जाना चाहिए, ताकि दान से जुड़ी गड़बड़ी की तह तक पहुंचा जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को करेगा, जिसमें आगे की रूपरेखा पर विचार होगा।

उसी वरिष्ठ IPS अधिकारी को मिल सकती है कमान

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बताया कि पहले बनी SIT में लखनऊ के कमिश्नर, वित्त विभाग के विशेष सचिव और लखनऊ के ही एक वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि नई SIT भी इसी वरिष्ठ IPS अधिकारी की अगुवाई में बनाई जाए, ताकि जांच की जिम्मेदारी उस अधिकारी को मिले जो पहले से इस मामले से परिचित है और पूरा मामला एक ही अनुभवी अधिकारी की निगरानी में आगे बढ़ सके।

मामले के राजनीतिकरण पर कोर्ट की नसीहत

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि अदालत इस पूरे मामले में बेहद सतर्कता से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस विषय का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और अदालत की मंशा सिर्फ इतनी है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और मामले का कोई ठोस व तार्किक नतीजा सामने आए, ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।

सरकार से निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करेंगे सॉलिसिटर जनरल

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे नई SIT बनाने के इस सुझाव पर उत्तर प्रदेश सरकार से निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराएं। हालांकि, अभी तक इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम आदेश या बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं किया है, और आगे की दिशा अगली सुनवाई में ही तय होने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या सवाल उठाया?
कोर्ट ने पूछा कि अगर अभी तक की SIT ने सिर्फ शुरुआती जांच की है, तो पूरे मामले की जांच के लिए अलग SIT क्यों नहीं बनाई गई।
पहले बनी SIT का काम क्या था?
सॉलिसिटर जनरल के मुताबिक, पहले वाली SIT सिर्फ यह देख रही थी कि मामले में कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं, और उसकी रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज हो चुकी है।
नई SIT का नेतृत्व कौन कर सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि पहले वाली SIT में शामिल रहे लखनऊ के उसी वरिष्ठ IPS अधिकारी को नई SIT की अगुवाई सौंपी जाए।
अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को करेगा।
क्या कोर्ट ने कोई अंतिम आदेश दिया है?
नहीं, अभी सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सुझाव दिया है और सॉलिसिटर जनरल से उत्तर प्रदेश सरकार से निर्देश लेकर बताने को कहा है, कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है।
पहले वाली SIT में कौन-कौन शामिल था?
इसमें लखनऊ के कमिश्नर, वित्त विभाग के विशेष सचिव और लखनऊ के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल थे।
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