उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में दिल्ली-रामपुर हाईवे के जीरो पॉइंट मुंढापांडे मोड़ पर 6 नवंबर को एक अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब सड़क पर अचानक लाखों मछलियां फैल गईं। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाई जा रही मछलियों के बच्चों की खेप अचानक तिरपाल फटने के कारण सड़क पर आ गिरी। इस हादसे की वजह से हाईवे के एक तरफ का यातायात पूरी तरह से ठप हो गया और गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं।
मछली बीज की खेप और भारी आर्थिक नुकसान
ट्रैक्टर में ले जाई जा रही ये मछलियां असल में छोटे बच्चे थे, जिन्हें स्थानीय बोलचाल में 'मछली का बीज' कहा जाता है। इन्हें किसी नजदीकी तालाब में पालन-पोषण के लिए ले जाया जा रहा था। इतनी बड़ी तादाद में जीवित मछलियों को ले जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली के भीतर प्लास्टिक का एक बड़ा तिरपाल बिछाकर उसमें पानी भरा गया था। इसी पानी के बीच मछलियों को रखा गया था। यात्रा के दौरान किसी कारणवश वह तिरपाल अचानक फट गया और सारा पानी बहाव के साथ सड़क पर आ गया, जिससे लाखों मछलियां हाईवे पर आ बिखरीं।
सड़क पर गिरने के बाद पर्याप्त पानी न मिलने के कारण कुछ ही देर में सभी मछलियां तड़पकर मर गईं। इस हादसे में व्यापारी और वाहन मालिक को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई और सफाई कार्य
सड़क पर अचानक लाखों मछलियों के आ जाने से चालकों ने गाड़ियां रोक दीं, जिससे तुरंत जाम की स्थिति बन गई। घटना की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों की मदद ली। झाड़ू और वाइपर का सहारा लेकर सड़क पर बिखरी मरी हुई मछलियों को एक तरफ हटाया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू कराई जा सकी।
हाईवे पर पहले भी हुए हैं ऐसे हादसे
सड़क पर किसी तरल या खतरनाक चीज के बह जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 5 अक्टूबर की रात को महाराष्ट्र के चंद्रपुर-बल्लारपुर बाईपास पर भी एक बड़ा हादसा हुआ था, जहां एक टैंकर पलटने के बाद हजारों लीटर डीजल सड़क पर फैल गया था। उस समय आग लगने के खतरे को देखते हुए पुलिस और दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई कर इलाके को खाली कराया था और यातायात नियंत्रित किया था। मुरादाबाद की घटना से यह स्पष्ट है कि हाईवे पर इस तरह के माल के परिवहन के दौरान सुरक्षा उपायों का ध्यान रखना कितना जरूरी है।



















