उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन पर्व पर राज्य के नागरिकों के नाम एक विशेष पत्र जारी किया है। इस संदेश में उन्होंने पूरे प्रदेश को पर्व की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन, उनकी शिक्षाओं और समतामूलक समाज के निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में वाल्मीकि जयंती के अवसर पर घोषित सार्वजनिक अवकाश वास्तव में आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के प्रति श्रद्धा और आदर प्रकट करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि अमर महाकाव्य रामायण के माध्यम से महर्षि ने सत्य, धर्म, मर्यादा और कर्तव्य के जो शाश्वत मूल्य मानवता को दिए हैं, वे आने वाली पीढ़ियों का सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे।
मर्यादा और सामाजिक सद्भाव का आदर्श दर्शन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि महर्षि वाल्मीकि ने प्रभु श्रीराम के पावन चरित्र के जरिए जिस आदर्श समाज का खाका खींचा था, उसमें न्याय, परस्पर प्रेम, सामाजिक समरसता और बंधुत्व की भावना को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्होंने प्रभु श्रीराम और निषादराज की प्रगाढ़ मित्रता का विशेष रूप से स्मरण कराया। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रसंग यह सिखाता है कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति आपसी आत्मीयता, आदर और समभाव में निहित है, न कि संकीर्ण सामाजिक पहचान या विभाजनकारी सोच में। उन्होंने जोर देकर कहा कि रामराज्य की आधारशिला हर नागरिक की गरिमा, सुरक्षा और सर्वांगीण कल्याण पर ही टिकी हुई है।
महर्षि वाल्मीकि से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का कायाकल्प
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार महर्षि के बताए मार्ग का अनुसरण करते हुए समाज के प्रत्येक तबके को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में चित्रकूट स्थित महर्षि वाल्मीकि के पावन साधना स्थल को नए सिरे से संवारने की ठोस पहल शुरू की गई है, ताकि वहां पहुंचने वाले श्रद्धालु और नई पीढ़ी उनके तपोमय जीवन से प्रत्यक्ष सीख ले सकें। इसके साथ ही, कानपुर के बिठूर में स्थित ऐतिहासिक महर्षि वाल्मीकि आश्रम के संरक्षण और वहां पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किए जा रहे हैं।
विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नामकरण महर्षि वाल्मीकि के नाम पर किया गया है। यह निर्णय उनकी स्मृतियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा इस पावन अवसर पर घोषित सार्वजनिक अवकाश भी इसी सांस्कृतिक कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। उन्होंने इस संबंध में X पर अपना संदेश साझा किया।
वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेखांकित किया कि महर्षि वाल्मीकि के मानवीय संदेशों को जमीन पर उतारने के लिए अंतिम पायदान पर मौजूद व्यक्ति का उत्थान अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वच्छताकर्मियों के सम्मान, उनकी सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए निरंतर समर्पित भाव से योजनाएं चला रही है। समाज के उपेक्षित वर्गों के सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर मिल सके।
पत्र में आगे विवरण देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम की मान्यता प्रदान कर उन्हें शासन की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। इसके अलावा मुसहर, कोल, थारू और घुमंतू समुदाय के लोगों तक पक्के आवास, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग के पात्र परिवारों को भूमिधरी अधिकार सौंपे जा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन जीने का ठोस संबल मिल रहा है।
युवा वर्ग से सामाजिक भेदभाव मिटाने का आह्वान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे प्रभु श्रीराम के मर्यादित आदर्शों को अपने आचरण में ढालें और किसी भी प्रकार के सामाजिक भेदभाव से दूर रहें। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति के मन से जाति, वर्ग और ऊंच-नीच की संकीर्ण दीवारें ढहेंगी, तभी एक समरस, सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का सपना सच हो पाएगा। पत्र के समापन पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि महर्षि वाल्मीकि के विचार सामाजिक एकता और समूची मानवता के कल्याण के लिए सदा प्रासंगिक बने रहेंगे।



















