उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी चेतावनी बिंदु को पार करने के बाद अब खतरे के निशान की तरफ पहुंच रही है। तटीय इलाकों में बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिले का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। जलभराव और बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले नागरिकों तक तत्काल चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों को सभी आवश्यक दवाओं, प्राथमिक उपचार की सामग्रियों और आपातकालीन चिकित्सा उपकरणों से लैस रखा गया है, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में मरीजों का तुरंत इलाज किया जा सके। प्रत्येक टीम में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ अनुभवी स्टाफ नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक तैयारी और मेडिकल चौकियां
वाराणसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एन पी सिंह ने बाढ़ से निपटने की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद और चिकित्सा सेवा देने के लिए जिले में कुल 61 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। वर्तमान में परिस्थितियों को देखते हुए इनमें से 15 चौकियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों में मांग बढ़ेगी या जलस्तर में और बढ़ोतरी होगी, वैसे-वैसे बची हुई अन्य चौकियों को भी तुरंत कार्यरत कर दिया जाएगा। राहत कार्य में कोई ढिलाई न हो, इसके लिए प्रत्येक सक्रिय बाढ़ चौकी पर एक डॉक्टर सहित पांच स्वास्थ्य कर्मियों का दस्ता तैनात किया गया है, जो आपात समय में मरीजों को तुरंत उपचार मुहैया कराएंगे।
24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी दवाओं का स्टॉक
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों और हादसों के खतरे को देखते हुए इन चौकियों पर विशेष दवाओं का भंडारण किया गया है। चौकियों पर ओआरएस घोल, जीवन रक्षक दवाएं और एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए गए हैं। बाढ़ के दौरान पानी का स्तर बढ़ने से जहरीले जीवों और सांपों के काटने की घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पर्याप्त संख्या में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन टीमों को सौंपे हैं। वर्तमान में काम कर रही सभी बाढ़ चौकियां 24 घंटे लगातार सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी स्वास्थ्य सेवाओं और राहत कार्यों की पल-पल निगरानी कर रहे हैं।
इमरजेंसी कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर
आपातकालीन स्थितियों में त्वरित संपर्क स्थापित करने के लिए प्रशासन की ओर से एक समर्पित बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। आम नागरिकों की सुविधा और मदद के लिए तीन हेल्पलाइन नंबर 0542-2508550, 0542-2504170 और 9140037137 जारी किए गए हैं। कोई भी बाढ़ पीड़ित या संकट में फंसा व्यक्ति इन नंबरों पर फोन करके सीधे मदद मांग सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि कंट्रोल रूम में कॉल प्राप्त होते ही पीड़ित व्यक्ति तक जल्द से जल्द चिकित्सा और राहत टीम पहुंचा दी जाएगी।
वरुणा किनारे के मोहल्लों में स्थिति गंभीर, राहत शिविरों में व्यवस्था
वाराणसी में गंगा के साथ-साथ वरुणा नदी का पानी भी रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर चुका है। वरुणा नदी के किनारे स्थित 11 से अधिक मोहल्ले बाढ़ की चपेट में आकर प्रभावित हो चुके हैं। इन जलमग्न इलाकों से 350 से ज्यादा परिवारों के लगभग 1400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। बाढ़ पीड़ितों को जिला प्रशासन द्वारा स्थापित राहत शिविरों में ठहराया गया है, जहां उनके भोजन, पेयजल और रहने के उचित प्रबंध किए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ अफसर लगातार इन राहत केंद्रों का दौरा कर रहे हैं और सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।



















