उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित एक सरकारी कंपोजित स्कूल से गुरु-शिष्य की परंपरा को तार-तार करने वाला मामला सामने आया है। सुखपुरा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत बसंतपुर स्थित कम्पोजित विद्यालय में 5वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के साथ आपत्तिजनक हरकत करने के आरोप में 50 वर्षीय शिक्षक मनोज राय पर गाज गिरी है। जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद यह सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है।
जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद निलंबन कार्रवाई
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि बसंतपुर स्थित विद्यालय में पदस्थ शिक्षक मनोज राय को बीते बुधवार को सेवा से निलंबित किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से 1 सितंबर को एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी गई थी। इस प्राथमिक जांच रिपोर्ट में 5वीं क्लास की छात्रा के साथ आरोपी शिक्षक द्वारा की गई गलत हरकत और उत्पीड़न के आरोपों को सही पाया गया। रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद प्रशासनिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाते हुए निलंबन आदेश जारी कर दिए गए।
पीड़िता और सहपाठियों के बयानों ने खोली पोल
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित छात्रा ने निडर होकर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। छात्रा ने अपने दर्ज कराए गए औपचारिक बयान में स्पष्ट रूप से आरोपी शिक्षक मनोज राय का नाम लेते हुए उन पर प्रताड़ना और आपत्तिजनक आचरण के आरोप लगाए। केवल पीड़ित छात्रा ही नहीं, बल्कि कक्षा में मौजूद अन्य छात्र-छात्राओं ने भी पीड़िता के दावों का समर्थन किया और शिक्षक की गलत हरकतों की पुष्टि की। विद्यार्थियों के इन एकजुट बयानों ने प्राथमिक जांच में आरोपी शिक्षक के खिलाफ पुख्ता आधार तैयार किया।
विभागीय जांच का गठन और जांच अधिकारी की नियुक्ति
निलंबन के साथ ही आरोपी शिक्षक मनोज राय के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि मामले की गहराई से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सिकंदरपुर क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी पंकज कुमार सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। पंकज कुमार सिंह इस प्रकरण के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करेंगे और अपनी अंतिम रिपोर्ट विभाग को प्रस्तुत करेंगे, जिसके आधार पर आरोपी शिक्षक पर आगे की वैधानिक व प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
कुशीनगर और मेरठ में भी सामने आए थे ऐसे ही मामले
उत्तर प्रदेश के सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों में लापरवाही और उत्पीड़न की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले राज्य के कुशीनगर जिले से भी एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था, जहां एक छात्रा ने छेड़खानी का विरोध करते हुए कोचिंग सेंटर के अंदर शिक्षक को चप्पल से पीट दिया था। उस वक्त मौके पर मौजूद उग्र भीड़ ने आरोपी शिक्षक को सड़क पर थूककर चाटने के लिए मजबूर कर दिया था। इस पूरी घटना और मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से प्रसारित हुआ था।
इसी तरह, यूपी के मेरठ जिले में भी स्कूल प्रशासन की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आ चुका है। वहां छुट्टी होने के बाद 5वीं कक्षा की एक मासूम छात्रा को ध्यान दिए बिना कक्षा के भीतर ही बंद करके ताला लगा दिया गया था। बच्ची घंटों क्लासरूम में फंसी रही, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने स्कूल की प्रधानाचार्या और संबंधित शिक्षक दोनों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। बलिया की ताजा घटना ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





















