उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित वसुंधरा पुलिस चौकी के पिछले हिस्से में हुए रहस्यमयी विस्फोट के मामले में पुलिस ने कड़ा कदम उठाते हुए औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह पूरा मामला वहां तैनात एक पुलिसकर्मी की आधिकारिक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है, जिसमें कई गंभीर कानूनों और अधिनियमों का हवाला दिया गया है। पुलिस महकमे के भीतर हुई इस घटना के बाद से सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता काफी बढ़ गई है और आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बरती जा रही है।
घटना का समय और नुकसान का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 6 नवंबर 2026 की रात लगभग 8:50 बजे की है, जबकि आधिकारिक मुकदमा 7 नवंबर 2026 को शाम 5:29 बजे दर्ज किया गया। FIR के मुताबिक, जिस समय यह धमाका हुआ, उस दौरान वसुंधरा पुलिस चौकी पर SI विकास सिंह ड्यूटी पर मौजूद थे। अचानक हुए इस तेज धमाके की गूंज से पूरी चौकी दहल उठी। विस्फोट का असर इतना तीव्र था कि चौकी के पिछले हिस्से में बने कमरों और बाथरूम की दीवारों में गहरी दरारें पड़ गईं। इसके अलावा वहां लगी खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए और चौकी के भीतर रखा अन्य सामान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
जांच और अज्ञात आरोपी पर शिकंजा
विस्फोट की गंभीरता को देखते हुए घटना के तुरंत बाद फील्ड यूनिट, डॉग स्क्वॉड और अन्य प्रमुख जांच एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए। फिलहाल इस मामले में किसी की सीधी पहचान नहीं हो पाई है, इसलिए FIR में अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह धमाका किस वजह से हुआ और इसमें किस किस्म के विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था। फॉरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए नमूनों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
दर्ज की गई कानूनी धाराएं
पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में कुल 7 सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें भारतीय न्याय संहिता और अन्य विशेष अधिनियम शामिल हैं
- भारतीय न्याय संहिता: BNS, 2023 की धारा 326(f) के तहत मामला दर्ज हुआ है।
- नुकसान से जुड़ी धारा: BNS, 2023 की धारा 326(g) को भी इसमें शामिल किया गया है।
- सरकारी कार्य में बाधा: BNS, 2023 की धारा 132 के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।
- सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षा: सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 जोड़ी गई है।
- संपत्ति क्षति अधिनियम: सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 4 के तहत भी केस दर्ज है।
- विस्फोटक अधिनियम: विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 3 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है।
- विस्फोटक सामग्री: विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4 को भी FIR में जगह मिली है।



















