बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार की दोपहर हुई जोरदार बारिश के बाद जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मूसलाधार बारिश के चलते शहर के तमाम इलाकों में जलजमाव की भयंकर स्थिति पैदा हो गई है, जिससे आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड संख्या 68 के अंतर्गत आने वाले मथनी तल रेलवे ओवरब्रिज के ठीक नीचे की सड़क पानी में पूरी तरह डूब चुकी है। यहाँ जलस्तर इतना अधिक है कि पैदल गुजरना भी दूभर हो गया है और लोगों को जलभराव के बीच से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सम्राट चौधरी के ससुराल के पास जलभराव
बारिश के बाद पानी से भरी यह सड़क खासी चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि यह बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ससुराल की तरफ जाने वाला मुख्य मार्ग है। उनके ससुराल से महज 200 मीटर की दूरी पर सड़क पर कई फीट तक पानी जमा हो गया है, जिससे विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। सड़क पर पानी भर जाने के कारण दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। पानी के बीच से गुजरने की कोशिश में कई मोटरसाइकिल और स्कूटी बंद हो जा रही हैं, जबकि सड़क पर फिसलन पैदा होने से हादसों का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
लगभग 46 गाँवों का है मुख्य मार्ग
यह मार्ग केवल एक मोहल्ले तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के करीब 46 गाँवों के निवासियों के लिए आवागमन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है। बारिश के कारण यहाँ पानी भर जाने से एक बहुत बड़ी आबादी का रोजमर्रा का सफर प्रभावित होता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मानसून के दौरान जरा सी बारिश होते ही इस इलाके में जलजमाव की समस्या सिर उठाने लगती है। लोगों का कड़ा दावा है कि पिछले लगभग 16 वर्षों से लगातार यही बदतर स्थिति बनी हुई है, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई पक्का और स्थायी समाधान नहीं ढूँढा जा सका है।
पानी निकालने के प्रयास और अधिकारियों का दौरा
सड़क पर जमा पानी को बाहर निकालने के लिए पटना नगर निगम की तरफ से वाटर पंप चालू किए गए हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने सारे पंप लगाए जाने के बावजूद पानी की निकासी संतोषजनक और प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रही है। कुछ दिन पहले ही स्थानीय विधायक रत्नेश कुमार और पटना नगर निगम के कमिश्नर ने खुद इस जलजमाव वाली जगह का निरीक्षण किया था। इस दौरान पानी की निकासी को लेकर कई उपायों पर लंबी चर्चा भी की गई थी, लेकिन मंगलवार को हुई बारिश के बाद हालात जस के तस नजर आ रहे हैं और तस्वीर में कोई सुधार नहीं हुआ है।
स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी चिंता
इस विकट जलजमाव के बीच सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। छोटे-छोटे बच्चों को इसी पानी भरे रास्ते से होकर अपने स्कूल आना-जाना पड़ता है, जिससे अभिभावकों की चिंता लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों की पुरजोर माँग है कि हर साल बरसात के मौसम में केवल वाटर पंप लगाने की औपचारिकता पूरी करने के बजाय इस जलजमाव की समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान किया जाए। इस बीच मौसम विभाग ने बिहार राज्य में भारी बारिश की चेतावनी पहले ही जारी कर दी है।



















